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सोशल साइट पर गम और गुस्से का सैलाब
Updated Tue, 02 Oct 2018 10:50 PM IST
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सोशल साइट पर गम और गुस्से का सैलाब
गोंडा। जिले के युवा सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप मिश्र कात्यायन की मौत ने सभी को झकझोर दिया है। इस हादसे को लेकर लोगों मे खासकर युवा वर्ग में जबरदस्त आक्रोश है।
इस मामले को लेकर सोशल साइट पर गम और गुस्से का सैलाब उमड़ पड़ा है। इस युवा को जानने वाला हर कोई इसे हादसा न मानकर हत्या मान रहा है। हादसे वाली जगह भी इस कार्यकर्ता की मौत को संदिग्ध बना रही है।
कौडिय़ा थाना क्षेत्र के फरेंदा शुक्ल गांव के मजरे कंचनपुर के रहने वाले प्रदीप मिश्र कात्यायन जिले के सामाजिक सरोकार के मुद्दों पर मुखर होकर आवाज उठाने वालों में से एक थे।
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दिल्ली की एक निजी कंपनी में अकाउंटेंट की नौकरी करने वाले प्रदीप जिले की समस्याओं को सड़क से लेकर सोशल साइट तक पर बेहद गंभीर तरीके से रखते थे। उनके तीखे सवाल जिले के अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक को चुभने वाले होते थे।
यही कारण था कि जिले के युवाओं का एक बड़ा वर्ग प्रदीप से जुड़ा हुआ था। प्रदीप एक सामाजिक संगठन जनसंवाद मंच के पदाधिकारी भी थे और मंगलवार से वह फोरलेन सड़क के निर्माण में बाधा बने एक अवैध होटल के खिलाफ धरने पर बैठने वाले थे।
इसी धरने में शामिल होने के लिए वह दो दिन पहले दिल्ली से गोंडा आए थे। धरने की रूपरेखा तय करने के बाद वह सोमवार रात करीब दस बजे अपने गांव जाने के लिए मुख्यालय से निकले थे। गोंडा-बहराइच मार्ग पर वह मुंडेरवा माफी गांव के समीप पहुंचे ही थे कि वह हादसे का शिकार हो गए।
मंगलवार की भोर मे जैसे ही प्रदीप के हादसे में मौत की खबर मुख्यालय पहुंची को लोग अवाक रह गए। इस युवा सामाजिक कार्यकर्ता की मौत ने हर किसी को झकझोर दिया। सोशल साइट पर प्रदीप की हत्या की आशंका जताने वाले संदेशों की बाढ़ सी आ गई।
हर कोई प्रदीप की मौत पर किसी गहरी साजिश की आशंका जता रहे थे। चारों तरफ गम और गुस्सा झलक रहा है। जनसंवाद मंच के सुनील त्रिपाठी ने प्रदीप की मौत को संदिग्ध बताते हुए लिखा है कि विरोध को अब इस कदर दबाया जाएगा। अतिक्रमण के खिलाफ लड़ाई की कीमत हम चुका रहे हैं, लेकिन प्रशासन...।
भाजपा नेता राम नाथ शुक्ल ने सोशल साइट पर लिखा है कि एक युवा, होनहार एवं साहसिक पत्रकार प्रदीप कात्यायन जो गोंडा जिले में भ्रष्टाचार की साहसिक लड़ाई लड़ता था, की हत्या करवा दी गई।
परसपुर विकास मंच के अध्यक्ष अरुण सिंह ने सोशल साइट पर लिखा है कि क्या हुआ कैसे हुआ कुछ समझ में नहीं आ रहा, हमारे आंदोलनों के युवा साथी अब इस दुनिया में नहीं रहा। दुर्घटना? संदेहास्पद स्थिति बन रही है।
बस प्रशासन ने न्यायिक जांच की मांग करते हैं जिससे दूध का दूध और पानी अलग हो जाए। अरविंद मिश्र ने लिखा है कि अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले प्रदीप कात्यायन की रोड एक्सीडेंट में हुई मौत सिर्फ एक साजिश है।
