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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   Shelter homes have not been built even after seven months; the number of dogs in the municipal bodies remains unknown.

Ghazipur News: सात महीने बाद भी नहीं बने शेल्टर होम, निकायों में कितने कुत्ते ये भी नहीं पता

Sun, 07 Jun 2026 12:23 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jun 2026 12:23 AM IST
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Shelter homes have not been built even after seven months; the number of dogs in the municipal bodies remains unknown.
शहर के लंका तिराहे के पास सड़क किनारे घूमता कुत्तों का झुंड। संवाद
गाजीपुर। जनपद में आठ नगर निकाय हैं। सभी नगर निकायों की सड़कों व गलियों में कुत्तों के झुंड देखे जा सकते हैं। इससे राहगीर हर वक्त खौफजदा रहते हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि सभी नगर निकाय सड़क पर घूमने वाले कुत्तों के लिए शेल्टर होम की व्यवस्था करें। सुप्रीम आदेश आए सात महीने बीत गए हैं। इसके बावजूद नगर निकायों की ओर इस पर अमल नहीं किया गया। नगर निकायों में शेल्टर होम बनना दूर, अब तक कुत्तों की गणना तक नहीं कराई गई है। ऐसे में यह पता नहीं चल पाता है कि किस नगर निकाय में कितनी-कितनी संख्या में कुत्ते हैं। जिले में तीन नगर पालिकाएं शहर समेत मुहम्मदाबाद व जमानिया है। जबकि बहादुरगंज, सैदपुर, सादात, जंगीपुर व दिलदारनगर नगर पंचायत हैं।
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सुप्रीम कोर्ट की ओर से नवंबर 2025 में आदेश दिया गया था कि कुत्तों को रखने के लिए सभी नगर निकायों में शेल्टर होम बनाया जाए। लेकिन किसी भी नगर निकाय में शेल्टर होम नहीं बनाए गए हैं। इसके कारण राहगीर हमेशा अनहोनी को लेकर शंकित रहते हैं। जबकि आए दिन कुत्तों का आक्रमक स्वभाव देखने को मिलता है। वह राहगीरों व वाहन चालकों को देखकर अनावश्यक पीछे-पीछे दौड़ने के साथ ही भौंकने का काम करते हैं। कुत्तों का अचानक यह स्वभाव देखकर राह चलते लोगों व वाहन चालकों का ध्यान बंट जाता है। ऐसे में सड़क हादसा होने की संभावना बनी रहती है। वयस्क लोग कुत्तों के इस स्वभाव से अभ्यस्त हैं। लेकिन, जब छोटे बच्चे सड़कों व गलियों में कुत्तों का ऐसा स्वभाव देखते हैं, तो वह डर जाते हैं। विशेष रूप से अकेले होने की स्थिति में।
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बंदरों से लोग परेशान
नगर निकायों में कुत्तों के अलावा बंदर भी परेशानी का सबब बने हुए हैं। लोगों के गार्डेन व छतों पर बंदर जमकर उत्पात मचा रहे हैं। गार्डेन में वह पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही छतों पर सुखाने के लिए रखे गए अनाज को नष्ट कर रहे हैं। कभी-कभी वह छतों पर सुखाने के लिए रखे गए कपड़ों को लेकर रफू-चक्कर हो जा रहे हैं। बाद में जब महिलाएं छतों पर जाती हैं, तो कपड़े नीचे सड़कों पर गिरे हुए नजर आते हैं या फिर गायब। कई बार बंदर छत की सीढि़यों से रसोई घर तक दाखिल हो जाते हैं।
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प्रतिदिन लग रहे 65 एंटी रैबीज
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रतिदिन 65 मरीज एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने आ रहे हैं। जबकि मई में यह आंकड़ा 50 का रहा। इस महीने में एंटी रैबीज वैक्सीन लगाने का आंकड़ा बढ़ा है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्राचार्य प्रो. आनंद मिश्रा ने बताया कि प्रतिदिन 65 एंटी रैबीज वैक्सीन लग रहे हैं।

केस एक - शहर के तड़बनवा में एक सप्ताह पहले एक युवक को कुत्ते ने काट लिया था। आसपास मौजूद लोगों ने उसको उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल भिजवाया था।
केस दो - सैदपुर नगर में चार दिन पहले एक कुत्ते ने एक किशोर के ऊपर झपट्टा मारा। उसकी मंशा भांपते हुए किशोर शोर मचाते हुए दौड़ने लगा। आसपास के लोगों ने कुत्ते को भगाया।
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नगर निकायों में सड़क पर घूमने वाले कुत्तों के लिए शेल्टर होम होना चाहिए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना चाहिए।- कृतिका शर्मा, सैदपुर
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राह चलते कुत्ते अनावश्यक रूप से उग्र हो जाते हैं। विशेष रूप से रात के समय। जब भी कुत्ते एक से अधिक संख्या में होते हैं, तो ऐसा व्यवहार करते हैं। - राजेश कुमार यादव, दिलदारनगर

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सड़क पर घूमने वाले कुत्तों के लिए शेल्टर होम अभी नहीं बन पाया है। इसमें जमीन की उपलब्धता की अड़चन आ रही है। प्रयास जारी है। - डीके राय, ईओ नगर पालिका

शहर के लंका तिराहे के पास सड़क किनारे घूमता कुत्तों का झुंड। संवाद

शहर के लंका तिराहे के पास सड़क किनारे घूमता कुत्तों का झुंड। संवाद

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