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Ghazipur News: तीस आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलेगा अपना भवन
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एक आंगनबाड़ी केंद्र को बनाने में 7.42 लाख की आएगी लागत
जनपद में 4127 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। जनपद के 30 आंगनबाड़ी केंद्रों को जल्द ही अपना भवन मिलेगा। बाल विकास पुष्टाहार विभाग ने इसके लिए संबंधित गांवों में स्थान भी चिह्नित कर लिया है। विभाग के लोगों के मुताबिक एक आंगनबाड़ी केंद्र बनाने की लागत 7 लाख 42 हजार रुपये निर्धारित की गई है। यही नहीं, भवन का निर्माण दिसंबर तक पूरा कराने की उम्मीद है।
जनपद में 4127 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से 532 के पास अपना भवन है, जबकि 613 किराये के भवन तथा 318 पंचायत व सामुदायिक भवन व 2604 परिषदीय विद्यालय में संचालित हैं। उनमें से ही 30 नए भवन निर्माण कराने के लिए प्रस्ताव मिल गया है। इसके लिए शासन से मंजूरी मिल गयी है।
शासन की ओर से बजट आवंटित होते ही 7.42 लाख रुपये की लागत से बनने वाले प्रत्येक केंद्र के निर्माण की जिम्मेदारी आरइएस को मिलेगी। इसमें बाल विकास विभाग द्वारा दो लाख रुपये जबकि शेष राशि मनरेगा के तहत दी गई। आंगनबाड़ी केंद्रों को अपने भवन मिलने के बाद कर्मियों को भी कार्य करने में ही राहत मिलेगी।
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इसके साथ ही किराये के भवन से भी छुटकारा मिलेगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी दिलीप कुमार पाण्डेय ने बताया कि किराये के मकानों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में 30 को अपना भवन मिल जाएगी। इसके लिए शासन से बजट की मांग की गयी है। बजट आवंटित होते ही कार्य कराए जाएंगे।
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जनपद में 4127 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। जनपद के 30 आंगनबाड़ी केंद्रों को जल्द ही अपना भवन मिलेगा। बाल विकास पुष्टाहार विभाग ने इसके लिए संबंधित गांवों में स्थान भी चिह्नित कर लिया है। विभाग के लोगों के मुताबिक एक आंगनबाड़ी केंद्र बनाने की लागत 7 लाख 42 हजार रुपये निर्धारित की गई है। यही नहीं, भवन का निर्माण दिसंबर तक पूरा कराने की उम्मीद है।
जनपद में 4127 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से 532 के पास अपना भवन है, जबकि 613 किराये के भवन तथा 318 पंचायत व सामुदायिक भवन व 2604 परिषदीय विद्यालय में संचालित हैं। उनमें से ही 30 नए भवन निर्माण कराने के लिए प्रस्ताव मिल गया है। इसके लिए शासन से मंजूरी मिल गयी है।
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शासन की ओर से बजट आवंटित होते ही 7.42 लाख रुपये की लागत से बनने वाले प्रत्येक केंद्र के निर्माण की जिम्मेदारी आरइएस को मिलेगी। इसमें बाल विकास विभाग द्वारा दो लाख रुपये जबकि शेष राशि मनरेगा के तहत दी गई। आंगनबाड़ी केंद्रों को अपने भवन मिलने के बाद कर्मियों को भी कार्य करने में ही राहत मिलेगी।
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इसके साथ ही किराये के भवन से भी छुटकारा मिलेगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी दिलीप कुमार पाण्डेय ने बताया कि किराये के मकानों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में 30 को अपना भवन मिल जाएगी। इसके लिए शासन से बजट की मांग की गयी है। बजट आवंटित होते ही कार्य कराए जाएंगे।