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या हुसैन की सदाओं से गूंजे गली-मुहल्ले
ब्यूरो/अमर उजाला/गाजीपुर
Updated Sun, 25 Oct 2015 12:40 AM IST
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मोहर्रम पर शनिवार को शहर सहित जिले के विभिन्न हिस्सों से ताजिए निकाले गए। बाद में उन्हें कर्बला में दफन किया गया। जुलूस के दौरान लोगों ने हसन एवं हुसैन को याद करते हुए मातमपुर्सी की। शहर और देहात क्षेत्र की सड़कों पर
दोपहर बाद से जुलूसों के चलते भीड़ बनी रही। कई ग्रामीण क्षेत्रों के ताजिए का जुलूस भी नगर से होकर गुजरा। गोराबाजार, नखास स्थित लकड़ी के टाल एवं रजदेपुर पुलिस चौकी के पास ताजियों की मिलनी हुई। भोर तक ताजियों को
दफन करने का सिलसिला चलता रहा। इस दौरान फिजा में या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं।
शहर सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों का ताजिया जुलूस शहर के विशेश्वरगंज स्थित इमामबाड़े में पहुंचा। जुलूस में शामिल लोग
या हुसैन की सदाएं तथा मातम करते चल रहे थे। इसके बाद बारी-बारी से ताजिए दफन किए गए। देर शाम शुरू हुआ ताजियों को दफन का कार्य भोर तक चलता रहा। महाराजगंज में भी ताजिया का जुलूस निकाला गया। जुलूस में लोग मातम करते चल रहे थे।
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मुहम्मदाबाद : नगर में ताजिया जुलूस बड़े पैमाने पर निकाला गया। कई ताजियों को शहनिंदा के इमामबाड़े में दफनाया गया। यूसुफपुर बाजार, स्टेशन सहित अदिलाबाद क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों के ताजिए के जुलूस यूसुफपुर स्थित कर्बला में ही दफन किए गए। दो-तीन स्थानों पर मिलनी कार्यक्रम आयोजित किया गया। यूसुफपुर गुड़ मंडी के पास तिराहे पर
ऐतिहासिक लट्ठ से युद्ध कौशल को देखने के लिए भारी संख्या में लोग जुटे रहे। दिलदारनगर/भदौरा : उसिया, सेवराई, देवैथा सहित ग्रामीण इलाकों में ताजिए का जुलूस निकाला गया। कई स्थानों पर मिलनी का कार्यक्रम संपन्न हुआ। बहरियाबाद : स्थानीय कसबा सहित क्षेत्र के विभिन्न गांवों मखदूमपुर, मलिकन गांव, झोटना, दरगाह, देईपुर, पलिवार से विभिन्न चौक पर ताजिए रखे गए। मातम, नौहाख्वानी एवं जुलूस का सिलसिला दिनभर चलता रहा। दोपहर में कसबा में उत्तर और दक्षिण मुहल्ला के ताजिए जामा मस्जिद एवं इस्लामिया स्कूल परिसर में रखे गए। इसके बाद दोनों मुहल्ले से
पुन: जुलूस निकला। युवकों ने युद्ध कला का प्रदर्शन किया। देर रात तक ताजियों के दफन के कार्य चलता रहा। जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे। बहादुरगंज : नगर में स्थापित आधा दर्जन से अधिक ताजिया शनिवार को अपने-अपने चौक से दोपहर बाद उठाए गए। तमसा नदी के सती घाट पुरानीगंज एवं क्षेत्र के ग्रामसभा रसूलपुर के ताजिया से मिलनी
