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Ghazipur News: गाजीपुर में काले हिरन और चीतल का कुनबा बढ़ा

Tue, 10 Sep 2024 02:56 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 Sep 2024 02:56 AM IST
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The population of blackbuck and chital increased in Ghazipur
गाजीपुर/बारा। जनपद में काले हिरण और चीतल का कुनबा बढ़ा है। आठ काला हिरण (एंटीलोप) और 20 से अधिक चीतल (स्पाटेड डियर) जमानिया वन रेंज में विचरण कर रहे हैं। इन्हें रेवतीपुर और कर्मनाशा नदी का तटवर्ती इलाका खूब रास आ रहा है। यहां सुरक्षा व भोजन-पानी की प्रचुरता की वजह से इनकी संख्या बढ़ रही है। 2021 में चार की संख्या काले मृग देखे गए थे। यहां वन्य जीव संरक्षण के लिए कोई प्रभावशाली योजना लागू नहीं है। हालांकि इनपर वन विभाग नजर रख रहा है कि ताकि कोई इन्हें न मारे और न पकड़े।
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कई एकड़ में फैला कर्मनाशा का तटवर्ती इलाका हरी घासों से हमेशा भरा रहता है। ये इलाका जमानिया वन रेंज क्षेत्र में आता है। हरे-भरे इन इलाकों में हिरण विचरण करते हैं। हिरणों का झुंड इलाके में जब कुलांचे भरता है, तो इन्हें देखने वाले लोगों का मन प्रसन्न हो जाता है। काले मृग को कृष्ण मृग भी कहते हैं। संस्कृत साहित्य में इसका उल्लेख है। ये काफी सुंदर लगते हैं। मादा काला मृग व चीतल गर्भधारण के बाद साढ़े पांच माह में बच्चों को जन्म देती हैं। यही कारण है कि इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनके संरक्षण की जरूरत है। तटवर्ती इलाके में इनकी उछल कूद देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग कर्मनाशा नदी के तटवर्ती इलाके में पहुंच रहे हैं। उप क्षेत्रीय वनाधिकारी, जमानिया अशोक सिंह यादव के मुताबिक रेवतीपुर और कर्मनाशा के तटवर्ती इलाकों में 8 काले मृग व 20 से अधिक चीतल की संख्या है। इनकी बढ़ोतरी सुखद है। इसका प्रमुख कारण है, इन्हें पर्याप्त मात्रा में भोजन-पानी मिलना। मेदनीपुर से लेकर चंदौली जनपद की सीमा तक और चौसा (बिहार) तक जमानिया वन रेंज है। यह वन बिहार चंदौली के बार्डर से घिरा है। यह वन रेंज लगभग 50 किमी के क्षेत्र में फैला है। इस वन रेंज में कभी-कभी अजगर भी देखने को मिलते हैं। नीलकंठ पक्षी भी बहुतायत संख्या में देखे जाते हैं। यहां 2021 में चार की संख्या काले मृग दिखे थे।
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शेड्यूल - एक श्रेणी के हैं जानवर
काला मृग व चीतल केंद्र सरकार के वन्यजीव अधिनियम 1971 के तहत शेड्यूल - एक श्रेणी के वन्य जीव हैं। ये खुले मैदानों में रहते हैं। जिसके कारण इनका शिकार हो जाता है। सर्वाधिक चीते ही इनका शिकार करते हैं, इसलिए केंद्र सरकार ने इन्हें संरक्षित करने के लिए शेड्यूल - एक श्रेणी में रखा है।
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रेवतीपुर और कर्मनाशा के तटवर्ती इलाकों में 8 काले मृग व 20 से अधिक चीतल की संख्या है। इनकी बढ़ोतरी सुखद है। इसका प्रमुख कारण है, इन्हें पर्याप्त मात्रा में भोजन-पानी मिलना। सामाजिक वानिकी में हिरणों के संरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। - अशोक सिंह यादव, उप क्षेत्रीय वनाधिकारी, जमानिया
जनपद में आठ काले मृग और बड़ी संख्या में चीतल होने की जानकारी हैं। ये खुशी की बात है। इनकी निगरानी के लिए पेट्रोलिंग की जाती है। साथ ही इनकी गणना कराने तैयारी की जा रही है।-विवेक यादव, डीएफओ
2018 में आया था टाइगर
नदी के तटवर्ती इलाके में वर्ष 2018 में टाइगर भी देखा गया था। डीएफओ के मुताबिक टाइगर बिहार की तरफ से आया था, जो उसी दिशा में लौट भी गया था।
ऐसे होते हैं काले हिरण :
काला हिरण ऊंचाई से कूदने में अद्भुत होते हैं। वे दो मीटर से अधिक की ऊंचाई तक छलांग लगा सकते हैं! काला हिरण के छोटे दांत, बड़ी भूख: काला हिरण के ऊपरी जबड़े में सामने के दांत नहीं होते हैं। वे अपने निचले दांतों और मसूड़ों का उपयोग घास और पत्तियों को काटने के लिए करते हैं।

इन इलाकों में पाए जाते हैं काले मृग
डीएफओ के मुताबिक काले मृग कैमूर, मिर्जापुर, चंद्रप्रभा चंदौली, सोनभद्र, प्रयागराज जनपद के मेंजा तहसील के चांद खमरिया और गाजीपुर में पाए जाते हैं। ये स्वतंत्र जीव हैं और दुर्लभ प्रजाति के हैं। जनपद में 3-4 काले मृग मादा है, बाकी नर प्रजाति के हैं।
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