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Ghazipur News: बेटी से 20 वर्ष बड़े शिक्षक से दो साल छोटी सास ने कराई थी शादी

Sun, 18 May 2025 11:53 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 18 May 2025 11:53 PM IST
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The mother-in-law got her daughter married to a teacher who was 20 years older than her and was two years younger than her
गाजीपुर। सीतापुर जिले के सहायक अध्यापक व एक पैर से दिव्यांग कोविद कुमार की आत्महत्या मामले में पुलिस ने उसकी पत्नी और सास को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में पता चला है कि मृतक की उम्र से दो साल छोटी तो उसकी सास ही है, जिसने गरीबी और लालच में आकर अपनी 20 साल की बेटी की शादी लगभग दोगुने उम्र के दूल्हे से कराई थी।
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सीतापुर जिले के सकरन थानाक्षेत्र के डीहपुरवा गांव निवासी कोविद कुमार (42) प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। एक पैर से दिव्यांग होने के कारण उनकी शादी नहीं हो पा रही थी, जिसकी चिंता उसके पिता चंद्रिका प्रसाद को भी थी। इधर, 500 किमी दूर गाजीपुर में शहर कोतवाली क्षेत्र के आदर्श बाजार स्थित कांशीराम गरीब शहरी आवास कॉलोनी निवासी राजमती रानी (40) भी अपनी गरीबी को लेकर चिंतित थी। उसकी चार बेटियां और तीन बेटे हैं। इसी बीच जान-पहचान के एक व्यक्ति की मदद से शादी का प्रस्ताव आया तो गरीबी और लालच में आकर वह अपनी बेटी लक्ष्मी (20) का हाथ देने को तैयार हो गई। दोनों परिवारों की रजामंदी से शादी 18 जनवरी 2023 को कराई गई। पति-पत्नी की उम्र के बीच 20 साल का अंतर होने के कारण कुछ ही दिन बाद बात बिगड़ने लगी और वह नाराज होकर मायके चली आती। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक कोविद के रुपये पर उसकी पत्नी और ससुराल वालों की नजर लग गई थी। वह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उस पर दबाव बनाने लगे। इसके लिए लक्ष्मी भी पति के साथ अलग रहना चाहती थी, जबकि कोविद इसके लिए तैयार नहीं था। वह परिवार और पत्नी दोनों को साथ रखना चाहता था। परिवार भी कोविद के साथ था। इसी को लेकर दोनों के वैवाहिक जीवन में खटास आ गई। नतीजतन मामला पंचायत के बाद थाना और कोर्ट तक पहुंच गया। कोविद ने सीतापुर में एक तो लक्ष्मी ने गाजीपुर में दो मुकदमे दर्ज कराए। कोेविद के परिवार ने कुछ मुद्दों पर समझौतावादी रुख भी अपनाया लेकिन लक्ष्मी अपनी मां और मायके पक्ष की बातों में आकर अड़ी रही। 16 मई को वह कोर्ट में जमानत लेने आया लेकिन ऐन वक्त पर बात बिगड़ गई। हालांकि कोविद जमानतदार खोजने जंगीपुर भी गया था, जहां उसकी कोशिश नाकाम हो गई। वह नौकरी, परिवार और ससुराल के बीच इस कदर फंस गया कि उसे कुछ समझ में नहीं आया और आखिर में जेल जाने के भय और पत्नी व सास की प्रताड़ना से तंग आकर रास्ते में ही उसने आत्महत्या कर ली।
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