के बाद अपने-अपने निर्धारित रास्ते से कर्बला ले जाया गया। कर्बला में देर रात ताजिया ठंडा किया जाएगा। ताजिया के आगे-आगे विभिन्न अखाड़ों के नौजवान युद्ध कला का प्रदर्शन कर रहे थे। बाराचंवर: माटा, कामूपुर, नरायनपुर, मौरा, सिउरी अमहट में भी जुलूस निकाले गए, जिसमें आकर्षक ढंग से ताजियों को सजाया गया था। शामिल लोग या हुसैन के सदाए बुलंद करते तथा मातम करते चल रहे थे। करीमुद्दीनपुर क्षेत्र में उतरांव, असावर, दुबिहा मोड़, राजपुर, महेंद, कामूपुर, सखिया, बथोर तथा करीमुद्दीनपुर बाजार में भी जुलूस निकाला गया और मिलनी का कार्यक्रम आयोजित किया गया। मतसा: क्षेत्र के खिदिरपुर, मतसा, बेटाबर, दुरहिया कसबा पठानटोली सहित अन्य क्षेत्र में ताजिया का जुलूस निकाला गया। जमानिया: नगर क्षेत्र तथा स्टेशन बाजार के निकल ताजिए के कई जुलूस निकाले गए। जुलूस में शामिल लोग मातम करते चल रहे थे। सैदपुर: नगर में ताजिए का जुलूस विभिन्न मुहल्लों से निकाला गया। ग्रामीण इलाकों के ताजिए भी नगर क्षेत्र में ही दफन किए गए। भांवरकोल: मछटी, पखनपुरा सहित कई ग्रामीण इलाकों के ताजिए का जुलूस पखनपुरा स्थित इमामबाड़े में दफन के लिए पहुंचे। ग्रामीण इलाके के ताजियों को स्थानीय इमामबाड़े में दफन किया गया। सिधागरघाट: क्षेत्र के पाली, अवराकोल, दुर्गा स्थान आदि जगहों पर ताजिए निकाले गए। बाद में उन्हें दफन किया गया। इसके अलावा शादियाबाद, जंगीपुर, नंदगंज, बिरनो, दुल्लहपुर आदि ग्रामीण इलाकों में ताजिए का जुलूस निकाला गया।
बहरियाबाद संवाददाता के अनुसार योमे आशुरह यानी दस मुहर्रम को कस्बा के उत्तर एवं दक्षिण मुहल्ला सहित मलिकन गांव, देईपुर, पलिवार, दरगाह आदि गांवों में पूरे दिन मजलिस, जुलूस एवं विभिन्न अखाड़ों द्वारा युद्घ कला का प्रदर्शन जारी रहा।देर रात तक ताजियें दफन किए जाते रहे। कस्बा के दोनों मुहल्लों का जुलूस प्रात: 5 बजे, दोपहर 11 बजे एवं 2 बजे निकाला गया। जो चौघट्टा और जामा मस्जिद परिसर में पहुंचा। जहां युवकों ने ढाल तलवार, बल्लम, बरछी आदि हथियारों के माध्यम से कलात्मक युद्घ कला का प्रदर्शन किया। इससे पूर्व अखाड़े के युवकों ने जिला आबकारी अधिकारी राजेंद्र प्रसाद, एसडीएम जखनिया सत्येंद्र मिश्र, सीओ सैदपुर महेश राम गौतम, थानाध्यक्ष विकास पांडेय को कलात्मक ढंग से सलामी दी।
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दोपहर बाद से जुलूसों के चलते भीड़ बनी रही। कई ग्रामीण क्षेत्रों के ताजिए का जुलूस भी नगर से होकर गुजरा। गोराबाजार, नखास स्थित लकड़ी के टाल एवं रजदेपुर पुलिस चौकी के पास ताजियों की मिलनी हुई। भोर तक ताजियों को
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दफन करने का सिलसिला चलता रहा। इस दौरान फिजा में या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं।
शहर सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों का ताजिया जुलूस शहर के विशेश्वरगंज स्थित इमामबाड़े में पहुंचा। जुलूस में शामिल लोग
या हुसैन की सदाएं तथा मातम करते चल रहे थे। इसके बाद बारी-बारी से ताजिए दफन किए गए। देर शाम शुरू हुआ ताजियों को दफन का कार्य भोर तक चलता रहा। महाराजगंज में भी ताजिया का जुलूस निकाला गया। जुलूस में लोग मातम करते चल रहे थे।
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मुहम्मदाबाद : नगर में ताजिया जुलूस बड़े पैमाने पर निकाला गया। कई ताजियों को शहनिंदा के इमामबाड़े में दफनाया गया। यूसुफपुर बाजार, स्टेशन सहित अदिलाबाद क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों के ताजिए के जुलूस यूसुफपुर स्थित कर्बला में ही दफन किए गए। दो-तीन स्थानों पर मिलनी कार्यक्रम आयोजित किया गया। यूसुफपुर गुड़ मंडी के पास तिराहे पर
