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भारत गांवों का गणराज्य
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भांवरकोल। खरडीहा महाविद्यालय के संस्थापक सेनानी बृजमंगल राय की पुण्यतिथि पर महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ बीएचयू के हिंदी विभाग के प्रोफेसर राजकुमार ने किया। इस दौरान समकालीन समाज और भारतीय राष्ट्रवाद और चुनौतियां विषयक संगोष्ठी में वक्ताओं ने भारत को गांवों का गणराज्य बताया। मुख्य अतिथि मैगसायसाय पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह ने कहा कि भारत गांवों का गणराज्य है। उन्होंने भारत को जैव विविधता से परिपूर्ण बताते हुए इसे पंचमहाभूत निर्मित बताया। उन्होंने कहा कि आजाद भारत में संविधान का अपमान बढ़ने से नई चुनौतियां बढ़ी हैं। सरकारों द्वारा भारत की सामुदायिकता, सहकारिता को तोड़कर कारपोरेट किया जा रहा है। वैचारिक रूप से हम भारतीयों में प्रकृति के पुनर्जन्म की प्रक्रिया शुरु हो तभी जाकर भारत का पुर्ननिर्माण संभव होगा। विशिष्ट अतिथि बीएचयू के प्रोफेसर राजकुमार ने कहा कि भारतीय राष्ट्रवाद की संकल्पना भारतीय सभ्यता और संस्कृति की बुनियाद पर निर्मित हुई है। राष्ट्र शब्द की प्राचीनता एवं उसके अर्थ में व्यापक परिवर्तन हुआ है। वर्तमान में यह अपने प्राचीन अर्थ का बोध नहीं कराता।
इस मौके पर डा. दीनानाथ सिंह, राहुल सिंह, डा. ओमप्रकाश सिंह, डा.शरद सिंह, डा. अशोक सिंह, डा. आरपी द्विवेदी, डा. शैलेन्द्र सिंह, डा. धर्मेंद्र सिंह, डा. कृष्णानंद चतुर्वेदी, डा. अवनीश मौजूद थे। डा. कृष्णकांत सिंह ने आगंतुकों के प्रति आभार जताया।
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इस मौके पर डा. दीनानाथ सिंह, राहुल सिंह, डा. ओमप्रकाश सिंह, डा.शरद सिंह, डा. अशोक सिंह, डा. आरपी द्विवेदी, डा. शैलेन्द्र सिंह, डा. धर्मेंद्र सिंह, डा. कृष्णानंद चतुर्वेदी, डा. अवनीश मौजूद थे। डा. कृष्णकांत सिंह ने आगंतुकों के प्रति आभार जताया।
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