पौने पांच अरब से चमकेगी लहुरीकाशी
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आने वाले समय में जिले के प्रभारी मंत्री रामगोविंद चौधरी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों की मौजूदगी में बजट का अनुमोदन किया जाएगा। जिलाधिकारी नरेंद्र सिंह पटेल की अध्यक्षता में आयोजित की गई जिला योजना वर्ष 2015-16 के लिए पहले बजट का निर्धारण किया गया।
इसके बाद उक्त बजट में से विभिन्न विभागों को धनराशि आवंटित करने का मसौदा तैयार किया गया। इसमें सड़क, बिजली, पानी, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, दुग्ध विकास, सहकारिता, गन्ना विकास, उद्यान विभाग, कृषि विभाग, पंचायती राज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, प्रादेशिक विकास दल, ग्रामीण पेयजल ग्राम्य विकास, ग्रामीण स्वच्छता, ग्रामीण विकास, नगर विकास, अनुसूचित जाति कल्याण, अल्प संख्यक कल्याण, अनुसूचित जाति कल्याण, पुष्टाहार, विकलांग कल्याण, महिला कल्याण पर अधिक से अधिक धनराशि खर्च कर विकास कार्यों को गति देने का खाका खींचा गया है।
जिलाधिकारी ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि समय रहते सभी विभागीय अधिकारी अपने-अपने विभागों द्वारा कराए जाने वाले विकास कार्यों की कार्ययोजना तैयार कर लें। इसके लिए जनप्रतिनिधियों से भी प्रस्ताव मंगाए जाएं। ताकि जिले के प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली जिला योजना की बैठक में बजट का अनुमोदन किया जा सके।
उन्हाेंने यह भी बताया कि प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में विभागों को आवंटित की जाने वाली धनराशि घट-बढ़ भी सकती है। बैठक में अपर जिलाधिकारी मुरलीधर मिश्र, डीसी मनरेगा अनय मिश्र, संख्याधिकारी एजाज अहमद के साथ सभी कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारी मौजूद थे।
इनसेट
महज बीस फीसदी ही मिला धन
गाजीपुर। जिले में विकास
कार्यों को अमलीजामा पहनाने के लिए या तो सरकारी मशीनरी धन मुहैया नहीं
करातीं या फिर विभागीय अधिकारी धन अवमुक्त कराने में दिलचस्पी नहीं लेते,
जिसकी वजह से जिले में विकास कार्य पूरे नहीं हो पाते।
इसका खुलासा शनिवार
को राइफल क्लब में आयोजित जिला योजना 2015-16 की बैठक में हुआ। चालू
वित्तीय वर्ष 2014-15 में जिला योजना के तहत 4 अरब 70 करोड़ 50 लाख रुपये
का बजट निर्धारित और स्वीकृत किया गया था। वित्तीय वर्ष के अब नौ माह बीत
चुके हैं, पर स्वीकृत बजट में से जिले को अब तक महज 20 फीसदी ही धनराशि
अवमुक्त की जा सकी है।
इसके चलते जहां जिले में विकास कार्यों की गति शून्य
हो गई। वहीं कई बड़ी समस्याओं का समाधान ही नहीं हो सका। जिले में जर्जर
सड़कों का निर्माण, हैंडपंपों की बोरिंग का काम शुरू ही नहीं हो सका। अब
चालू वित्तीय वर्ष में बचे सिर्फ ढाई माह में शेष धनराशि को अवमुक्त कराना
आसान नहीं है।
ऐसे में विकास के तमाम कार्य पूरे नहीं हो पाएंगे। हालांकि
जिलाधिकारी नरेंद्र सिंह पटेल ने विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश देते
हुए विभागाध्यक्षों से संपर्क कर शेष बचे ढाई माह के अंदर शेष धनराशि
अवमुक्त कराते हुए प्रस्तावित कार्यों को पूरा कराने को कहा है।