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जान जोखिम में डाल रोज सफर करते 10 हजार लोग
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गोंडा में उतरौला रोड पर धानेपुर में ब्लॉक तिराहे से गुजरती ओवरलोड टैक्सी जिस पर पांव दान पर खड़ ह?
- फोटो : GONDA
गोंडा। जिले में छह दर्जन ऐसे निजी वाहन हैं जो सड़कों पर यमदूत बनकर दौड़ रहे हैं। टैक्सी, मैक्स, कमांडर,जीप सेवा के नाम पर चलने वाले इन वाहनों में दस हजार से अधिक लोग सफर कर रोज अपनी जिंदगी का दांव लगा रहे हैं। सामान व सवारियों से खचाखच भरे इन वाहनों की कमान भी ऐसे चालक के हाथ होती है जो अप्रशिक्षित होते हुए खुद को हुनरमंद साबित करने का प्रयास करते हैं। चालक सीट पर बैठने की जगह लटककर ड्राइविंग करना, पावदान पर सात-आठ तथा अगल-बगल सवारियों को लटकाकर यात्रा करने के करतब यहां लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहे हैं फिर भी जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
जिले में गोंडा-उतरौला, गोंडा-बलरामपुर, गोंडा-अयोध्या, गोंडा-बहराइच, गोंडा से कटरा, गोंडा से खरगूपुर, विभिन्न मार्गों पर करीब 300 से अधिक निजी वाहन जीप, कमांडर, मार्शल, टैक्सी, मैक्स सेवा के नाम पर दौड़ रहे हैं। इन वाहनों में करीब छह दर्जन वाहन ऐेसे हैं जो कमाई के चक्कर मेें लोगों की जिदंगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। दिन भर सवारी ढोने वाले ये वाहन कस्बों से मुख्यालय तक तीन चक्कर लगाते है। एक बार में केवल 15 सवारियां बैठाने का नियम है लेकिन अधिक आमदनी के चक्कर में यह 25 से 30 सवारियां तक बैठा लेेते है।
यही नहीं पावदान पर ही सात से आठ लोग, अगल-बगल तीन चार सवारियां, ड्राइविंग सीट पर सवारियों को बैठाकर खुद लटकर वाहन चलाते ये चालक न तो कही प्रशिक्षण लिए होते हैं और न ही इनका कोई रजिस्ट्रेशन होता है। यही नहीं इनमें से अधिकांश का वाहन चलाने का लाइसेंस भी नहीं होता है। ऐसे में कोई हादसा हो जाए तो यह सीधे भाग खड़े होते हैं। घर जल्दी पहुंचने के चक्कर में लोग इन्हीं वाहनों से यात्रा कर अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं। परिणाम यह होता है कि वह घर तो नही पहुंचते हैं लेकिन अस्पताल जरूर पहुंच जाते हैं। इन डग्गामार वाहनों को पुलिस व परिवहन के लोगों का सीधा संरक्षण प्राप्त होता है जिसके चलते चेकिंग होते ही इन्हें सूचना मिल जाती है फिर यह रास्ता बदलकर निकल जाते हैं। जब कोई हादसा होता है, संभागीय परिवहन विभाग व थानों की पुलिस चेकिंग का नाटक करती है लेकिन इसका नाम मात्र भी असर इन डग्गामार वाहनों के चालकों पर नहीं होता है।
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सुरक्षा व सम्मान दोनों से होता है खिलवाड़
गोंडा। डग्गामार वाहनों में यात्रियों की सम्मान व सुरक्षा दोनों के साथ खिलवाड़ होता है। सबसे अधिक परेशानी बेटियों व महिलाओं को होती है जहां वह हर पल डरी व सहमी रहती हैं। पढ़ाई के लिए गोरखपुर से यहां आई शालिनी सिंह का कहना है कि यहां अन्य शहरों की अपेक्षा बेटियां व महिलाएं ज्यादा भयभीत रहती हैं। मनकापुर बाजार निवासिनी गरिमा कसौंधन का कहना है कि अप्रशिक्षित चालकों से अक्सर जाम लगा जाता है जिसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ता है।
राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज की छात्रा स्नेहा कुमारी का कहना है कि मनकापुर बस स्टाप पर बेतरतीब वाहन खड़े होने से अक्सर जाम लगा रह जाता है जिससे उन लोगों को कॉलेज पहुंचने में देर हो जाती है। पल्लवी सिंह का कहना है कि उतरौला के लिए केवल सड़क ही साधना है। यहां रेल सेवा नहीं है, इसलिए डग्गमार वाहनों न चाहते हुए पावदान पर लटकाकर यात्रा कराते हैं। बस्ती जिले की निवासिनी एकता चौधरी का कहना है कि अन्य जिलों की अपेक्षा यहां बेटियों व महिलाओं के लिए सफर बड़ा ही डरावना होता है। कब कौन क्या कह दे, इसे लेकर बेटियां महिलाएं चिंतित रहती है।
मालिकों व चालकों का अपना है दर्द, नपाप बिना कोई सुविधा दिए करती है वसूली
निजी वाहनों के मालिक व चालकों का अपना दर्द है कि नगर पालिका परिषद बिना उन्हें कोई सुविधा दिए बगैर ही वसूली कर रहा है। टेंपो का संचालन कर रहे ज्ञानदत्त पांडेय का कहना है कि टैक्सी स्टैंड के नाम पर प्रत्येक वाहन से 130 रुपया वसूला जाता है लेकिन वाहन खड़ा करने के लिए न तो जमीन है और न ही यात्रियों के लिए टिन शेड व पेयजल आदि की सुविधा। टैक्सी संचालन करने वाले जगदंबा पाठक का कहना है कि नपाप, संभागीय परिवहन, पुलिस सभी केवल अपना शुल्क वसूलते हैं लेकिन निजी वाहनों के मालिक व संचालकों की परेशानी सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है फिर भी वे सब जनता के दर्द को समझते हुए लोगों को गंतव्य तक पहुंचाने का काम करते हैं।
रेलवे स्टेशन से निकलते हैं अधिक डग्गामार वाहन
जिले में सबसे अधिक डग्गामार वाहन रेलवे स्टेशन से निकलते हैं। दूरदराज कमाकर लौटे लोगों से मुंहमांगा दाम लेकर डग्गामार वाहनों के चालक उन्हें घर जल्दी पहुंचाने का लालच देकर पायदान पर लटका देते हैं जिससे अक्सर हादसे हो जाते हैं।
यातायात उपनिरीक्षक समेत 11 सिपाहियों को चेकिंग में लगाया गया है। इन्हें यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए 48 होमगार्ड भी दिए गए हैं जिन्हें यातायात नियमों का अनुपालन कराने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा सभी चौकी प्रभारियों को ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। -जितेंद्र कुमार दूबे, सीओ यातायात
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जिले में गोंडा-उतरौला, गोंडा-बलरामपुर, गोंडा-अयोध्या, गोंडा-बहराइच, गोंडा से कटरा, गोंडा से खरगूपुर, विभिन्न मार्गों पर करीब 300 से अधिक निजी वाहन जीप, कमांडर, मार्शल, टैक्सी, मैक्स सेवा के नाम पर दौड़ रहे हैं। इन वाहनों में करीब छह दर्जन वाहन ऐेसे हैं जो कमाई के चक्कर मेें लोगों की जिदंगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। दिन भर सवारी ढोने वाले ये वाहन कस्बों से मुख्यालय तक तीन चक्कर लगाते है। एक बार में केवल 15 सवारियां बैठाने का नियम है लेकिन अधिक आमदनी के चक्कर में यह 25 से 30 सवारियां तक बैठा लेेते है।
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यही नहीं पावदान पर ही सात से आठ लोग, अगल-बगल तीन चार सवारियां, ड्राइविंग सीट पर सवारियों को बैठाकर खुद लटकर वाहन चलाते ये चालक न तो कही प्रशिक्षण लिए होते हैं और न ही इनका कोई रजिस्ट्रेशन होता है। यही नहीं इनमें से अधिकांश का वाहन चलाने का लाइसेंस भी नहीं होता है। ऐसे में कोई हादसा हो जाए तो यह सीधे भाग खड़े होते हैं। घर जल्दी पहुंचने के चक्कर में लोग इन्हीं वाहनों से यात्रा कर अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं। परिणाम यह होता है कि वह घर तो नही पहुंचते हैं लेकिन अस्पताल जरूर पहुंच जाते हैं। इन डग्गामार वाहनों को पुलिस व परिवहन के लोगों का सीधा संरक्षण प्राप्त होता है जिसके चलते चेकिंग होते ही इन्हें सूचना मिल जाती है फिर यह रास्ता बदलकर निकल जाते हैं। जब कोई हादसा होता है, संभागीय परिवहन विभाग व थानों की पुलिस चेकिंग का नाटक करती है लेकिन इसका नाम मात्र भी असर इन डग्गामार वाहनों के चालकों पर नहीं होता है।
