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अधूरे भवन, न रंगाई-पुताई ...ये कैसे शौचालय हैं भाई

Tue, 05 Jul 2022 11:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jul 2022 11:33 PM IST
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Unfinished buildings, no dyeing-painting ... how are these toilets
अब मात्र 26 दिन शेष हैं, इतने दिनों में 36 सामुदायिक शौचालयों के भवन का निर्माण कार्य कैसे पूरा होगा ये तो सरकारी अधिकारी ही बता पाएंगे लेकिन फिलहाल जिले में तो ऐसा ही है। जबकि 1122 शौचालयों को समूह की महिलाओं द्वारा संचालित करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन यहां भी हकीकत कुछ और ही है। कहीं सिर्फ ढांचा तैयार है तो कही आगे से रंगाई- पोताई के साथ स्लोगन तो लिख दिया गया है लेकिन अंदर कोई सुविधा नहीं है। वहां पहुंचने के लिए रास्ते तो दूर जगह- जगह जंगली घास उगे हुए हैं।
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स्वच्छता का स्लोगन देने के साथ-साथ जनपद को खुले में शौच मुक्त करने के लिए व्यापक रूप से अभियान चलाया गया। लाभार्थियों का चयन करने के साथ शौचालयों का निर्माण कराया गया। यहीं नहीं जिले के 1238 ग्राम पंचायतों में भूमि चिह्नित कर सामुदायिक शौचालय निर्माण कार्य भी शुरू कराया गया, जिससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग लाभांवित हो सके। इसके लिए शासन की ओर से वित्तीय वर्ष 2020-21 में जनपद के 1238 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए लक्ष्य निर्धारित कर स्वीकृति प्रदान करने के साथ धनराशि मुहैया कराई गई थी। अब तक पूर्ण कर संचालन शुरू किया जाना था, लेकिन अधर में लटका रहा।
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दो वर्ष में विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 1200 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय पूर्ण किए गए हैं। जबकि 36 पर कार्य चलने का दावा किया जा रहा है, जिसे इन 26 दिनों के शेष अवधि में पूर्ण करने का दावा किया जा रहा है। जबकि जमीनी हकीकत कुछ अलग ही है। मरदह ब्लाक नोनरा गांव में निर्मित सामुदायिक शौचालय आगे से पेंट और स्लोगन लिखकर तैयार है, लेकिन वहां तक जाने का रास्ता नहीं और जंगली घासों में घिरा पड़ा है। यही नहीं ब्लाक के पारा गांव में शौचालय का सिर्फ ढांचा ही बनकर तैयार हो सका। वहीं रेवतीपुर ब्लाक के 46 ग्राम पंचायतों में 38 पूर्ण हो चुके हैं और आठ अभी भी अपूर्ण हैं। वहीं इन पूर्ण हो चुके 38 में 21 ही हैंडओवर हो चुके हैं। कमोवेश यही हाल अन्य ग्राम पंचायतों का भी है, कहीं पूर्ण है तो हैंडओवर नहीं हुआ और कहीं अब तक पूर्ण ही नहीं हो सका है। इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी कुमार अमरेंद्र ने बताया कि जुलाई तक पूर्ण करने के लिए निर्देश दिया गया है। पूर्ण हो चुके जो शौचालय संचालित नहीं हो सके हैं, उन्हें संचालित कराने के लिए महिला समूहों को सुपुर्द किया जा रहा है।
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मलिकपुरा और मिठ्ठनपारा में नहीं शुरू हुआ काम
गाजीपुर। मुहम्मदाबाद के मलिकपुरा और सदर ब्लाक के मिठ्ठनपारा गांव में आज तक निर्माण कार्य ही नहीं शुरू हो चुका। विवाद के कारण इन दोनों ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में इन ग्राम पंचायत में रहने वाले ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा। हालांकि विभाग के अधिकारी भी यहां मामला सुलझाकर जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने का दंभ भरा जा रहा है।
अलग-अलग धनराशि में हो रहा निर्माण
गाजीपुर। जिले में बन रहे सामुदायिक शौचालय का निर्माण अलग-अलग धनराशि में हो रहा है। दो शीटर के लिए दो लाख दस हजार, चार शीटर के लिए पांच लाख 20 हजार और छह शीटर के लिए सात लाख 21 हजार खर्च किए जा रहे हैं। ऐसे में आबादी के मुताबिक सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है।

छह हजार वेतन तो तीन हजार मेंटनेंस पर खर्च
गाजीपुर। जिले के प्रत्येक ग्राम पंचायतों में स्थापित हो रहे सामुदायिक शौचालयों को संचालित कराने के लिए ग्राम पंचायत में गठित महिला समूह को सुपुर्द किया जाएगा। इसके लिए तैनात कर्मी को छह हजार वेतन के रूप में दिए जाएंगे। वहीं तीन हजार रुपये मेंटनेंस पर खर्च होगा। मेंटनेंस खर्च में साबुन, तौलिया, साफ-सफाई आदि शामिल है।
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