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Ghazipur News: पीएम श्री विद्यालयों में बनाए जाएंगे वेजिटेबल, मेडिसिनल किचन गार्डन
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गाजीपुर। पीएम-श्री योजना के तहत जिले के चयनित पीएम-श्री विद्यालयों में बच्चों को प्रकृति, पोषण, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए वेजीटेबल-मेडिकल-किचन गार्डन विकसित किए जाएंगे।
इसके लिए प्रत्येक चयनित स्कूल को 20-20 हजार रुपये की दर से जिले के 32 पीएम-श्री विद्यालयों के लिए 6 लाख 40 हजार रुपये की धनराशि मिली है।
बीएसए उपासना रानी वर्मा ने बताया कि विद्यालय परिसर में उपलब्ध स्थान के आधार पर गार्डन विकसित किया जाएगा। पर्याप्त भूमि न होने पर कांपैक्ट गार्डन, वर्टिकल गार्डन, पॉट गार्डन, बोतल गार्डन या रेज्ड बेड मॉडल अपनाया जा सकेगा। गार्डन का स्थान बच्चों के लिए सुरक्षित और आसानी से पहुंच योग्य होने के साथ पानी और धूप की उपलब्धता वाला होना चाहिए।
गार्डन में तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा, नीम, आंवला, हल्दी, अदरक, धनिया, पालक, मेथी सहित स्थानीय जलवायु के अनुरूप औषधीय, सुगंधित और मौसमी पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा गार्डन में मेडिसिनल प्लांट, किचन गार्डन, एरोमैटिक प्लांट, कंपोस्ट जैसे कॉर्नर विकसित करने की भी व्यवस्था है।
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गार्डन को कक्षा शिक्षण से जोड़ने पर जोर दिया गया है। बच्चे पौधों की पहचान, उनकी वृद्धि का रिकॉर्ड, पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी चर्चा, औषधीय पौधों पर चार्ट-पोस्टर, कंपोस्ट निर्माण और जल संरक्षण जैसी गतिविधियों में भाग ले सकेंगे।
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इसके लिए प्रत्येक चयनित स्कूल को 20-20 हजार रुपये की दर से जिले के 32 पीएम-श्री विद्यालयों के लिए 6 लाख 40 हजार रुपये की धनराशि मिली है।
बीएसए उपासना रानी वर्मा ने बताया कि विद्यालय परिसर में उपलब्ध स्थान के आधार पर गार्डन विकसित किया जाएगा। पर्याप्त भूमि न होने पर कांपैक्ट गार्डन, वर्टिकल गार्डन, पॉट गार्डन, बोतल गार्डन या रेज्ड बेड मॉडल अपनाया जा सकेगा। गार्डन का स्थान बच्चों के लिए सुरक्षित और आसानी से पहुंच योग्य होने के साथ पानी और धूप की उपलब्धता वाला होना चाहिए।
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गार्डन में तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा, नीम, आंवला, हल्दी, अदरक, धनिया, पालक, मेथी सहित स्थानीय जलवायु के अनुरूप औषधीय, सुगंधित और मौसमी पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा गार्डन में मेडिसिनल प्लांट, किचन गार्डन, एरोमैटिक प्लांट, कंपोस्ट जैसे कॉर्नर विकसित करने की भी व्यवस्था है।
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गार्डन को कक्षा शिक्षण से जोड़ने पर जोर दिया गया है। बच्चे पौधों की पहचान, उनकी वृद्धि का रिकॉर्ड, पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी चर्चा, औषधीय पौधों पर चार्ट-पोस्टर, कंपोस्ट निर्माण और जल संरक्षण जैसी गतिविधियों में भाग ले सकेंगे।