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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   Swami Avimukteshwarananda Saraswati called mother cow soul of eternal culture in ghazipur

UP News: गो माता केवल पशु नहीं, सनातन संस्कृति की आत्मा; गाजीपुर में बोले शंकराचार्य स्वामी अनिमुक्तेश्वरानंद

Sat, 09 May 2026 10:57 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर। Published by: Pragati Chand Updated Sat, 09 May 2026 10:57 PM IST
सार

ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा निकाली गई गोविष्टि यात्रा शनिवार को गाजीपुर पहुंची। लंका मैदान पर पहुंचते ही श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया। 

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Swami Avimukteshwarananda Saraswati called mother cow soul of eternal culture in ghazipur
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गो माता केवल पशु नहीं, सनातन संस्कृति की आत्मा हैं। जिस गो माता को सनातन संस्कृति में माता का स्थान प्राप्त है, आज उसी गो माता की हत्या हो रही है। हमारा वोट लेकर हमारी ही गो माता को काटने का कार्य किया जा रहा है, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, धर्म और आस्था की आत्मा है। जो जनप्रतिनिधि और राजनीतिक दल वास्तविक रूप से गो संरक्षण के लिए कार्य करेंगे, वहीं समाज और संतों के आशीर्वाद के अधिकारी होंगे। उक्त बातें शनिवार को शहर के लंका मैदान पहुंचे ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कही।

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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बीते तीन मई से गोविष्टि यात्रा (गो-रक्षा धर्मयुद्ध यात्रा) पर हैं। इसके तहत शंकराचार्य सदर विधानसभा क्षेत्र के रामलीला लंका मैदान पहुंचे। जहां संत समाज, विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों तथा हजारों श्रद्धालुओं द्वारा उनका भव्य एवं श्रद्धामय स्वागत किया गया। इस मौके पर शंकराचार्य ने कहा कि गो माता भारतीय जीवन दर्शन का केंद्र रही हैं। वेदों, पुराणों एवं सनातन परंपरा में गो सेवा को पुण्य और गो रक्षा को धर्म बताया है। 
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उन्होंने कहा कि जिस समाज में गो माता सुरक्षित रहती हैं, वहां समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक चेतना का वास होता है। कहा कि केवल मंचों से घोषणाएं करने से को रक्षा नहीं होगी, बल्कि इसके लिए ठोस इच्छाशक्ति एवं कठोर कानून की आवश्यकता है। देश के विभिन्न राज्यों के राजनीतिक एवं सामाजिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाताओं को जागरूक होना होगा और ऐसे नेतृत्व का समर्थन करना होगा जो सनातन मूल्यों एवं गो संरक्षण के प्रति निष्ठावान हो। 
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उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि सनातन चेतना को जागृत करने का आध्यात्मिक अभियान है। यह यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचेगी और समाज को धर्म, संस्कृति एवं गौ सेवा के महत्व से जोड़ने का कार्य करेगी। अंत में शंकराचार्य ने उपस्थित लोगों को गो सेवा, गो संरक्षण एवं सनातन संस्कृति की रक्षा के संकल्प लेने का आह्वान किया। इस मौके पर हर्ष मिश्रा, लक्ष्मीमणी शास्त्री, राघवेंद्र पाठक, ब्रजभूषण दुबे, सुनील राम, मुनन यादव, अजय कुमार श्रीवास्तव, संदीप विश्वकर्मा, शशांक उपाध्याय, रविकांत राय आदि मौजूद रहे।

गाय के नाम पर सत्ता पर काबिज, लेकिन नहीं रोक सके गो-हत्या: शंकराचार्य

गोविष्टि यात्रा शनिवार को सदर विधानसभा के लंका मैदान पहुंची। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पत्रकार वार्ता में कहा कि इस समय देश में गो-हत्या को बंद करने को लेकर इतना सकारात्मक महौल है। वर्तमान सरकार गाय के नाम पर ही सत्ता पर काबिज है। उसके बाद भी गो-हत्या नहीं रोक पा रहे हैं। तंज कसते हुए कहा कि भाजपा की कला है कि, वह दिखाने के लिए तो है, पर करती कुछ नहीं है। एक तरह से वह घटोरसंग (भारतीय लोककथाओं का प्रचलित चतुर ठग) है। एक प्रश्न के जवाब में शंकराचार्य ने असम के मुख्यमंत्री हेमंत विस्वा शर्मा ने गो हत्यारों का वोट लेने को कहा था, तो हम उनसे नाता कैसे रख सकते हैं। तमिलनाड़ु में लोकतंत्र का मजाक उड़ाया जा रहा है। जीत के आने के बाद भी प्रत्याशियों को अस्थिर करने का प्रयास किया जाता है। इस समय जो तोड़फोड़ की राजनीति शुरू हुई है। वह देश के वोटरों का अपमान है। गौ-रक्षा को धर्म का मुद्दा मानकर कोई पार्टी इसमें आना ही नहीं चाहतीं। इस यात्रा से वोटरों को जगाने का ही कार्य किया जा रहा है। वजह ऐसे नेताओं को जीताने वाले वोटरों पर भी गो हत्या का पाप लगता है, जिनके वोट से ऐसा नेता जीतता है। पाप करने वाले के जीतना ही पाप का भागीदार होता है। इसी लिए हम वोटरों को गो-रक्षा करने वाले को वोट देने को कह रहे हैं।
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