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सब्जी की खेती पूरी तरह से बर्बाद
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मुहम्मदाबाद के शेरपुर खुर्द मे बाढ़ मे डूबी लौकी की खेती। संवाद
- फोटो : GHAZIPUR
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बाढ़ का पानी शनिवार से घटना शुरू हो गया है लेकिन एनएच-31 के दक्षिण की सभी फसल विशेषकर सब्जी की खेती पूरी तरह से बर्बाद हो गई है।
बाढ़ का पानी शाहनिंदा, सुरतापुर, बढ़नपुरा आदि गांवों के सामने पुल से होकर करइल क्षेत्र में पहुंच गया है जिससे करइल क्षेत्र की खेती भी पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। शेरपुर, बढ़नपुरा, कुंडेसर सहित कई गांव के लोग बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती करते हैं। बाढ़ के आने से मिर्चा, टमाटर, गोभी की बेहन पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। इसके अलावा लौकी, करेला, परवल और बैंगन की फसल जो अब निकलना शुरू हुई थी वह बाढ़ में डूब गई जिससे सब्जी की खेती करने वाले किसानों को बड़ी आर्थिक क्षति हुई है। परंपरागत ढंग से बांड़ के इलाके में होने वाली फसल ज्वार, बाजरा और अरहर की खेती को भी पूरी तरह से नुकसान पहुंचा है।
करइल में पानी पहुंच जाने से धान और सब्जी की खेती को नुकसान पहुंचा है। सब्जी की खेती करने वाले महेश चौधरी, विरेंद्र यादव, सतेंद्र राय, रमेश कुशवाहा, रामजी आदि किसानों ने बताया कि बाढ़ से सबसे अधिक नुकसान बटाई पर खेत लेकर सब्जी की खेती करने वाले किसानों को हुआ है। उनकी फसल नष्ट हो गयी, उसके बाद भी खेत मालिकों को पेशगी का पैसा तो देना ही है। सरकार की तरफ से मिलने वाला सरकारी अनुदान भी जिसके पास खेत रहता है उसी को मिलता है। बाढ़ से इस वर्ष 2019 से भी अधिक नुकसान पहुंचा है।
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बाढ़ का पानी शाहनिंदा, सुरतापुर, बढ़नपुरा आदि गांवों के सामने पुल से होकर करइल क्षेत्र में पहुंच गया है जिससे करइल क्षेत्र की खेती भी पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। शेरपुर, बढ़नपुरा, कुंडेसर सहित कई गांव के लोग बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती करते हैं। बाढ़ के आने से मिर्चा, टमाटर, गोभी की बेहन पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। इसके अलावा लौकी, करेला, परवल और बैंगन की फसल जो अब निकलना शुरू हुई थी वह बाढ़ में डूब गई जिससे सब्जी की खेती करने वाले किसानों को बड़ी आर्थिक क्षति हुई है। परंपरागत ढंग से बांड़ के इलाके में होने वाली फसल ज्वार, बाजरा और अरहर की खेती को भी पूरी तरह से नुकसान पहुंचा है।
करइल में पानी पहुंच जाने से धान और सब्जी की खेती को नुकसान पहुंचा है। सब्जी की खेती करने वाले महेश चौधरी, विरेंद्र यादव, सतेंद्र राय, रमेश कुशवाहा, रामजी आदि किसानों ने बताया कि बाढ़ से सबसे अधिक नुकसान बटाई पर खेत लेकर सब्जी की खेती करने वाले किसानों को हुआ है। उनकी फसल नष्ट हो गयी, उसके बाद भी खेत मालिकों को पेशगी का पैसा तो देना ही है। सरकार की तरफ से मिलने वाला सरकारी अनुदान भी जिसके पास खेत रहता है उसी को मिलता है। बाढ़ से इस वर्ष 2019 से भी अधिक नुकसान पहुंचा है।
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