गाजीपुर। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मियों ने बृहस्पतिवार को अपनी मांगों को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस तीन दिवसीय धरना प्रदर्शन में मुख्यालय सहित जनपद के सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मी शामिल हैं।
जिलाध्यक्ष राघवेंद्र शेखर सिंह ने कहा कि संविदा कर्मी 15 से 18 वर्षों से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी इन कर्मचारियों ने बिना अपने जीवन की चिंता किए स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाईं। वर्तमान में भी वे टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और टीबी उन्मूलन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में अग्रणी भूमिका में हैं। हमारी दो मांगें जिसमें नियमितीकरण और समान कार्य समान वेतन के साथ वर्तमान वेतन में वृद्धि शामिल है। इसको से लेकर संगठन की तरफ से पत्रक के माध्यम से मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी को अवगत करा दिया गया है। संविदा कर्मियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा, महंगाई भत्ता और ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाए। रिक्त पदों पर जनपद स्थानांतरण की सुविधा दी जाए। इसके अतिरिक्त, सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर परिवार को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की गई है। आउटसोर्स कर्मचारियों का जिला स्वास्थ्य समिति में समायोजन और नियमित भर्तियों में कम से कम 25 फीसदी सीट का कोटा निर्धारित करने की भी मांग है। जिला समन्वयक टीबी मिथिलेश सिंह ने बताया कि 5, 6 और 7 अक्तूबर को काला फीता बांधकर सांकेतिक विरोध किया गया था। अब 8, 9 और 10 अक्तूबर तक जनपद मुख्यालय पर शांतिपूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा। जिला उपाध्यक्ष शीतल प्रसाद ने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो 12 अक्तूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।