{"_id":"686c068a677a9166390eef1a","slug":"the-land-marked-for-the-automatic-driving-testing-station-was-found-to-be-bad-in-the-survey-ghazipur-news-c-295-1-mau1002-130280-2025-07-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग स्टेशन के लिए चिह्नित जमीन सर्वे में खराब मिली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग स्टेशन के लिए चिह्नित जमीन सर्वे में खराब मिली
विज्ञापन
मऊ। कोपागंज ब्लॉक के इंदारा गांव में ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग स्टेशन के लिए चिह्नित जमीन एआरटीओ के सर्वे में फेल हो गई है। मुख्यालय से अधिक दूरी और मुख्य मार्ग से अंदर संकरा रास्ता होना इसका कारण है। दो सितंबर 2022 को शासन की ओर से पत्र भेजकर निर्माण कराने का निर्देश मिला था।
शासन के अनुसार टेस्टिंग स्टेशन का निर्माण पीपीपी मॉडल पर कराना है। ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग स्टेशन बनाने के लिए दो साल 10 माह से जमीन की तलाश की जा रही है। स्टेशन न होने से एआरटीओ कार्यालय परिसर स्थित 10 मीटर लंबे ट्रैक पर वाहन चलवाकर ड्राइविंग टेस्ट लिया जाता है। इससे टेस्ट देने वाले की दक्षता का पता नहीं चल पाता है।
चार साल पहले तक तो ये ट्रैक काफी लंबा था लेकिन वहां भवन बना दिया गया है। अब टेस्ट लेते समय अधिकारियों को भी परेशानी होती है। इसी ट्रैक पर वाहन चलवाकर हर दिन 30 से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में भी बदलाव किए गए हैं। इसके तहत उसी व्यक्ति का ड्राइविंग लाइसेंस जारी होगा, जो वाहन चालने में निपुण हैं।
विज्ञापन
नए नियम के तहत छह पैमानों पर सेंसरयुक्त ट्रैक पर टेस्ट देना है। इसके लिए शासन ने एआरटीओ को पत्र भेजकर कैमरों से लैस पीपीपी मॉडल पर ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग स्टेशन बनाने का निर्देश दिया था। दिल्ली की प्राइवेट कंपनी ने इंदारा में दो एकड़ जमीन का एग्रीमेंट कराकर राज्य परिवहन प्राधिकरण में आवेदन किया था।
जमीन के सर्वे के लिए एआरटीओ को मुख्यालय से पत्र आया था, जिसके अनुपालन में एआरटीओ सुहेल अहमद अपनी टीम के साथ सोमवार को इंदारा पहुंचे। जमीन एआरटीओ कार्यालय से 13.5 किलोमीटर दूर, मुख्य मार्ग से 500 मीटर अंदर, रास्ता संकरा होने के चलते जगह फेल हो गई।
विज्ञापन
शासन के अनुसार टेस्टिंग स्टेशन का निर्माण पीपीपी मॉडल पर कराना है। ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग स्टेशन बनाने के लिए दो साल 10 माह से जमीन की तलाश की जा रही है। स्टेशन न होने से एआरटीओ कार्यालय परिसर स्थित 10 मीटर लंबे ट्रैक पर वाहन चलवाकर ड्राइविंग टेस्ट लिया जाता है। इससे टेस्ट देने वाले की दक्षता का पता नहीं चल पाता है।
विज्ञापन
चार साल पहले तक तो ये ट्रैक काफी लंबा था लेकिन वहां भवन बना दिया गया है। अब टेस्ट लेते समय अधिकारियों को भी परेशानी होती है। इसी ट्रैक पर वाहन चलवाकर हर दिन 30 से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में भी बदलाव किए गए हैं। इसके तहत उसी व्यक्ति का ड्राइविंग लाइसेंस जारी होगा, जो वाहन चालने में निपुण हैं।
विज्ञापन
नए नियम के तहत छह पैमानों पर सेंसरयुक्त ट्रैक पर टेस्ट देना है। इसके लिए शासन ने एआरटीओ को पत्र भेजकर कैमरों से लैस पीपीपी मॉडल पर ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग स्टेशन बनाने का निर्देश दिया था। दिल्ली की प्राइवेट कंपनी ने इंदारा में दो एकड़ जमीन का एग्रीमेंट कराकर राज्य परिवहन प्राधिकरण में आवेदन किया था।
जमीन के सर्वे के लिए एआरटीओ को मुख्यालय से पत्र आया था, जिसके अनुपालन में एआरटीओ सुहेल अहमद अपनी टीम के साथ सोमवार को इंदारा पहुंचे। जमीन एआरटीओ कार्यालय से 13.5 किलोमीटर दूर, मुख्य मार्ग से 500 मीटर अंदर, रास्ता संकरा होने के चलते जगह फेल हो गई।