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किसानों पर भारी पड़ रही मौसम की मार
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Sun, 12 Apr 2015 10:54 PM IST
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मौसम की मार से किसानों का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ जहां मार्च और अप्रैल माह में हुई आंधी और पानी ने किसानों की कमर तोड़ दी, वहीं रविवार को एक बार फिर मौसम की पलटी ने किसानों के माथे पर बल डाल दिया। पूरे दिन आसमान में काली घटाएं छाई रहीं।
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इस बीच रुक-रुककर कई बार बूंदाबांदी भी हुई। मौसम का हाल देख किसानों की चिंता बढ़ गई जिनकी फसल खेतों में खड़ी है, उन्हें इस बात की चिंता सताने लगी कि अगर तेज बारिश हो गई तो फसल चौपट हो जाएगी, वहीं जिन किसानों ने फसलों की कटाई कर खेतों में रखा था, वह फसल को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए। प्राकृतिक आपदा से परेशान किसान माथे पर हाथ रख ऊपर वाले की दुहाई देते रहे।
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कृषि विभाग के मुताबिक इस बार जिले में पौने दो लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई गई है जबकि 25 हजार हेक्टेयर में दलहनी और तिलहनी की खेती हुई है। मार्च माह में मौसम में उतार-चढ़ाव का जो क्रम शुरु हुआ, वह अप्रैल में भी जारी है। 15 और 16 मार्च को हुई हुई आंधी-पानी से दलहनी और तिलहनी फसलों के साथ गेहूं जौ तथा आलू की फसलों को काफी नुकसान हुआ था। खेतों में गेहूं के लोट जाने से भारी मात्रा में फसलों की क्षति हुई थी। अभी किसान इस बर्बादी से उबर भी नहीं पाए थे कि एक बार फिर 30 मार्च को मौसम खराब हो गया। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल हवा के झोंको से गिरकर खराब हो गई। मौसम की मार को देखते हुए किसान सजग हो गए हैं।
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गेहूं की फसल पक चुकी थी, वे आनन-फानन में उसकी कटाई करने में जुट गए। रविवार को एक बार फिर मौसम खराब हो गया। काली घटाओं के साथ कई बार बूंदाबांदी हुई। बदले मौसम से किसानों के माथे पर बल पड़ गया। जिन किसानों की फसल पक गई थी, वे उसकी कटाई करने में जुट गए, वहीं जिन लोगों ने कटाई कर गेहूं का बोझ खेतों में रखा था, उसे सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लग गए।
खलिहानों में जो किसान गेहूं की मड़ाई कर रहे थे, उन्होंने काली घटाओं को देख इस काम की रफ्तार को बढ़ा दिया और आनन-फानन में मड़ाई किए गए गेहूं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जो किसानों गेहूं की कटाई नहीं कर पाए थे, उन्हें इस बात की चिंता सताती रही कि अगर तेज बारिश और आंधी आई तो उनकी फसल मौसम की मार की भेंट चढ़ जाएगी। कुल मिलाकर प्राकृतिक आपदा से किसानों के अरमानों पर बार-बार पानी फिर रहा है। किसानों की महीनों की मेहनत की कमाई मौसम के मार की भेंट चढ़ जा रही है।