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श्रीराम का जीवन आदर्शों से परिपूर्ण
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सुहवल। संत मानदास बाबा मंदिर परिसर में नौ दिवसीय 25 कुंडीय लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में प्रवचन के दौरान कथा वाचिका ने श्रीराम के जीवन को आदर्शों से परिपूर्ण बताया। कहा श्रीराम अधर्म, पाप और अत्याचार के नाश के लिए धरती पर अवतरित हुए थे।
संगीतमय रामकथा के पहले दिन रविवार कसे प्रयागराज की कथा वाचिका रागिनी सरस्वती ने रामकथा का रसपान कराते हुए कहा कि भगवान श्रीराम निराकार ब्रह्म हैं। वह अधर्म, पाप, अत्याचार के नाश के लिए धरती पर अवतरित हुए। उन्होंने रावण के अंत के साथ बुराई का अंत भी किया। कहा कि जिस प्रकार प्रकाश से दूर रहना ही अंधकार है, उसी प्रकार प्रभु से दूर रहना ही दुख का कारण है। प्रभु श्रीराम जगत के पालक हैं। उनका जीवन आदर्शों से परिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमें सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। बुराई का कतई साथ नहीं देना चाहिए। जीवन-मरण का संघर्ष चलता रहता है, लेकिन इस बीच धर्म से विमुख होने पर हम अपनी मंजिल से दूर हो जाते हैं। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। जीवन में मर्यादा है तो प्रगति के मार्ग खुल जाएंगे और जीवन धन्य हो जाएगा। संत एक ऐसा माध्यम है, जो प्रभु से इंसान को जोड़ता है। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन के व्यस्त कार्य से थोड़ा समय निकालकर कथा का स्मरण करना चाहिए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु मौजूद थे।
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संगीतमय रामकथा के पहले दिन रविवार कसे प्रयागराज की कथा वाचिका रागिनी सरस्वती ने रामकथा का रसपान कराते हुए कहा कि भगवान श्रीराम निराकार ब्रह्म हैं। वह अधर्म, पाप, अत्याचार के नाश के लिए धरती पर अवतरित हुए। उन्होंने रावण के अंत के साथ बुराई का अंत भी किया। कहा कि जिस प्रकार प्रकाश से दूर रहना ही अंधकार है, उसी प्रकार प्रभु से दूर रहना ही दुख का कारण है। प्रभु श्रीराम जगत के पालक हैं। उनका जीवन आदर्शों से परिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमें सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। बुराई का कतई साथ नहीं देना चाहिए। जीवन-मरण का संघर्ष चलता रहता है, लेकिन इस बीच धर्म से विमुख होने पर हम अपनी मंजिल से दूर हो जाते हैं। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। जीवन में मर्यादा है तो प्रगति के मार्ग खुल जाएंगे और जीवन धन्य हो जाएगा। संत एक ऐसा माध्यम है, जो प्रभु से इंसान को जोड़ता है। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन के व्यस्त कार्य से थोड़ा समय निकालकर कथा का स्मरण करना चाहिए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु मौजूद थे।
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