मरदह। गरीबों को न्याय दिलाने का सरकार भले ही दावा करती हो लेकिन अधिकारी उसके इस दावे की हवा निकाल रहे हैं। कुछ इसी तरह का एक मामला थाना क्षेत्र के गांई मठिया निवासी एक महिला का है। सब कुछ रहते हुए भी पट्टिदारों ने उसकी भूमि और मकान पर कब्जा कर बाहर निकाल दिया। आज पीडि़ता अपने पति और दो बच्चों के साथ 18 दिनों से खुले आसमान के नीचे सड़क के किनारे जीवन-यापन कर रही है। लेकिन उसका दुख दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। गांव निवासी रिंकू देवी ने आरोप लगाया कि पट्टीदारों से जमीन संबंधी बंटवारा को लेकर काफी दिनों से विवाद चल रहा है। सभी संयुक्त रूप से वर्षो मकान में रह रहे थे। नौ सितंबर की दोपहर एक बजे पट्टीदार के परिवार के छह लोगों ने पीडि़ता को गाली देते हुए मारपीटा और कमरे का ताला तोड़ दिया। घर में रखे सभी सामान को बाहर सड़क पर फेंक दिया और बक्से तथा अटैची तोड़ कर कपड़े आदि बाहर फेंक दिए। आरोप है कि बक्सों में रखे बीस हजार नगदी सहित सोने के आभूषण भी ले लिए। जब विरोध किया तो जान से मारने की धमकी दी जाने लगी। पीडि़ता ने मटेहू पुलिस चौकी पर तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन उसकी पुलिस ने उसकी बात नहीं सुनी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दिल्ली, मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव गृह, अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग आयोग, अध्यक्ष महिला आयोग उत्तर प्रदेश, डीआईजी वाराणसी मंडल, पुलिस अधीक्षक को भी रजिस्टर्ड डाक से प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन महिला को न्याय नहीं मिला। रिंकू देवी ने बताया कि हम अपने ही घर से बेघर हो गए। हर जगह अर्जी दी लेकिन किसी ने मेरी फरियाद नहीं सुनी।