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सुरक्षा व सम्मान दोनों से होता है खिलवाड़
गोंडा। डग्गामार वाहनों में यात्रियों की सम्मान व सुरक्षा दोनों के साथ खिलवाड़ होता है। सबसे अधिक परेशानी बेटियों व महिलाओं को होती है जहां वह हर पल डरी व सहमी रहती हैं। पढ़ाई के लिए गोरखपुर से यहां आई शालिनी सिंह का कहना है कि यहां अन्य शहरों की अपेक्षा बेटियां व महिलाएं ज्यादा भयभीत रहती हैं। मनकापुर बाजार निवासिनी गरिमा कसौंधन का कहना है कि अप्रशिक्षित चालकों से अक्सर जाम लगा जाता है जिसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ता है।
राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज की छात्रा स्नेहा कुमारी का कहना है कि मनकापुर बस स्टाप पर बेतरतीब वाहन खड़े होने से अक्सर जाम लगा रह जाता है जिससे उन लोगों को कॉलेज पहुंचने में देर हो जाती है। पल्लवी सिंह का कहना है कि उतरौला के लिए केवल सड़क ही साधना है। यहां रेल सेवा नहीं है, इसलिए डग्गमार वाहनों न चाहते हुए पावदान पर लटकाकर यात्रा कराते हैं। बस्ती जिले की निवासिनी एकता चौधरी का कहना है कि अन्य जिलों की अपेक्षा यहां बेटियों व महिलाओं के लिए सफर बड़ा ही डरावना होता है। कब कौन क्या कह दे, इसे लेकर बेटियां महिलाएं चिंतित रहती है।
मालिकों व चालकों का अपना है दर्द, नपाप बिना कोई सुविधा दिए करती है वसूली
निजी वाहनों के मालिक व चालकों का अपना दर्द है कि नगर पालिका परिषद बिना उन्हें कोई सुविधा दिए बगैर ही वसूली कर रहा है। टेंपो का संचालन कर रहे ज्ञानदत्त पांडेय का कहना है कि टैक्सी स्टैंड के नाम पर प्रत्येक वाहन से 130 रुपया वसूला जाता है लेकिन वाहन खड़ा करने के लिए न तो जमीन है और न ही यात्रियों के लिए टिन शेड व पेयजल आदि की सुविधा। टैक्सी संचालन करने वाले जगदंबा पाठक का कहना है कि नपाप, संभागीय परिवहन, पुलिस सभी केवल अपना शुल्क वसूलते हैं लेकिन निजी वाहनों के मालिक व संचालकों की परेशानी सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है फिर भी वे सब जनता के दर्द को समझते हुए लोगों को गंतव्य तक पहुंचाने का काम करते हैं।
रेलवे स्टेशन से निकलते हैं अधिक डग्गामार वाहन
जिले में सबसे अधिक डग्गामार वाहन रेलवे स्टेशन से निकलते हैं। दूरदराज कमाकर लौटे लोगों से मुंहमांगा दाम लेकर डग्गामार वाहनों के चालक उन्हें घर जल्दी पहुंचाने का लालच देकर पायदान पर लटका देते हैं जिससे अक्सर हादसे हो जाते हैं।
यातायात उपनिरीक्षक समेत 11 सिपाहियों को चेकिंग में लगाया गया है। इन्हें यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए 48 होमगार्ड भी दिए गए हैं जिन्हें यातायात नियमों का अनुपालन कराने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा सभी चौकी प्रभारियों को ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। -जितेंद्र कुमार दूबे, सीओ यातायात