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बीस बीघे खेती योग्य भूमि गंगा में समाहित

Sat, 08 Jul 2017 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो /गाजीपुर
अमर उजाला ब्यूरो /गाजीपुर Updated Sat, 08 Jul 2017 11:13 PM IST
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Twenty-cultivated land is cultivated in the Ganges
करंडा के पुरैना में हो रहा कटान।
गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही शुक्रवार की रात से कटान तेज हो गई। रातभर रह-रहकर हो रहे कटान से 20 बीघे खेती योग्य भूमि गंगा में समाहित हो गई। कटान की भयावहता को देखते हुए ग्रामीण पूरी रात सहमे रहे। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कटान की रफ्तार यही रही तो दो से तीन दिनों के अंदर गंगा आबादी तक पहुंच जाएंगी।
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पहाड़ी इलाकों में हुई भारी वर्षा के चलते गंगा के जलस्तर में दो दिनों से लगातार बढ़ोतरी हो रही है। गंगा के जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी को देख तटवर्ती इलाकों के लोग काफी सहमे हुए हैं। क्षेत्र के बेयपुर, सोकनी, बड़हरिया और रफीपुर गांव के सामने रातभर कटान होता रहा। गंगा में समाहित हो रही खेती योग्य भूमि की आवाज सुनकर ग्रामीण सहमे रहे। दशा यह रहा कि कटान की इस भयावकता को देखने के लिए ग्रामीण सुबह भी नहीं जा रहे थे।
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ग्रामीणों ने बताया कि अगर दो से तीन दिनों तक कटान की रफ्तार यही रही तो बेयपुर और बड़हरिया गांव पर खतरा मंडराने लगेगा। यहीं नहीं लोगों के घर भी गंगा में समाहित हो जाएंगे। गांव के श्रीनिवास यादव, रामअवतार यादव, पिंटू यादव, रामजी यादव, नगीना यादव और अंबिका यादव ने बताया कि अभी एक से डेढ़ माह बचा हुआ है।
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अभी से इतनी भयावकता के साथ हो रही कटान के चलते गांवों पर खतरा मंडराने का साफ संकेत दे रही है। बताया कि रात भर चले कटान के चलते खेती योग्य भूमि के साथ पशुओं का चारा और हरी सब्जी भी गंगा में समाहित हो गई। कटान के इस रौद्ररूप को देखकर ग्रामीणों में भय बना हुआ है।      
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