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सभी सीटों पर जीत सपा के लिए चुनौती
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Tue, 22 Nov 2016 12:22 AM IST
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आरटीआई मैदान में सपा सुप्रीमो के आगमन के लिए तैयारी का जायजा लेते प्रदेश महासचिव ओमप्रकाश सिंह
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सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की आरटीआई मैदान पर 23 नवंबर की रैली के मद्देनजर वीर अब्दुल हमीद की धरती पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 14 नवंबर की परिवर्तन सभा के बाद सभी दल सक्रिय हो गए हैं। नोटबंदी और अन्य मुद्दों पर भाजपा को घेरने की तैयारी चल रही है। चर्चा है कि आरटीआई मैदान में मुलायम सिंह यादव साइकिल की रफ्तार तेज करने के साथ ही मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट करेंगे।
जिले के चुनावी गुणा-भाग में मुस्लिम मतदाताओं की खास अहमियत है। विधानसभा चुनाव में समीकरण बदलने की कूवत रखने वाले इस वोट बैंक को सभी अपने पाले में करना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से सपा ने राजनीतिक उलटफेर की क्षमता रखने वाले कौमी एकता दल के विलय को स्वीकार किया। आबादी के लिहाज से जनपद में नौ फीसदी मुसलमान हैं। यहां की चार विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक की भूमिका में रहे हैं। इसमें मुहम्मदाबाद, जहूराबाद, जमानिया तथा सदर विधानसभा सीट शामिल हैं। मुस्लिम मतदाता आमतौर पर भाजपा को नापसंद करने वाले माने जाते हैं। बावजूद सपा के लिए सभी सीटों पर जीत दर्ज करना किसी चुनौती से कम नहीं है।
पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो जिले की सात सीटों में से छह पर सपा ने जीत दर्ज की थी। जबकि एकमात्र मुहम्मदाबाद विधानसभा सीट कौएद के पास थी। अब उसका भी सपा में विलय हो चुका है। इससे सभी सीटों पर सपा का कब्जा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा, बसपा और कांग्रेस को करारी हार मिली थी। इस बार भाजपा विकास के रास्ते चुनावी जंग की तैयारी में जुटी है। जातीयता से सधने वाली जनपद की राजनीति में भाजपा को इसका कितना लाभ मिलेगा, यह समय ही बताएगा। बसपा और कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहता है यह भी समय के गर्भ में है।
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जिले के चुनावी गुणा-भाग में मुस्लिम मतदाताओं की खास अहमियत है। विधानसभा चुनाव में समीकरण बदलने की कूवत रखने वाले इस वोट बैंक को सभी अपने पाले में करना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से सपा ने राजनीतिक उलटफेर की क्षमता रखने वाले कौमी एकता दल के विलय को स्वीकार किया। आबादी के लिहाज से जनपद में नौ फीसदी मुसलमान हैं। यहां की चार विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक की भूमिका में रहे हैं। इसमें मुहम्मदाबाद, जहूराबाद, जमानिया तथा सदर विधानसभा सीट शामिल हैं। मुस्लिम मतदाता आमतौर पर भाजपा को नापसंद करने वाले माने जाते हैं। बावजूद सपा के लिए सभी सीटों पर जीत दर्ज करना किसी चुनौती से कम नहीं है।
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पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो जिले की सात सीटों में से छह पर सपा ने जीत दर्ज की थी। जबकि एकमात्र मुहम्मदाबाद विधानसभा सीट कौएद के पास थी। अब उसका भी सपा में विलय हो चुका है। इससे सभी सीटों पर सपा का कब्जा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा, बसपा और कांग्रेस को करारी हार मिली थी। इस बार भाजपा विकास के रास्ते चुनावी जंग की तैयारी में जुटी है। जातीयता से सधने वाली जनपद की राजनीति में भाजपा को इसका कितना लाभ मिलेगा, यह समय ही बताएगा। बसपा और कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहता है यह भी समय के गर्भ में है।
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