{"_id":"595fb7e84f1c1b42548b46f2","slug":"101499445224-gonda-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"5 गांवों के 32 मजरों में घाघरा के पानी की दस्तक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
5 गांवों के 32 मजरों में घाघरा के पानी की दस्तक
Updated Fri, 07 Jul 2017 10:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
32 गांवों में घुसा पानी, पलायन तेज
24 घंटे में 40 सेमी बढ़ी घाघरा, खतरे के निशान से अब सिर्फ 15 सेमी दूर
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज/गोंडा। बांध न होने से घाघरा नदी का पानी बड़ी तेजी से तहसील करनैलगंज के गांवों मे घुसने लगा है। 24 घंटे पहले जहां काशीपुर और नकहरा गांव तक ही घाघरा का पानी पहुंचा था तो वहीं शुक्रवार को 24 घंटे बाद इसका पानी 32 गांवों तक पहुंच गया। जिसकी जद मे आकर ये गांव घुटनों तक पानी में डूब चुके हैं। वहीं घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। गुरुवार को जो जलस्तर खतरे के निशान से 55 सेमी नीचे था, वह शुक्रवार को कम होकर 15 सेमी रह गया है। आशंका है कि जलस्तर में अगर इसी तरह से बढ़ोत्तरी होती रही तो नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगेगी और तब तक कई और गांव नदी के पानी की चपेट में आ जाएंगे। इस कारण लोगों ने सुरक्षित स्थान की तरफ पलायन तेज कर दिया।
बीते 11 साल के भीतर एल्गिन-चरसड़ी बांध बनने के बाद भले ही चार बार क्यों न कटा हो, लेकिन बांध कटने के बाद जो स्थिति बीते वर्षों में रही, उससे कहीं ज्यादा खराब स्थिति इस बार पैदा हो गई है। बांध न होने से घाघरा नदी की एक धार और उससे आना वाला पानी सीधे तहसील क्षेत्र के गांवों में भर रहा है। जिससे बाढ़ की स्थितियां भयावह होती नजर आ रही हैं। बाढ़ के शुरूआती दौर में जब यह हाल है तो आगे क्या होगा, इसे लेकर लोग काफी बेचैन हैं। शुक्त्रस्वार को घाघरा का पानी तेजी से करनैलगंज तहसील के गांवों में घुसने लगा। शुक्त्रस्वार को नकहरा के दो मजरे खालेपुरवा व राधेपुरवा में पानी भर गया। प्रशासन ने दोनों मजरों को पूरी तरह से खाली करा लिया है। बाराबंकी सीमा पर बसे (गोंडा जिले के प्रस्तावित गांव) परसावल, मांझा रायपुर, नैपुरा एवं कमियार के 32 मजरों, जिसमें भुइरहन पुरवा, मठियारन पुरवा, इन्सपेक्टर पुरवा, बद्रीपुरवा, चन्द्रबख्श पुरवा, जंग बहादुर पुरवा, नंदलाल पुरवा, एवं मुन्ना पुरवा, नैपुरा, सियारामपुरवा, रामचन्दर पुरवा, मंगलपुरवा, नरेश पुरवा, ननके पुरवा, रायपुर में भगवानदास पुरवा, कल्लूपुरवा, टेढे़पुरवा, गोड़ियनपुुरवा, तथा कमियार में ललईपुरवा, सियाराम पुरवा, बंधवनपुरवा, कोनहनपुरवा, जग्गूपुरवा, कंटिहनपुरवा, गठरहनपुरवा, गठबंधनपुरवा शामिल है, में बाढ़ का पानी घुटनों तक भर चुका है। यहां के लोग पलायन कर बंधे पर जा रहे हैं, जबकि बचे बंधे को भी घाघरा की तेज लहरें काटने में लगी हैं। इससे ग्रामीणों व बाढ पीड़ितों को सुरक्षित स्थान की तलाश के लिए परेशान होना पड़ रहा है। वहीं प्रशासन बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में बाढ़ पीड़ितों की कोई मदद या संसाधन मुहैया नहीं करा पा रहा है। बता दें कि घाघरा नदी के खतरे का निशान एल्गिन-चरसड़ी ब्रिज पर 106.07 मीटर है, जिससे अब नदी सिर्फ 15 सेमी ही नीचे रह गई है। शुक्रवार को नदी का जलस्तर 105.856 था।
