गाजीपुर। लखनऊ में पिछले दिनों एक कोचिंग सेंटर में आग लगने की घटना में कई छात्र-छात्राओं की जान चली गई थी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के नाम पर छात्रों की जान जोखिम में डालकर चलाए जा रहे इन कोचिंग संस्थानों को लेकर प्रशासन का रवैया सख्त है। सोमवार को उप जिलाधिकारी के नेतृत्व में चलाए गए अभियान केे दौरान शहर में स्थित तीन कोचिंग संस्थान-लाइब्रेरी को बंद कराया गया।
कोचिंग संस्थानों में आगजनी और अन्य हादसों की घटनाएं देशभर में सामने आने के बाद भी अधिकांश संस्थान सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे हैं। चिंता की बात यह है कि ज्यादातर के पास न तो अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) है और न ही आपात स्थिति से निपटने की कोई ठोस व्यवस्था। यही नहीं कई कोचिंग केंद्रों में अग्निशमन यंत्र तक नहीं है, जबकि कुछ जगह लगे यंत्रों की वैधता अवधि भी समाप्त हो चुकी है। शहर की संकरी गलियों और भीड़ वाले इलाकों में भी ये संचालित हो रहे हैं, जहां प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं पहुंचते हैं। अधिकांश भवनों में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता है। आपातकालीन निकासी, प्राथमिक उपचार कक्ष और सुरक्षा संकेतकों जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। उपजिलाधिकारी पुष्पेंद्र पटेल ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर तीन कोचिंग सेंटर-लाइब्रेरी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे बंद कराया गया। शहर के रौजा स्थित हिंद लाइब्रेरी में आने-जाने का एक ही रास्ता था। इसके अलावा बंधवा स्थित एकलव्य सेंटर और शास्त्रीनगर स्थित गुरुकुल लाइब्रेरी को सीएफओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर बंद कराया गया।