गोंडा। जिले के युवा सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप मिश्र कात्यायन की मौत ने सभी को झकझोर दिया है। इस हादसे को लेकर लोगों मे खासकर युवा वर्ग में जबरदस्त आक्रोश है।
इस मामले को लेकर सोशल साइट पर गम और गुस्से का सैलाब उमड़ पड़ा है। इस युवा को जानने वाला हर कोई इसे हादसा न मानकर हत्या मान रहा है। हादसे वाली जगह भी इस कार्यकर्ता की मौत को संदिग्ध बना रही है।
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कौडिय़ा थाना क्षेत्र के फरेंदा शुक्ल गांव के मजरे कंचनपुर के रहने वाले प्रदीप मिश्र कात्यायन जिले के सामाजिक सरोकार के मुद्दों पर मुखर होकर आवाज उठाने वालों में से एक थे।
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दिल्ली की एक निजी कंपनी में अकाउंटेंट की नौकरी करने वाले प्रदीप जिले की समस्याओं को सड़क से लेकर सोशल साइट तक पर बेहद गंभीर तरीके से रखते थे। उनके तीखे सवाल जिले के अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक को चुभने वाले होते थे।
यही कारण था कि जिले के युवाओं का एक बड़ा वर्ग प्रदीप से जुड़ा हुआ था। प्रदीप एक सामाजिक संगठन जनसंवाद मंच के पदाधिकारी भी थे और मंगलवार से वह फोरलेन सड़क के निर्माण में बाधा बने एक अवैध होटल के खिलाफ धरने पर बैठने वाले थे।
इसी धरने में शामिल होने के लिए वह दो दिन पहले दिल्ली से गोंडा आए थे। धरने की रूपरेखा तय करने के बाद वह सोमवार रात करीब दस बजे अपने गांव जाने के लिए मुख्यालय से निकले थे। गोंडा-बहराइच मार्ग पर वह मुंडेरवा माफी गांव के समीप पहुंचे ही थे कि वह हादसे का शिकार हो गए।
मंगलवार की भोर मे जैसे ही प्रदीप के हादसे में मौत की खबर मुख्यालय पहुंची को लोग अवाक रह गए। इस युवा सामाजिक कार्यकर्ता की मौत ने हर किसी को झकझोर दिया। सोशल साइट पर प्रदीप की हत्या की आशंका जताने वाले संदेशों की बाढ़ सी आ गई।
हर कोई प्रदीप की मौत पर किसी गहरी साजिश की आशंका जता रहे थे। चारों तरफ गम और गुस्सा झलक रहा है। जनसंवाद मंच के सुनील त्रिपाठी ने प्रदीप की मौत को संदिग्ध बताते हुए लिखा है कि विरोध को अब इस कदर दबाया जाएगा। अतिक्रमण के खिलाफ लड़ाई की कीमत हम चुका रहे हैं, लेकिन प्रशासन...।
भाजपा नेता राम नाथ शुक्ल ने सोशल साइट पर लिखा है कि एक युवा, होनहार एवं साहसिक पत्रकार प्रदीप कात्यायन जो गोंडा जिले में भ्रष्टाचार की साहसिक लड़ाई लड़ता था, की हत्या करवा दी गई।
परसपुर विकास मंच के अध्यक्ष अरुण सिंह ने सोशल साइट पर लिखा है कि क्या हुआ कैसे हुआ कुछ समझ में नहीं आ रहा, हमारे आंदोलनों के युवा साथी अब इस दुनिया में नहीं रहा। दुर्घटना? संदेहास्पद स्थिति बन रही है।
बस प्रशासन ने न्यायिक जांच की मांग करते हैं जिससे दूध का दूध और पानी अलग हो जाए। अरविंद मिश्र ने लिखा है कि अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले प्रदीप कात्यायन की रोड एक्सीडेंट में हुई मौत सिर्फ एक साजिश है।