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महादेव को प्रसन्न करने का रामबाण उपाय रुद्राभिषेक
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जखनियां। महादेव को प्रसन्न करने का रुद्राभिषेक रामबाण उपाय है। रुद्राभिषेक कर शिव से मनचाहा वरदान पाया जा सकता है। शिव के रुद्र रूप को अभिषेक बहुत प्रिय है। यह बातें महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति महाराज ने सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर चातुर्मास व्रत के दौरान चल रहे रुद्राभिषेक महायज्ञ में रुद्राभिषेक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कही।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव सबसे सरल उपासना से भी प्रसन्न होते हैं लेकिन रुद्राभिषेक उन्हें सबसे अधिक प्रिय है। रुद्राभिषेक से शिवजी को प्रसन्न कर असंभव को भी संभव करने की शक्ति पा सकते हैं। ऐसे में रुद्राभिषेक करके सरलतापूर्वक शिव कृपा के भागी बन सकते हैं। रुद्र भगवान शिव का ही प्रचंड रूप हैं। शिवजी की कृपा से सारे ग्रह, बाधाओं और सारी समस्याओं का नाश होता है। शिवलिंग पर मंत्रों के साथ विशेष चीजें अर्पित करना ही रुद्राभिषेक कहा जाता है। वैदिक विद्वानों द्वारा रुद्राभिषेक में शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों के पाठ के साथ सावन में रुद्राभिषेक करना ज्यादा शुभ होता है। महामंडलेश्वर ने कहा कि भगवान शिव बहुत ही सरलता से प्रसन्न होने वाले भगवान हैं। उनके इन्हीं स्वभाव के चलते उन्हें भोलेनाथ कहते हैं। रुद्राभिषेक कोई भी कष्ट या ग्रहों की पीड़ा दूर करने का सबसे सरल उपाय है। चातुर्मास व्रत के तहत मिट्टी के बने द्वादश पार्थिव ज्योतिर्लिंगों पर देवभूमि उत्तराखंड से आए प्रकांड वैदिक विद्वान बालकृष्ण पांथरी के आचार्यत्व में चल रहे रुद्राभिषेक महायज्ञ में श्री पांथरी ने बताया कि इस बार श्रावण मास की शुरुआत सोमवार से हो रही है और सावन का समापन भी सोमवार से ही हो रहा है।
संसार में मनुष्य जन्म और विष्णु भक्ति दोनों ही दुर्लभ
जखनियां। महामंडलेश्वर भवानीनंदन यति महाराज ने बताया कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु की आराधना करें तो सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके अलावा, गुरुवार को उपवास और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया जाना भी लाभप्रद होता है। स्कंदपुराण के अनुसार, संसार में मनुष्य जन्म और विष्णु भक्ति दोनों ही दुर्लभ है लेकिन चार्तुमास में भगवान विष्णु का व्रत करने वाला मनुष्य ही उत्तम एवं श्रेष्ठ माना गया है। चौमासे के इन चार मासों में सभी तीर्थ, दान, पुण्य और देव स्थान भगवान विष्णु की शरण लेकर स्थित होते हैं और चतुर्मास में भगवान विष्णु को नियम से प्रणाम करने वाले का जीवन भी शुभ फलदायक बन जाता है।
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उन्होंने कहा कि भगवान शिव सबसे सरल उपासना से भी प्रसन्न होते हैं लेकिन रुद्राभिषेक उन्हें सबसे अधिक प्रिय है। रुद्राभिषेक से शिवजी को प्रसन्न कर असंभव को भी संभव करने की शक्ति पा सकते हैं। ऐसे में रुद्राभिषेक करके सरलतापूर्वक शिव कृपा के भागी बन सकते हैं। रुद्र भगवान शिव का ही प्रचंड रूप हैं। शिवजी की कृपा से सारे ग्रह, बाधाओं और सारी समस्याओं का नाश होता है। शिवलिंग पर मंत्रों के साथ विशेष चीजें अर्पित करना ही रुद्राभिषेक कहा जाता है। वैदिक विद्वानों द्वारा रुद्राभिषेक में शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों के पाठ के साथ सावन में रुद्राभिषेक करना ज्यादा शुभ होता है। महामंडलेश्वर ने कहा कि भगवान शिव बहुत ही सरलता से प्रसन्न होने वाले भगवान हैं। उनके इन्हीं स्वभाव के चलते उन्हें भोलेनाथ कहते हैं। रुद्राभिषेक कोई भी कष्ट या ग्रहों की पीड़ा दूर करने का सबसे सरल उपाय है। चातुर्मास व्रत के तहत मिट्टी के बने द्वादश पार्थिव ज्योतिर्लिंगों पर देवभूमि उत्तराखंड से आए प्रकांड वैदिक विद्वान बालकृष्ण पांथरी के आचार्यत्व में चल रहे रुद्राभिषेक महायज्ञ में श्री पांथरी ने बताया कि इस बार श्रावण मास की शुरुआत सोमवार से हो रही है और सावन का समापन भी सोमवार से ही हो रहा है।
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संसार में मनुष्य जन्म और विष्णु भक्ति दोनों ही दुर्लभ
जखनियां। महामंडलेश्वर भवानीनंदन यति महाराज ने बताया कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु की आराधना करें तो सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके अलावा, गुरुवार को उपवास और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया जाना भी लाभप्रद होता है। स्कंदपुराण के अनुसार, संसार में मनुष्य जन्म और विष्णु भक्ति दोनों ही दुर्लभ है लेकिन चार्तुमास में भगवान विष्णु का व्रत करने वाला मनुष्य ही उत्तम एवं श्रेष्ठ माना गया है। चौमासे के इन चार मासों में सभी तीर्थ, दान, पुण्य और देव स्थान भगवान विष्णु की शरण लेकर स्थित होते हैं और चतुर्मास में भगवान विष्णु को नियम से प्रणाम करने वाले का जीवन भी शुभ फलदायक बन जाता है।
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