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नहाय-खाय के साथ डाला छठ महापर्व का व्रत शुरू

Mon, 08 Nov 2021 09:39 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 08 Nov 2021 09:39 PM IST
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The fasting of Chhath Mahaparv started with bathing
गाजीपुर। भगवान सूर्य की उपासना का महापर्व डाला छठ का व्रत सोमवार से शुरु हो गया। पहले दिन महिलाओं ने लौका-भात खाकर व्रत रखा और घरों में छठ मइया की आराधना में व्रती महिलाएं पूरी तरह से लीन हो गईं। इस दौरान घरों में छठी मइया के गीत भी गाए गए।
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जिले में डाला छठ पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। पिछले कई दिनों से घर-घर में इसकी जोरदार तैयारी हो रही है। पहले दिन नहाय खाय के तहत सोमवार को स्नान के बाद व्रती महिलाओं ने लौका-भात खाकर व्रत धारण किया। इसको लेकर व्रती महिलाओं के घर वाले भी व्यस्त रहे। बताया गया है कि लौका-भात जहां आसानी से पच जाता है, वहीं इससे शुद्धता भी बनी रहती है। इसमें स्वच्छता एवं पवित्रता का विशेष महत्व है। सभी घरों में इस परंपरा का निर्वहन पूरी आस्था और विश्वास के साथ किया जाता है। डाला छठ का व्रत शुरू होने के साथ ही घरों में छठ मइया की पूजा का भी दौर शुरू हो गया। व्रती महिलाएं पूरी तरह से छठ मइया की आराधना मेें लीन हो गईं। उनके द्वारा छठ मइया का गीत भी गाया गया।
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डाला छठ पर्व के तहत दूसरे दिन मंगलवार को व्रती महिलाएं खरना करेंगी। खरना में दिन भर व्रत रहने के बाद शाम के समय पूड़ी तथा खीर खाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि करीब 24 घंटे के निर्जल व्रत को करने से पहले खरना के रुप में किए जाने वाले इस व्रत से शरीर स्वस्थ बना रहता है। छठ पर्व के एक दिन पहले इस खरना के बाद से ही व्रत शुरु हो जाता है। इसके बाद महिलाएं छठ की पूजा पाठ में पूरी तरह से जुट जाती हैं। घरों में ठेकुआ, खाजा, कसार आदि पकवान बनाया जाता है। व्रत का यह क्रम तीसरे दिन भोर में भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने के बाद समाप्त होता है। करीब 36 घंटे बाद पूजा संपन्न हो जाने पर महिलाएं प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारन करती हैं।
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छठ की तैयारी को लेकर सोमवार को बाजारों में सूप, मऊनी, मिट्टी के बर्तनों के साथ ही पूजा सामग्रियों की जमकर खरीददारी की गई। बाजारों में बांस के सूप, दौरी, मऊनी, टोकरी आदि की दुकानों पर लोगों की भीड़ बनी रही। इसी प्रकार मिट्टी का दीया, ढकनी, चौमुख, छोटा ढक्कन भी अलग-अलग दामों पर बिकते रहे। शहर में इसके लिए कई स्थानों पर दुकानें लगी हैं। इसी प्रकार रोरी, अक्षत, दीया, बत्ती, अगरबत्ती, कपूर आदि पूजा सामग्रियों की दुकानों पर लोग खरीददारी करते रहे। इसके चलते शहर तथा ग्रामीण इलाकों के बाजारों में देर शाम तक चहल-पहल बनी रही।

छठ की पूजा के मद्देनजर गंगा घाटों तथा नदी, पोखरों के किनारे वेदी के निर्माण का सिलसिला शुरु हो गया है। लोग जलाशयों के किनारे घास-फूस साफ कर मिट्टी की बड़ी-बड़ी वेदी बना रहे हैं। परंपरा के अनुसार इसी वेदी पर पूजा सामग्री रखकर शाम को अस्ताचल तथा सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। कई व्रती महिलाएं इस वेदी पर अंखड दिया रखकर छठी मइया के गीत गाती हैं। शहर के विभिन्न गंगा घाटों पर भी लोग वेदी बनाते रहे। इसी प्रकार मुहम्मदाबाद, औड़िहार, जमानिया, कासिमाबाद, दिलदारनगर, जखनिया, मरदह, करंडा, मौधा, देवकली, करीमुद्दीनपुर, मनिहारी, खानपुर आदि इलाकों में भी नदी, पोखरों आदि के किनारे श्रद्धालुओं की ओर से वेदी बनाई गई।
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