फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   The helplessness of the idols who sacrificed their lives

मूर्तियों में जान डालने वाले हुनमंदों के चेहरे पर बेबसी

Thu, 15 Oct 2020 06:48 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 15 Oct 2020 06:48 PM IST
विज्ञापन
The helplessness of the idols who sacrificed their lives
मरदह। नवरात्र पर्व जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है। मां दुर्गा की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में कलाकार जुट गए हैं। कोई पुश्तैनी धंधे को बचाने में महंगाई से जूझ रहा है, तो कोई आत्म संतुष्टि के लिए अपनी कला का जौहर दिखा रहे हैं। पीपनार गांव निवासी दो सगे भाइयों सुनील राजभर एवं सोनू राजभर एक माह से प्रतिमा तैयार करने में जुटे हैं। यह कलाकार भी मंहगाई की मार झेल रहे हैं। कड़ी मेहनत के बावजूद मनमाफिक रकम मिलने की गुंजाइश नहीं दिख रही है। कुछ कलाकार ऐसे हैं, जो पुश्तैनी धंधे को बचाने में जुटे हैं। पसीने से तर-बतर हाथों में पेटिंग ब्रश लिए दुर्गा प्रतिमा को अंतिम रूप दे रहे हैं। अमर उजाला की टीम से बातचीत में सुनील राजभर ने बताया कि उनके यहां करीब एक दर्जन प्रतिमाएं तैयार की जा रही है। हम दोनों भाई पढ़ाई लिखाई के साथ ही परिवार के जीविकोपार्जन के लिए घर पर ही अपनी कला को उकेरने में लगे हैं। मगर जिस तरह अभी तक आर्डर आ रहे हैं, उसको देख ऐसा प्रतीत हो रहा है कुछ प्रतिमाएं बच भी जाएंगी। कहा, क्या करें धंधा है और अब कुछ कर भी नहीं सकते। इसलिए इसी काम में लगे रहना मजबूरी भी है। मूर्तियों में इस्तेमाल होने वाली बांस, लकड़ी, सुतरी, मिट्टी, पेंट, कपड़ा आदि का मूल्य एक वर्ष में दोगुने हो गए हैं, जबकि मूर्तियों के दाम वहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed