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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   Sawan Special: The face of this Shivling is in all four directions, the mystery is related to ancient times

Sawan Special: चारों दिशाओं में है इस शिवलिंग का मुख, प्राचीन काल से जुड़ा है रहस्य, ये है कहानी

Tue, 11 Jul 2023 11:44 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर Published by: किरन रौतेला Updated Tue, 11 Jul 2023 11:44 AM IST
सार

कुटिया पर एक साधु रहते थे, जो गाय पालने के शौकीन थे। उनकी गाय दूध देती थी, लेकिन एक दिन ऐसा आया कि गाय ने दूध देना बंद कर दिया। इससे साधु चिंतित हुए और गाय के पीछे-पीछे एक दिन जंगल में चले गए। जहां देखकर उनकी आंखें फटी की फटी रह गई। वजह गाय टीले पर जाकर खड़ी हो गई थी और उसके थन से दूध की धारा बह रही थी। इसपर वे पास गए तो देखा एक चार मुख वाला शिवलिंग दिखाई दिया।

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Sawan Special: The face of this Shivling is in all four directions, the mystery is related to ancient times
Sawan Special: चारों दिशाओं में है इस शिवलिंग का मुख, प्राचीन काल से जुड़ा है रहस्य - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देवकली ब्लॉक मुख्यालय से आठ किमी उत्तर पश्चिम देवकली शादियाबाद मार्ग पर स्थित धुवार्जुन गांव में स्थित बाबा चौमुखनाथ धाम पर लोगों की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग का मुख चारों दिशाओं में है। इस शिवलिंग की लंबाई के बारे में आज तक किसी को नहीं पता। इस बारे में चर्चा करने पर लोग प्राचीन काल की ऐसी रहस्यमयी घटना बताते हैं, जिसे जानने पर लोगों को विश्वास ही नहीं हो पता है। हालांकि बाबा चौमुख नाथ धाम में सावन मास में देवो के देव महादेव को जलाभिषेक करने वालों का तांता लगा रहता है।

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बताया जा रहा है कि प्राचीन काल में मंदिर के पास जंगल था, जिसमें कबीर पंथी मठ था। यह मथ इस समय भी है। बताते हैं कि वहां कुटिया पर एक साधु रहते थे, जो गाय पालने के शौकीन थे। उनकी गाय दूध देती थी, लेकिन एक दिन ऐसा आया कि गाय ने दूध देना बंद कर दिया। इससे साधु चिंतित हुए और गाय के पीछे-पीछे एक दिन जंगल में चले गए। जहां देखकर उनकी आंखें फटी की फटी रह गई। वजह गाय टीले पर जाकर खड़ी हो गई थी और उसके थन से दूध की धारा बह रही थी। इसपर वे पास गए तो देखा एक चार मुख वाला शिवलिंग दिखाई दिया।

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Sawan Special: The face of this Shivling is in all four directions, the mystery is related to ancient times
बाबा चौमुखनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने ग्रामीणों की मदद से खुदाई कराई, लेकिन जमीन से पानी निकलने लगा और शिवलिंग के लंबाई का पता नहीं चला। इससे परेशान होकर खुदाई बंद कर दी गई और वहीं पर शिव मंदिर पूजा-पाठ शुरू कर दिया गया। वर्ष 1998 मे ओम आनंद प्रभू ने जनसहयोग से मंदिर का जीर्णोद्वार कराया। बाबा चौमुख नाथ धाम धुवार्जुन समिति के अध्यक्ष बेचन राय और पुजारी वीरेंद्र गिरि ने बताया मंदिर लोगों के आस्था का केंद्र है। सुधीर पांडेय, सुरेंद्र राय, सूर्यदेव राय, सुरेंद्र राम, विनोद राय, पंकज राय, भानू प्रकाश राय, लालजी राय, धीरज पहलवान ने बताया धाम को पर्यटक केंद्र के रुप में विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन आज तक पुरातत्व विभाग द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।
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