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लेकर बाबा का नाम चले कांवरिए महाहर धाम
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सावन के दूसरे सोमवार को देवाधिदेव का जलाभिषेक करने के लिए रविवार को सुबह से देर रात तक शहर में कांवरियों की भीड़ उमड़ी। चीतनाथ और ददरीघाट को जाने वाले रास्ते पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। जहां से गंगा स्नान कर जल लेकर कांवरियं पदयात्रा करते हुए महाहर धाम रवाना हुए। प्रशासन द्वारा घाटों के आसपास सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। लाइट और जनरेटर की व्यवस्था करने से लेकर कंट्रोल रूम के साथ दो शिफ्टों में कर्मचारियों की तैनाती की गई है। सुबह 10 से छह और शाम छह से रात 2 बजे तक नपा समेत अन्य विभागों की तैनाती की गई थी।
रविवार की सुबह से पैदल तथा निजी वाहनों से कांवरियों के शहर में आने का क्रम शुरू हो गया। जैसे-जैसे दिन ढलता गया कांवरियों की संख्या में भी वृद्धि होती गई। शाम पांच बजे तक जिधर भी लोगों की नजर जा रही थी, उधर गेरुआधारी ही दिखाई दे रहे थे। ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ कांवरिया प्राइवेट वाहनों से पहुंचे, वहीं अधिकांश अपने निजी साधन से आए।
पहले कांवरिये मिश्रबाजार में रुके। इसके बाद दर्जनों की संख्या में सजी पूजा सामग्री की दुकानों से कांवर, लुटिया अन्य पूजा के सामानों की खरीददारी कर गंगा घाटों के लिए रवाना हुए। वहीं ददरीघाट पर शिवपार्वती की झांकी देखने के लिए कांवरियों का रेला उमड़ा। घाटों पर भोले भक्तों ने गंगा स्नान के बाद पूजन-अर्चन किया इसके बाद कांवर उठाकर महाहर धाम रवाना हुए। घाटों पर मेले जैसी स्थिति बनी रही।
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कांवरिए जिन मार्गों से गुजरे, उन मार्गों पर आवागमन में कई बार अवरोध उत्पन्न हुआ। गाजीपुर-मऊ मार्ग पर पूरी रात वाहनों की रफ्तार धीमी रही। मरदह संवाददाता के अनुसार सावन के दूसरे सोमवार को जलाभिषेक करने के लिए कांवरियों का जत्था क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण अंचलों से जिला मुख्यालय स्थित गंगा घाट के लिए रविवार की देर शाम को मरदह बस स्टैंड से रवाना हुआ।
मालूम हो कि कांवरिया गंगा घाट से जल लेकर 26 किलोमीटर दूर स्थित महाहर धाम शिव मंदिर में पैदल चलकर जलाभिषेक करेंगे। सावन के पहले सोमवार को काफी कम भीड़ रही लेकिन उसके बाद मौसम परिवर्तन होने से हजारों कांवरिए महाहर धाम पहुंचेंगे। ऐेेसे में प्रशासन तथा जिला प्रशासन अलर्ट है। सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर के चारों तरफ सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, साथ ही साथ मार्ग परिवर्तित, बैरेकेडिंग, सहित सीसी कैमरा निगरानी रखी जा रही है।
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रविवार की सुबह से पैदल तथा निजी वाहनों से कांवरियों के शहर में आने का क्रम शुरू हो गया। जैसे-जैसे दिन ढलता गया कांवरियों की संख्या में भी वृद्धि होती गई। शाम पांच बजे तक जिधर भी लोगों की नजर जा रही थी, उधर गेरुआधारी ही दिखाई दे रहे थे। ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ कांवरिया प्राइवेट वाहनों से पहुंचे, वहीं अधिकांश अपने निजी साधन से आए।
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पहले कांवरिये मिश्रबाजार में रुके। इसके बाद दर्जनों की संख्या में सजी पूजा सामग्री की दुकानों से कांवर, लुटिया अन्य पूजा के सामानों की खरीददारी कर गंगा घाटों के लिए रवाना हुए। वहीं ददरीघाट पर शिवपार्वती की झांकी देखने के लिए कांवरियों का रेला उमड़ा। घाटों पर भोले भक्तों ने गंगा स्नान के बाद पूजन-अर्चन किया इसके बाद कांवर उठाकर महाहर धाम रवाना हुए। घाटों पर मेले जैसी स्थिति बनी रही।
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कांवरिए जिन मार्गों से गुजरे, उन मार्गों पर आवागमन में कई बार अवरोध उत्पन्न हुआ। गाजीपुर-मऊ मार्ग पर पूरी रात वाहनों की रफ्तार धीमी रही। मरदह संवाददाता के अनुसार सावन के दूसरे सोमवार को जलाभिषेक करने के लिए कांवरियों का जत्था क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण अंचलों से जिला मुख्यालय स्थित गंगा घाट के लिए रविवार की देर शाम को मरदह बस स्टैंड से रवाना हुआ।
मालूम हो कि कांवरिया गंगा घाट से जल लेकर 26 किलोमीटर दूर स्थित महाहर धाम शिव मंदिर में पैदल चलकर जलाभिषेक करेंगे। सावन के पहले सोमवार को काफी कम भीड़ रही लेकिन उसके बाद मौसम परिवर्तन होने से हजारों कांवरिए महाहर धाम पहुंचेंगे। ऐेेसे में प्रशासन तथा जिला प्रशासन अलर्ट है। सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर के चारों तरफ सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, साथ ही साथ मार्ग परिवर्तित, बैरेकेडिंग, सहित सीसी कैमरा निगरानी रखी जा रही है।