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Ghazipur News: दो करोड़ रुपये से बनेंगे दो एफएसटीपी, जमीन की तलाश शुरू
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गाजीपुर। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जनपद में दो करोड़ रुपये से दो एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) का निर्माण होगा। इसके लिए पंचायती राज विभाग जमीन की तलाश में जुटा है। एफएसटीपी का मूल उद्देश्य शहरों की तरह गांवों में मल-जल का निस्तारण करना है। एफएसटीपी का प्लांट मल को खाद में परिवर्तित कर देगा, जिससे खेतों की मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी। इसकी क्षमता 6 से 10 केएलडी होगी। गांवों में गंदगी प्रबंधन में यह कारगर साबित होगा। लेकिन, एफएसटीपी निर्माण के लिए एक शर्त यह भी है कि इसका निर्माण उसी ग्राम पंचायत में होगा, जहां पर 3 हजार से अधिक आबादी रहेगी, वहां एक एकड़ के दायरे में भूमि को चिह्नित किया जाएगा।
ये है एफएसटीपी - एफएसटीपी मल, कीचड़ और सेप्टेज को सुरक्षित रूप से उपचारित करने के लिए एक संयंत्र है। इस प्रक्रिया में मल से ठोस और तरल पदार्थों को अलग किया जाता है। ठोस पदार्थ को खाद के रूप में उपयोग किया जाता है और तरल पानी को सिंचाई के लिए शुद्ध किया जाता है। इसके स्क्रीनिंग चेंबर में मल को डाला जाता है, जहां ठोस कचरा अलग हो जाता है। इसके बाद मल को प्लांटेड ड्राइंग बेड में भेजा जाता है, जहां पत्थर और बजरी की सतहें ठोस और तरल को अलग करती हैं। तरल आगे बढ़ता है और ठोस मल सूखने के बाद खाद बन जाता है। तरल पदार्थ को एनारोबिक बफल्ड रिएक्टर (एबीआर) में भेजा जाता है, जहां प्रदूषकों को कम किया जाता है। इसके बाद तरल पानी को प्लांटेड ग्रेवल फिल्टर से गुजारा जाता है, जहां जलीय पौधों की मदद से पानी और शुद्ध होता है। अंत में पानी को पॉलिशिंग पॉन्ड में ले जाया जाता है, जहां सूर्य की रोशनी और हवा के संपर्क से इसका शुद्धिकरण होता है।
आबादी से 500 मीटर की दूरी पर होगा निर्माण-एफएसटीपी का निर्माण आबादी से 250 से 500 मीटर की दूरी पर होगा। इसके संचालन के लिए 30 किलोवाट बिजली व 5000 लीटर पानी की आवश्यकता होगी। प्लांट की स्थापना ऐसी जगह होगी, जहां पक्की सड़क की सुविधा हो ताकि घरों के सेप्टिक टैंकों से मलवाहक टैंकरों के माध्यम से स्लज आसानी से प्लांट तक पहुंचाया जा सके।
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जनपद के दो ग्राम पंचायतों में दो करोड़ रुपये से एक-एक एफएसटीपी का निर्माण होगा। इसके लिए जमीन की तलाश शुरू कर दी गई है। जमीन मिलते ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। - रमेशचंद उपाध्याय, प्रभारी डीपीआरओ, गाजीपुर।
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ये है एफएसटीपी - एफएसटीपी मल, कीचड़ और सेप्टेज को सुरक्षित रूप से उपचारित करने के लिए एक संयंत्र है। इस प्रक्रिया में मल से ठोस और तरल पदार्थों को अलग किया जाता है। ठोस पदार्थ को खाद के रूप में उपयोग किया जाता है और तरल पानी को सिंचाई के लिए शुद्ध किया जाता है। इसके स्क्रीनिंग चेंबर में मल को डाला जाता है, जहां ठोस कचरा अलग हो जाता है। इसके बाद मल को प्लांटेड ड्राइंग बेड में भेजा जाता है, जहां पत्थर और बजरी की सतहें ठोस और तरल को अलग करती हैं। तरल आगे बढ़ता है और ठोस मल सूखने के बाद खाद बन जाता है। तरल पदार्थ को एनारोबिक बफल्ड रिएक्टर (एबीआर) में भेजा जाता है, जहां प्रदूषकों को कम किया जाता है। इसके बाद तरल पानी को प्लांटेड ग्रेवल फिल्टर से गुजारा जाता है, जहां जलीय पौधों की मदद से पानी और शुद्ध होता है। अंत में पानी को पॉलिशिंग पॉन्ड में ले जाया जाता है, जहां सूर्य की रोशनी और हवा के संपर्क से इसका शुद्धिकरण होता है।
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आबादी से 500 मीटर की दूरी पर होगा निर्माण-एफएसटीपी का निर्माण आबादी से 250 से 500 मीटर की दूरी पर होगा। इसके संचालन के लिए 30 किलोवाट बिजली व 5000 लीटर पानी की आवश्यकता होगी। प्लांट की स्थापना ऐसी जगह होगी, जहां पक्की सड़क की सुविधा हो ताकि घरों के सेप्टिक टैंकों से मलवाहक टैंकरों के माध्यम से स्लज आसानी से प्लांट तक पहुंचाया जा सके।
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जनपद के दो ग्राम पंचायतों में दो करोड़ रुपये से एक-एक एफएसटीपी का निर्माण होगा। इसके लिए जमीन की तलाश शुरू कर दी गई है। जमीन मिलते ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। - रमेशचंद उपाध्याय, प्रभारी डीपीआरओ, गाजीपुर।