{"_id":"20592e414ab930a13e5cf4e8684f1abd","slug":"the-family-remained-eyes-on-the-waves-of-the-ganges-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा की लहरों पर टिकी रही परिजनों की निगाहें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा की लहरों पर टिकी रही परिजनों की निगाहें
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Tue, 07 Apr 2015 11:08 PM IST
विज्ञापन
बीते सोमवार की सुबह शहर के पोस्ताघाट पर नहाते समय गंगा में डूबे युवक की
विज्ञापन
तलाश में गोताखोर जुटे रहे। इस दौरान घाट पर मौजूद परिवार के लोगों के साथ
ही अन्य लोगों की निगाहें गंगा पर टिकी रही। आंखों में आंसू लिए परिवार के
लोग ऊपर वाले से प्रार्थना करते रहे कि चंदन का पता चल जाए।
शहर के जमलापुर निवासी पान विक्रेता दयाशंकर गुप्ता का पुत्र चंदन गुप्ता (22) अपने साथियों के साथ पोस्ताघाट पर गंगा नहाने के लिए गया था। नहाते-नहाते वह गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। उसे डूबता देख उसके साथियों ने शोर मचाया। जब तक वहां मौजूद कुछ समझ पाते, चंदन डूब गया। घटना की जानकारी होते ही परिवार सहित मुहल्ले के लोग घाट पर पहुंचे।
मौके पर पहुंची पुलिस ने चंदन की तलाश शुरू कराई, लेकिन देर रात तक उसका कुछ पता नहीं चल रहा। मंगलवार की सुबह से ही जाल के सहारे गोताखोर चंदन की तलाश में जुट गए। इस दौरान परिवार के लोगों सहित मुहल्लेवासी घाट पर मौजूद थे।
जैसे ही मल्लाह जाल को खींचना शुरू करते थे, वैसे वहां मौजूद लोगों की आंखें इस आस से जाल में टिक जा रही था कि शायद चंदन का पता चल जाए, लेकिन जाल खाली होने पर वह मायूस हो जा रहे थे। दोपहर बाद 3 बजे से चंदन का कुछ पता नहीं चल रहा था और गोताखोर उसकी तलाश में जुटे हुए थे।
शहर के जमलापुर निवासी पान विक्रेता दयाशंकर गुप्ता का पुत्र चंदन गुप्ता (22) अपने साथियों के साथ पोस्ताघाट पर गंगा नहाने के लिए गया था। नहाते-नहाते वह गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। उसे डूबता देख उसके साथियों ने शोर मचाया। जब तक वहां मौजूद कुछ समझ पाते, चंदन डूब गया। घटना की जानकारी होते ही परिवार सहित मुहल्ले के लोग घाट पर पहुंचे।
मौके पर पहुंची पुलिस ने चंदन की तलाश शुरू कराई, लेकिन देर रात तक उसका कुछ पता नहीं चल रहा। मंगलवार की सुबह से ही जाल के सहारे गोताखोर चंदन की तलाश में जुट गए। इस दौरान परिवार के लोगों सहित मुहल्लेवासी घाट पर मौजूद थे।
जैसे ही मल्लाह जाल को खींचना शुरू करते थे, वैसे वहां मौजूद लोगों की आंखें इस आस से जाल में टिक जा रही था कि शायद चंदन का पता चल जाए, लेकिन जाल खाली होने पर वह मायूस हो जा रहे थे। दोपहर बाद 3 बजे से चंदन का कुछ पता नहीं चल रहा था और गोताखोर उसकी तलाश में जुटे हुए थे।