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Ghazipur News: माता शबरी और सुग्रीव की मित्रता का प्रसंग अत्यंत प्रेरणादायक

Thu, 27 Aug 2026 02:17 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2026 02:17 AM IST
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The episode of the friendship between Mother Shabari and Sugriva is extremely inspiring.
गहमर गांव के बुढ़वा महादेव मंदिर परिसर में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के आठवें दिन मंगलवार रात कथा व्यास अमित महाराज ने शबरी और सुग्रीव से जुड़े प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा में माता शबरी और सुग्रीव का प्रसंग समर्पण और सच्ची मित्रता का प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने शबरी-राम मिलन का वर्णन करते हुए कहा कि वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण माता शबरी की कुटिया पहुंचे थे। मतंग ऋषि की शिष्या शबरी वर्षों से प्रभु राम की प्रतीक्षा कर रही थीं। उन्होंने प्रेमपूर्वक भगवान राम को कंद-मूल और बेर अर्पित किए, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया।
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कथा व्यास ने बताया कि जब प्रभु राम ने माता सीता की खोज का उपाय पूछा तो शबरी ने उन्हें वानरराज सुग्रीव के पास जाने का मार्ग बताया। इसके बाद राम और सुग्रीव की निस्वार्थ मित्रता हुई। ऋष्यमूक पर्वत पर हनुमान ने ब्राह्मण वेश में प्रभु राम और सुग्रीव की भेंट कराई। सुग्रीव अपने भाई बाली के अत्याचारों से पीड़ित और भयभीत थे। प्रभु राम ने उन्हें अभयदान देते हुए बाली के वध का संकल्प लिया। अग्नि को साक्षी मानकर दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामा। श्रीराम ने सुग्रीव को उनकी पत्नी और राज्य वापस दिलाने में मदद की। इसके बदले सुग्रीव ने माता सीता की खोज के लिए अपनी वानर सेना को चारों दिशाओं में भेजा।
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