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सर्दी से ठिठुरे लोग, एक की मौत
गाजीपुर
Updated Sun, 11 Dec 2016 11:45 PM IST
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कोहरा
- फोटो : ANI
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कोहरे का प्रभाव तो दो दिनों से काफी कम है, लेकिन गलन के बीच ठंड लोगों को अपनी ताकत का एहसास करा रही है। आलम यह है कि शरीर को पूरी तरह से गर्म कपड़ों से ढंकने के बाद भी ठंड कम नहीं हो रही है। रविवार को भी सर्दी की बेदर्दी से जिंदगी ठिठुरती नजर आई।सुहवल थाने के गौरा गांव निवासी किशोर पासवान (53) की ठंड लगने से शनिवार की देर शाम मौत हो गई। पुलिस को सूचना दिए बगैर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया ।
नवंबर माह से ठंड का प्रभाव शुरू हो गया था, लेकिन दिसंबर माह की शुरुआत के बाद से ठंड सितम ढाने लगी। लगातार पांच दिनों तक जबरदस्त कोहरे का प्रभाव बना रहा। कोहरे की धुंध की वजह से एक तरफ जहां वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई, वहीं ठंड में इजाफा होने से आम जन-जीवन प्रभावित होने लगा। ठंड से बचाव के लिए लोग दिन भर गर्म कपड़ों से ढंके रह रहे हैं। मवेशियों को ठंड से बचाने के लिए उनके पास अलाव जलाने के साथ बोरा आदि गर्म कपड़ों से उन्हें ढंककर रखा जा रहा है। शनिवार की रात करीब साढ़े 10 बजे कोहरा का प्रभाव शुरु हो गया। आलम यह था कि दस कदम आगे की चीज दिखाई नहीं दे रही थी।
मार्गों पर वाहन धीमी चाल से चलते दिखाई दिए, लेकिन सुबह कोहरे का प्रभावी काफी कम रहा। दिन में 12 बजे के बाद सूर्यदेव ने आंखें जरूर खोली, लेकिन उमकी चमक काफी धीमी थी। हल्की धूप के बीच भी लोग कांपते रहे। ठंड से बचाव के लिए बूढ़े और बीमार लोग घरों में रजाई और कंबल के सहारे दुबके रहे।
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एक तरफ जहां लोग घरों में अलाव तापते रहे, वहीं कई दूकानदारों ने भी दूकान के सामने अलाव जला रखा था। आवागमन करने वालों की जैसे ही सड़क किनारे जल रहे अलाव पर नजर पड़ रही थी, उनके पैर उसके पास जाकर थम जा रहे थे। लोग रुककर आग तापने लग रहे थे। शरीर कुछ गर्म होने पर वह आगे बढ़ रहे थे। जैसे-जैसे दिन ढलता गया, वैसे-वैसे ठंड में वृद्धि होती गई और लोग घरों में दुबकते गए। ठंड के प्रभाव की वजह से रात आठ बजे ही नगर में सन्नाटा पसर जा रहा है।
उधर, ठंड लगने से सुहवल थाना क्षेत्र के गौरा गांव निवासी एक वृद्ध की शनिवार की देर शाम मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस को बिना सूचना दिए वृद्ध का अंतिम संस्कार कर दिया। गौरा गांव निवासी किशोर पासवान (53) ने जानवरों को चारा खिलाने के लिए गांव के पास ही स्थित सिवान में उन्हें ले जाकर छोड़ दिया और खुद एक पेड़ के नीचे बैठ गया।
तभी पेट में तेज दर्द के साथ ही उसे कंपकपी शुरू हो गई। तबीयत खराब होने पर वह अपने जानवरों को लेकर घर वापस आ गया। ठंड से उसे कांपता देख परिजन उसे इलाज के लिए चिकित्सक के यहां ले जा रहे थे। रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इससे चीख पुकार मच गई।
नवंबर माह से ठंड का प्रभाव शुरू हो गया था, लेकिन दिसंबर माह की शुरुआत के बाद से ठंड सितम ढाने लगी। लगातार पांच दिनों तक जबरदस्त कोहरे का प्रभाव बना रहा। कोहरे की धुंध की वजह से एक तरफ जहां वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई, वहीं ठंड में इजाफा होने से आम जन-जीवन प्रभावित होने लगा। ठंड से बचाव के लिए लोग दिन भर गर्म कपड़ों से ढंके रह रहे हैं। मवेशियों को ठंड से बचाने के लिए उनके पास अलाव जलाने के साथ बोरा आदि गर्म कपड़ों से उन्हें ढंककर रखा जा रहा है। शनिवार की रात करीब साढ़े 10 बजे कोहरा का प्रभाव शुरु हो गया। आलम यह था कि दस कदम आगे की चीज दिखाई नहीं दे रही थी।
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मार्गों पर वाहन धीमी चाल से चलते दिखाई दिए, लेकिन सुबह कोहरे का प्रभावी काफी कम रहा। दिन में 12 बजे के बाद सूर्यदेव ने आंखें जरूर खोली, लेकिन उमकी चमक काफी धीमी थी। हल्की धूप के बीच भी लोग कांपते रहे। ठंड से बचाव के लिए बूढ़े और बीमार लोग घरों में रजाई और कंबल के सहारे दुबके रहे।
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एक तरफ जहां लोग घरों में अलाव तापते रहे, वहीं कई दूकानदारों ने भी दूकान के सामने अलाव जला रखा था। आवागमन करने वालों की जैसे ही सड़क किनारे जल रहे अलाव पर नजर पड़ रही थी, उनके पैर उसके पास जाकर थम जा रहे थे। लोग रुककर आग तापने लग रहे थे। शरीर कुछ गर्म होने पर वह आगे बढ़ रहे थे। जैसे-जैसे दिन ढलता गया, वैसे-वैसे ठंड में वृद्धि होती गई और लोग घरों में दुबकते गए। ठंड के प्रभाव की वजह से रात आठ बजे ही नगर में सन्नाटा पसर जा रहा है।
उधर, ठंड लगने से सुहवल थाना क्षेत्र के गौरा गांव निवासी एक वृद्ध की शनिवार की देर शाम मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस को बिना सूचना दिए वृद्ध का अंतिम संस्कार कर दिया। गौरा गांव निवासी किशोर पासवान (53) ने जानवरों को चारा खिलाने के लिए गांव के पास ही स्थित सिवान में उन्हें ले जाकर छोड़ दिया और खुद एक पेड़ के नीचे बैठ गया।
तभी पेट में तेज दर्द के साथ ही उसे कंपकपी शुरू हो गई। तबीयत खराब होने पर वह अपने जानवरों को लेकर घर वापस आ गया। ठंड से उसे कांपता देख परिजन उसे इलाज के लिए चिकित्सक के यहां ले जा रहे थे। रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इससे चीख पुकार मच गई।