इनसेट
नालों से रुकेगी तबाही
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लिए तीन नाले बाढ़ पीड़ितों के लिए मददगार साबित हो सकतेे हैं। प्रतापपुर-झिंगही नाला, चचरी नाला व कमियार नाला क्षेत्र में तबाही रोंकने के लिए बाढ़ के दुश्मन बनेंगे। घाघरा नदी की धारा करनैलगंज की ओर मुड़ चुकी है और तेजी से पानी क्षेत्र में आ रहा है। कमियार नाले में बाबामांझा के निकट लगा रेगुलेटर खोल दिए जाने से बाढ़ का पानी पुुुन: घाघरा में वापस चला जाता है। नालों से बाढ़ का पानी तीन भागों में बंट जाता है, जिससे क्षेत्र को बाढ़ के संकट से बचाया जा सकता है। लेकिन दिक्कत यह है कि जगह-जगह से ये नाले चोक हो गए हैं। वर्ष 2011 में इन नालों के चोक होने से 18 लोगों को बंधा कटने पर अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
विज्ञापन
इनसेट
लेखपाल ने बचाई बालक की जान
शुक्रवार को एल्गिन-चरसड़ी बांध के किनारे परसावल गांव के नजदीक इंस्पेक्टरपुरवा में रहने वाले मंगलप्रसाद के 15 वर्षीय बेटे संदीप का बरसात के दौरान पैर फिसल गया और वह घाघरा नदी में चला गया। बालक को डूबता देख परसावल बांध पर मौजूद लेखपाल सुरेशचन्द्र ने नदी में छलांग लगा दी और उसे नदी की गहराई में जाने से पहले ही बचा लिया।
फोटो-9-10-11-12
विज्ञापन
24 घंटे में 40 सेमी बढ़ी घाघरा, खतरे के निशान से अब सिर्फ 15 सेमी दूर
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज/गोंडा। बांध न होने से घाघरा नदी का पानी बड़ी तेजी से तहसील करनैलगंज के गांवों मे घुसने लगा है। 24 घंटे पहले जहां काशीपुर और नकहरा गांव तक ही घाघरा का पानी पहुंचा था तो वहीं शुक्रवार को 24 घंटे बाद इसका पानी 32 गांवों तक पहुंच गया। जिसकी जद मे आकर ये गांव घुटनों तक पानी में डूब चुके हैं। वहीं घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। गुरुवार को जो जलस्तर खतरे के निशान से 55 सेमी नीचे था, वह शुक्रवार को कम होकर 15 सेमी रह गया है। आशंका है कि जलस्तर में अगर इसी तरह से बढ़ोत्तरी होती रही तो नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगेगी और तब तक कई और गांव नदी के पानी की चपेट में आ जाएंगे। इस कारण लोगों ने सुरक्षित स्थान की तरफ पलायन तेज कर दिया।