ऐतिहासिक लट्ठ से युद्ध कौशल को देखने के लिए भारी संख्या में लोग जुटे रहे। दिलदारनगर/भदौरा : उसिया, सेवराई, देवैथा सहित ग्रामीण इलाकों में ताजिए का जुलूस निकाला गया। कई स्थानों पर मिलनी का कार्यक्रम संपन्न हुआ। बहरियाबाद : स्थानीय कसबा सहित क्षेत्र के विभिन्न गांवों मखदूमपुर, मलिकन गांव, झोटना, दरगाह, देईपुर, पलिवार से विभिन्न चौक पर ताजिए रखे गए। मातम, नौहाख्वानी एवं जुलूस का सिलसिला दिनभर चलता रहा। दोपहर में कसबा में उत्तर और दक्षिण मुहल्ला के ताजिए जामा मस्जिद एवं इस्लामिया स्कूल परिसर में रखे गए। इसके बाद दोनों मुहल्ले से
पुन: जुलूस निकला। युवकों ने युद्ध कला का प्रदर्शन किया। देर रात तक ताजियों के दफन के कार्य चलता रहा। जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे। बहादुरगंज : नगर में स्थापित आधा दर्जन से अधिक ताजिया शनिवार को अपने-अपने चौक से दोपहर बाद उठाए गए। तमसा नदी के सती घाट पुरानीगंज एवं क्षेत्र के ग्रामसभा रसूलपुर के ताजिया से मिलनी
के बाद अपने-अपने निर्धारित रास्ते से कर्बला ले जाया गया। कर्बला में देर रात ताजिया ठंडा किया जाएगा। ताजिया के आगे-आगे विभिन्न अखाड़ों के नौजवान युद्ध कला का प्रदर्शन कर रहे थे। बाराचंवर: माटा, कामूपुर, नरायनपुर, मौरा, सिउरी अमहट में भी जुलूस निकाले गए, जिसमें आकर्षक ढंग से ताजियों को सजाया गया था। शामिल लोग या हुसैन के सदाए बुलंद करते तथा मातम करते चल रहे थे। करीमुद्दीनपुर क्षेत्र में उतरांव, असावर, दुबिहा मोड़, राजपुर, महेंद, कामूपुर, सखिया, बथोर तथा करीमुद्दीनपुर बाजार में भी जुलूस निकाला गया और मिलनी का कार्यक्रम आयोजित किया गया। मतसा: क्षेत्र के खिदिरपुर, मतसा, बेटाबर, दुरहिया कसबा पठानटोली सहित अन्य क्षेत्र में ताजिया का जुलूस निकाला गया। जमानिया: नगर क्षेत्र तथा स्टेशन बाजार के निकल ताजिए के कई जुलूस निकाले गए। जुलूस में शामिल लोग मातम करते चल रहे थे। सैदपुर: नगर में ताजिए का जुलूस विभिन्न मुहल्लों से निकाला गया। ग्रामीण इलाकों के ताजिए भी नगर क्षेत्र में ही दफन किए गए। भांवरकोल: मछटी, पखनपुरा सहित कई ग्रामीण इलाकों के ताजिए का जुलूस पखनपुरा स्थित इमामबाड़े में दफन के लिए पहुंचे। ग्रामीण इलाके के ताजियों को स्थानीय इमामबाड़े में दफन किया गया। सिधागरघाट: क्षेत्र के पाली, अवराकोल, दुर्गा स्थान आदि जगहों पर ताजिए निकाले गए। बाद में उन्हें दफन किया गया। इसके अलावा शादियाबाद, जंगीपुर, नंदगंज, बिरनो, दुल्लहपुर आदि ग्रामीण इलाकों में ताजिए का जुलूस निकाला गया।
बहरियाबाद संवाददाता के अनुसार योमे आशुरह यानी दस मुहर्रम को कस्बा के उत्तर एवं दक्षिण मुहल्ला सहित मलिकन गांव, देईपुर, पलिवार, दरगाह आदि गांवों में पूरे दिन मजलिस, जुलूस एवं विभिन्न अखाड़ों द्वारा युद्घ कला का प्रदर्शन जारी रहा।देर रात तक ताजियें दफन किए जाते रहे। कस्बा के दोनों मुहल्लों का जुलूस प्रात: 5 बजे, दोपहर 11 बजे एवं 2 बजे निकाला गया। जो चौघट्टा और जामा मस्जिद परिसर में पहुंचा। जहां युवकों ने ढाल तलवार, बल्लम, बरछी आदि हथियारों के माध्यम से कलात्मक युद्घ कला का प्रदर्शन किया। इससे पूर्व अखाड़े के युवकों ने जिला आबकारी अधिकारी राजेंद्र प्रसाद, एसडीएम जखनिया सत्येंद्र मिश्र, सीओ सैदपुर महेश राम गौतम, थानाध्यक्ष विकास पांडेय को कलात्मक ढंग से सलामी दी।