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टेढ़ी नदी में आयी बाढ़ ने किसानों को किया कंगाल
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गोंडा के बालपुर के पास टेढ़ी नदी ।
- फोटो : GONDA
गोंडा। करीब 15 साल बाद टेढ़ी नदी के दिखे रौद्र स्वरूप ने किसानों की कमर तोड़ दी है। करीब दस हजार बीघा फसल नदी की बाढ़ में समा कर नष्ट हो गई। इसका सीधा खामियाजा कंगाल हुए किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
टेढ़ी नदी के कछार व किनारे के गांवों व उसमें बसने वाले किसानों के खेतों में पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। पीड़ित किसानों ने बाढ़ में नष्ट फसल का निरीक्षण कर उचित मुआवजा दिलवाने की मांग प्रशासन से की है।
कटरा बाजार, हलधरमऊ, झंझरी, परसरपुर, तरबगंज, नबाबगंज ब्लाक के सैकड़ों गांव नदी किनारे बसे हैं। किसानों का आरोप है कि बहराइच के साइफन से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण नदी ने रौद्र रूप धारण किया है। इससे नकदी फसल गन्ना सहित मक्का, धान, उर्द, अरहर सहित अन्य फसल नष्ट हो गयी है।
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इनके सामने खाने पीने से लेकर पशुओं के चारे की समस्या तक पैदा हो गयी है। ब्लाक कटरा बाजार के मेहरवानाबाद, फूलपुर, देवापसिया,टेपरा, जयरामजोत, शिवगण, हलधरमऊ के झौहना, महादेवा, पिपरी रावत सहित दर्जनों गांवों के किसानों की फसल बाढ़ के पानी में डूबी हुई है। किसानों का आरोप है कि बहराइच व नेपाल का पानी छोड़े जाने से यह समस्या हुई है।
किसान अनिल उपाध्याय, भानू सिंह, सुरेंद्र उपाध्याय सहित अन्य पीड़ितों ने बताया कि इस बार नदी में अधिक पानी छोड़े जाने से फसल डूब गयी है। किसानों ने सरकार से बाढ़ में नष्ट हुई फसल का निरीक्षण करके उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। टेढ़ी नदी का पानी अब गांव के अंदर भी घुस गया है। कुछ स्कूलों में भी पानी भरा हुआ है। आने जाने के रास्ते पर पानी होने से गांव से बाहर निकलने में भी उठानी पड़ रही है।
बहराइच के चित्तौड़ झील से निकलकर अयोध्या के सरयू नदी में मिलने वाली यह नदी टेढ़े मेढे़ रास्ते से हो कर गुजरती है। इसी लिए इसे टेढ़ी नदी कहा जाता है। इस नदी को कुटिला गंगा के नाम से भी जाना जाता है। नदी के किनारे जिले के 6 ब्लाक के सैकड़ों गांव पंचायतें बसी हैं। जिनके जीवकोपार्जन का मुख्य साधन खेती है।
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टेढ़ी नदी के कछार व किनारे के गांवों व उसमें बसने वाले किसानों के खेतों में पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। पीड़ित किसानों ने बाढ़ में नष्ट फसल का निरीक्षण कर उचित मुआवजा दिलवाने की मांग प्रशासन से की है।
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कटरा बाजार, हलधरमऊ, झंझरी, परसरपुर, तरबगंज, नबाबगंज ब्लाक के सैकड़ों गांव नदी किनारे बसे हैं। किसानों का आरोप है कि बहराइच के साइफन से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण नदी ने रौद्र रूप धारण किया है। इससे नकदी फसल गन्ना सहित मक्का, धान, उर्द, अरहर सहित अन्य फसल नष्ट हो गयी है।
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इनके सामने खाने पीने से लेकर पशुओं के चारे की समस्या तक पैदा हो गयी है। ब्लाक कटरा बाजार के मेहरवानाबाद, फूलपुर, देवापसिया,टेपरा, जयरामजोत, शिवगण, हलधरमऊ के झौहना, महादेवा, पिपरी रावत सहित दर्जनों गांवों के किसानों की फसल बाढ़ के पानी में डूबी हुई है। किसानों का आरोप है कि बहराइच व नेपाल का पानी छोड़े जाने से यह समस्या हुई है।
किसान अनिल उपाध्याय, भानू सिंह, सुरेंद्र उपाध्याय सहित अन्य पीड़ितों ने बताया कि इस बार नदी में अधिक पानी छोड़े जाने से फसल डूब गयी है। किसानों ने सरकार से बाढ़ में नष्ट हुई फसल का निरीक्षण करके उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। टेढ़ी नदी का पानी अब गांव के अंदर भी घुस गया है। कुछ स्कूलों में भी पानी भरा हुआ है। आने जाने के रास्ते पर पानी होने से गांव से बाहर निकलने में भी उठानी पड़ रही है।
बहराइच के चित्तौड़ झील से निकलकर अयोध्या के सरयू नदी में मिलने वाली यह नदी टेढ़े मेढे़ रास्ते से हो कर गुजरती है। इसी लिए इसे टेढ़ी नदी कहा जाता है। इस नदी को कुटिला गंगा के नाम से भी जाना जाता है। नदी के किनारे जिले के 6 ब्लाक के सैकड़ों गांव पंचायतें बसी हैं। जिनके जीवकोपार्जन का मुख्य साधन खेती है।