बीते 11 साल के भीतर एल्गिन-चरसड़ी बांध बनने के बाद भले ही चार बार क्यों न कटा हो, लेकिन बांध कटने के बाद जो स्थिति बीते वर्षों में रही, उससे कहीं ज्यादा खराब स्थिति इस बार पैदा हो गई है। बांध न होने से घाघरा नदी की एक धार और उससे आना वाला पानी सीधे तहसील क्षेत्र के गांवों में भर रहा है। जिससे बाढ़ की स्थितियां भयावह होती नजर आ रही हैं। बाढ़ के शुरूआती दौर में जब यह हाल है तो आगे क्या होगा, इसे लेकर लोग काफी बेचैन हैं। शुक्त्रस्वार को घाघरा का पानी तेजी से करनैलगंज तहसील के गांवों में घुसने लगा। शुक्त्रस्वार को नकहरा के दो मजरे खालेपुरवा व राधेपुरवा में पानी भर गया। प्रशासन ने दोनों मजरों को पूरी तरह से खाली करा लिया है। बाराबंकी सीमा पर बसे (गोंडा जिले के प्रस्तावित गांव) परसावल, मांझा रायपुर, नैपुरा एवं कमियार के 32 मजरों, जिसमें भुइरहन पुरवा, मठियारन पुरवा, इन्सपेक्टर पुरवा, बद्रीपुरवा, चन्द्रबख्श पुरवा, जंग बहादुर पुरवा, नंदलाल पुरवा, एवं मुन्ना पुरवा, नैपुरा, सियारामपुरवा, रामचन्दर पुरवा, मंगलपुरवा, नरेश पुरवा, ननके पुरवा, रायपुर में भगवानदास पुरवा, कल्लूपुरवा, टेढे़पुरवा, गोड़ियनपुुरवा, तथा कमियार में ललईपुरवा, सियाराम पुरवा, बंधवनपुरवा, कोनहनपुरवा, जग्गूपुरवा, कंटिहनपुरवा, गठरहनपुरवा, गठबंधनपुरवा शामिल है, में बाढ़ का पानी घुटनों तक भर चुका है। यहां के लोग पलायन कर बंधे पर जा रहे हैं, जबकि बचे बंधे को भी घाघरा की तेज लहरें काटने में लगी हैं। इससे ग्रामीणों व बाढ पीड़ितों को सुरक्षित स्थान की तलाश के लिए परेशान होना पड़ रहा है। वहीं प्रशासन बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में बाढ़ पीड़ितों की कोई मदद या संसाधन मुहैया नहीं करा पा रहा है। बता दें कि घाघरा नदी के खतरे का निशान एल्गिन-चरसड़ी ब्रिज पर 106.07 मीटर है, जिससे अब नदी सिर्फ 15 सेमी ही नीचे रह गई है। शुक्रवार को नदी का जलस्तर 105.856 था।
विज्ञापन
इनसेट
नालों से रुकेगी तबाही
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लिए तीन नाले बाढ़ पीड़ितों के लिए मददगार साबित हो सकतेे हैं। प्रतापपुर-झिंगही नाला, चचरी नाला व कमियार नाला क्षेत्र में तबाही रोंकने के लिए बाढ़ के दुश्मन बनेंगे। घाघरा नदी की धारा करनैलगंज की ओर मुड़ चुकी है और तेजी से पानी क्षेत्र में आ रहा है। कमियार नाले में बाबामांझा के निकट लगा रेगुलेटर खोल दिए जाने से बाढ़ का पानी पुुुन: घाघरा में वापस चला जाता है। नालों से बाढ़ का पानी तीन भागों में बंट जाता है, जिससे क्षेत्र को बाढ़ के संकट से बचाया जा सकता है। लेकिन दिक्कत यह है कि जगह-जगह से ये नाले चोक हो गए हैं। वर्ष 2011 में इन नालों के चोक होने से 18 लोगों को बंधा कटने पर अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
विज्ञापन
इनसेट
लेखपाल ने बचाई बालक की जान
शुक्रवार को एल्गिन-चरसड़ी बांध के किनारे परसावल गांव के नजदीक इंस्पेक्टरपुरवा में रहने वाले मंगलप्रसाद के 15 वर्षीय बेटे संदीप का बरसात के दौरान पैर फिसल गया और वह घाघरा नदी में चला गया। बालक को डूबता देख परसावल बांध पर मौजूद लेखपाल सुरेशचन्द्र ने नदी में छलांग लगा दी और उसे नदी की गहराई में जाने से पहले ही बचा लिया।
फोटो-9-10-11-12