Sawan Special: श्रीराम ने की थी बूढ़ेनाथ महादेव में शिवलिंग की स्थापना, वन जाते समय यहां किया था विश्राम
Sawan Special: त्रेतायुग में ताड़का नामक राक्षसी द्वारा ऋषि-मुनियों के यज्ञ में विघ्न डाला जाता था। तब विश्वामित्र ने अयोध्या नरेश महाराज दशरथ के पास पहुंचकर ऋषि-मुनियों की समस्या बताई और राम और लक्ष्मण को साथ लेकर वन चल दिए। वे गंगा के किनारे-किनारे सैदपुर के रास्ते जा रहे थे।
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सैदपुर स्थित गंगा तट पर स्थित बूढ़ेनाथ महादेव मंदिर में सावन में जलाभिषेक करने को शिवभक्त आ रहे हैं। मान्यता है कि यज्ञ और हवन की रक्षा के लिए ब्रह्मऋषि विश्वामित्र के साथ अयोध्या से वन जाते समय श्रीराम, लक्ष्मण ने सैदपुर स्थित गंगा तट पर रात्रि विश्राम किया था। अगले दिन प्रातः गुरु विश्वामित्र के निर्देश पर बालू से शिवलिंग का निर्माण कर भगवान शंकर की उपासना की थी।
बताते हैं कि त्रेतायुग में ताड़का नामक राक्षसी द्वारा ऋषि-मुनियों के यज्ञ में विघ्न डाला जाता था। तब विश्वामित्र ने अयोध्या नरेश महाराज दशरथ के पास पहुंचकर ऋषि-मुनियों की समस्या बताई और राम और लक्ष्मण को साथ लेकर वन चल दिए। वे गंगा के किनारे-किनारे सैदपुर के रास्ते जा रहे थे।
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उन्होंने सैदपुर नगर में ही गंगा तट पर रात्रि विश्राम किया। अगले दिन प्रातः गुरु के निर्देश पर राम और लक्ष्मण ने स्नान करने के बाद बालू से शिवलिंग का निर्माण कर महादेव की उपासना की, जिसे बूढ़ेनाथ महादेव के नाम से जाना-जाता है।
बाद में पशुओं को चराते हुए एक चरवाहा उसी स्थान से गुजरा। जहां उसकी नजर शिवलिंग पर पड़ी। फिर वहां की साफ-सफाई के बाद गांव वालों ने शिवलिंग की उपासना करनी शुरू कर दी अब यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना है। मान्यता है कि यहां महादेव का पूजन अर्चन करने से भगवान शिव और प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त होता है।