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रेत पर उकेरी कलाकृतियां
ब्यूरो अमर उजाला/गाजीपुर
Updated Sun, 24 Jan 2016 11:56 PM IST
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संस्कार भारती की ओर से ददरीघाट पर रेत पर कलाकृति प्रतियोगिता का आयोजन रविवार को किया गया। इस अवसर पर चित्रकारों और शिल्पकारों ने रेत पर एक से बढ़कर एक कलाकृतियां उकेरकर अपने हुनर का प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, धीरेंद्र महिला पीजी कालेज, इंस्टीट्यूट आफ फाईन आर्ट्स वाराणसी तथा अन्य महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने रेत पर अद्भूत चित्र प्रस्तुत किया।
कुछ कलाकारों ने शहीद सुभाषचंद्र बोस के प्लेन-क्रैश का शिल्प निर्मित किया। कलाकारों ने सामाजिक संदर्भ से जुड़े अत्यंत भावपूर्ण एवं मोहक दृश्य का चित्रांकन किया। गंगा तट की वृहद रेत माला पर शिल्प-संसार की अभूतपूर्व रचना अनेक कला-प्रेमियों के लिए प्रेरक रही।
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राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला में वाराणसी से आए आनंदवन कलाकार समूह के अलावा अनेक राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चित्रकारों ने अभूतपूर्व कौशल का परिचय देते हुए एक से बढ़कर एक नवीन कृतियों की रचना की।
प्रसिद्घ चित्रकार एस प्रणाम सिंह ने बैरागी साधू का चित्र कैनवस पर उकेरा जबकि चित्रशिल्पी परमानंद सिंह ने भारतीय नारी के स्वावलंबी स्वरूप को अपनी तूलिका से रेखांकित किया।
वरिष्ठ चित्रकार वेद प्रकाश मिश्र ने आध्यात्मिक ऊर्जा से लबरेज ददरी घाट के तटीय दृश्य को विभिन्न रंगों की पेन से निर्मित किया। पंकज शर्मा, अमरेश कुमार, डॉ. सुधीर केशरवानी,
प्रो. सरोज रानी, डॉ. सुनील और स्वतंत्र चित्रकार केएम मेहरा ने अपनी चित्रकला से कला प्रेमियों को मोहित कर दिया। इसके बाद बाल चित्रकारों की प्रेरणा के लिए भी शैक्षणिक कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला का उद्घाटन वरिष्ठ चित्रकार एस प्रणाम सिंह ने किया। इसके बाद निर्णायक मंडल ने चित्रकला का अवलोकन किया। संस्था के मंत्री राजन तिवारी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. सुनील कुमार सिंह एवं संस्कार भारती के राष्ट्रीय चित्रकला प्रमुख डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा मौजूद रहे।
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इस अवसर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, धीरेंद्र महिला पीजी कालेज, इंस्टीट्यूट आफ फाईन आर्ट्स वाराणसी तथा अन्य महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने रेत पर अद्भूत चित्र प्रस्तुत किया।
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कुछ कलाकारों ने शहीद सुभाषचंद्र बोस के प्लेन-क्रैश का शिल्प निर्मित किया। कलाकारों ने सामाजिक संदर्भ से जुड़े अत्यंत भावपूर्ण एवं मोहक दृश्य का चित्रांकन किया। गंगा तट की वृहद रेत माला पर शिल्प-संसार की अभूतपूर्व रचना अनेक कला-प्रेमियों के लिए प्रेरक रही।
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राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला में वाराणसी से आए आनंदवन कलाकार समूह के अलावा अनेक राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चित्रकारों ने अभूतपूर्व कौशल का परिचय देते हुए एक से बढ़कर एक नवीन कृतियों की रचना की।
प्रसिद्घ चित्रकार एस प्रणाम सिंह ने बैरागी साधू का चित्र कैनवस पर उकेरा जबकि चित्रशिल्पी परमानंद सिंह ने भारतीय नारी के स्वावलंबी स्वरूप को अपनी तूलिका से रेखांकित किया।
वरिष्ठ चित्रकार वेद प्रकाश मिश्र ने आध्यात्मिक ऊर्जा से लबरेज ददरी घाट के तटीय दृश्य को विभिन्न रंगों की पेन से निर्मित किया। पंकज शर्मा, अमरेश कुमार, डॉ. सुधीर केशरवानी,
प्रो. सरोज रानी, डॉ. सुनील और स्वतंत्र चित्रकार केएम मेहरा ने अपनी चित्रकला से कला प्रेमियों को मोहित कर दिया। इसके बाद बाल चित्रकारों की प्रेरणा के लिए भी शैक्षणिक कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला का उद्घाटन वरिष्ठ चित्रकार एस प्रणाम सिंह ने किया। इसके बाद निर्णायक मंडल ने चित्रकला का अवलोकन किया। संस्था के मंत्री राजन तिवारी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. सुनील कुमार सिंह एवं संस्कार भारती के राष्ट्रीय चित्रकला प्रमुख डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा मौजूद रहे।