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गढ्ढा मुक्त बनाने के दावे की पोल खोल रहे हैं सड़क
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दुल्लहपुर। प्रदेश सरकार की ओर से गड्ढामुक्त सड़कों का दावा पूरी तरह से फ्लाप हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों तो छोड़िए दुल्लहपुर-आजमगढ़ राजमार्ग पर भी बड़े-बड़े गड्ढे इस दावे की पोल खोल रहे हैं। सिंहाबारी, सरदरपुर, देवा, धामूपुर, टड़वाटप्पा समेत क्षेत्र की आधा दर्जन सड़कों की दशा इतनी दयनीय है कि उन पर वाहनों से चलना तो दूर पैदल यात्रा करने में भी जान हथेली पर रहती है। बरसात में यह सड़कें और भी खतरनाक हो गई है, जिस पर लोग आए दिन गिर-पड़कर चोटिल होते रहते हैं। खास बात यह है कि इस क्षेत्र में कुछ लोगों ने चुनाव के पहले सड़क नहीं तो वोट नहीं का नारा भी लगाया। नेताओं की ओर से बनवाने का आश्वासन भी मिला लेकिन नतीजा सबको देखने को मिल रहा है।
विभिन्न जिलों को जोड़ने में दुल्लहपुर क्षेत्र की सड़कें काफी सहायक है। जिला मुख्यालय से लखनऊ जाने वाली अधिकतर बसें दुल्लहपुर बाजार से हो कर गुजरती है। गाजीपुर-आजमगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग से ही स्वामी सहजानंद सरस्वती का पैतृक गांव देवा भी जुड़ा हुआ है। देवा से हमीद मार्ग तक करीब एक किलोमीटर तक इस सड़क पर गड्ढों की भरमार हो गई। इतनी ही दूरी तय करने में वाहन चालकों की हालत खराब हो जाती है। दुल्लहपुर बाजार से सिहाबारी और सरदरपुर मोड़ तक करीब तीन किलोमीटर सड़क पूरी तरह से जर्जर हो गया है। बरसात में इस सड़क से जुड़ें गांवों में गमनागमन करने के लिए कोई वाहन तैयार नहीं होते। यहां से टड़वा टप्पा गांव होते हुए मऊ जिले की ओर जाने वाली सड़क दो किलोमीटर तक दयनीय दशा में है। इसी प्रकार जलालाबाद-धर्मागतपुर, सिखड़ी आदि की ओर जाने वाली संपर्क मार्गों पर चलने में खतरा है।
गाजीपुर-आजमगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जलालाबाद से धर्मागतपुर के बीच सौ-सौ मीटर पर दर्जनों गड्ढे बन गए हैं। करीब एक साल पहले ही इसकी मरम्मत की गई थी। यह राजमार्ग बहुत व्यस्त रहता है। इस समय यह इतनी खतरनाक हो गई है कि रोज छोटी मोटी घटनाएं हो रही है। - पप्पू चौहान, दुल्लहपुर निवासी
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सिहाबारी से सरदरपुरा तक करीब तीन किलोमीटर तक की सड़क पर गिट्टी डालकर छोड़ दी गई है। इस पर चलने पर जहां वाहनों के पहिए पंक्चर हो जाते हैं, वहीं पैदल चलने पर छाले पड़ जाते हैं। बरसात के बाद अब इस सड़क पर चलने में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को दिन में ही तारें दिखने लगते हैं। - हरिकेश यादव, सरदरपुर निवासी
यह सड़क करीब एक दशक से टूटी हुई है। अब यह सिर्फ खड़ंजा ही दिख रहा है। लोकसभा चुनाव में रोड नहीं तो वोट नहीं का बैनर लगा कर जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित कराया गया। उस समय अफजाल अंसारी ने वादा भी किया था। उनके आश्वासन पर ही मतदान किया गया। अभी तक इसके निर्माण की पहल नहीं की गई। - श्याम कुशवाहा, टड़वा टप्पा निवासी
गाजीपुर-आजमगढ़ मार्ग से देवा गांव होकर गुजरने वाली हमीद मार्ग एक किलोमीटर तक पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। इस पर बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर गया है। रात के समय इस पर चलने वाले लोग गिर कर घायल होते रहते हैं। आजादी के इतने साल बाद भी आज हम सड़क जैसी बुनियादी सुविधा को भी प्राप्त नहीं कर पाए हैं। - डा. रामविलास यादव, सिखड़ी निवासी
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विभिन्न जिलों को जोड़ने में दुल्लहपुर क्षेत्र की सड़कें काफी सहायक है। जिला मुख्यालय से लखनऊ जाने वाली अधिकतर बसें दुल्लहपुर बाजार से हो कर गुजरती है। गाजीपुर-आजमगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग से ही स्वामी सहजानंद सरस्वती का पैतृक गांव देवा भी जुड़ा हुआ है। देवा से हमीद मार्ग तक करीब एक किलोमीटर तक इस सड़क पर गड्ढों की भरमार हो गई। इतनी ही दूरी तय करने में वाहन चालकों की हालत खराब हो जाती है। दुल्लहपुर बाजार से सिहाबारी और सरदरपुर मोड़ तक करीब तीन किलोमीटर सड़क पूरी तरह से जर्जर हो गया है। बरसात में इस सड़क से जुड़ें गांवों में गमनागमन करने के लिए कोई वाहन तैयार नहीं होते। यहां से टड़वा टप्पा गांव होते हुए मऊ जिले की ओर जाने वाली सड़क दो किलोमीटर तक दयनीय दशा में है। इसी प्रकार जलालाबाद-धर्मागतपुर, सिखड़ी आदि की ओर जाने वाली संपर्क मार्गों पर चलने में खतरा है।
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गाजीपुर-आजमगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जलालाबाद से धर्मागतपुर के बीच सौ-सौ मीटर पर दर्जनों गड्ढे बन गए हैं। करीब एक साल पहले ही इसकी मरम्मत की गई थी। यह राजमार्ग बहुत व्यस्त रहता है। इस समय यह इतनी खतरनाक हो गई है कि रोज छोटी मोटी घटनाएं हो रही है। - पप्पू चौहान, दुल्लहपुर निवासी
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सिहाबारी से सरदरपुरा तक करीब तीन किलोमीटर तक की सड़क पर गिट्टी डालकर छोड़ दी गई है। इस पर चलने पर जहां वाहनों के पहिए पंक्चर हो जाते हैं, वहीं पैदल चलने पर छाले पड़ जाते हैं। बरसात के बाद अब इस सड़क पर चलने में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को दिन में ही तारें दिखने लगते हैं। - हरिकेश यादव, सरदरपुर निवासी
यह सड़क करीब एक दशक से टूटी हुई है। अब यह सिर्फ खड़ंजा ही दिख रहा है। लोकसभा चुनाव में रोड नहीं तो वोट नहीं का बैनर लगा कर जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित कराया गया। उस समय अफजाल अंसारी ने वादा भी किया था। उनके आश्वासन पर ही मतदान किया गया। अभी तक इसके निर्माण की पहल नहीं की गई। - श्याम कुशवाहा, टड़वा टप्पा निवासी
गाजीपुर-आजमगढ़ मार्ग से देवा गांव होकर गुजरने वाली हमीद मार्ग एक किलोमीटर तक पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। इस पर बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर गया है। रात के समय इस पर चलने वाले लोग गिर कर घायल होते रहते हैं। आजादी के इतने साल बाद भी आज हम सड़क जैसी बुनियादी सुविधा को भी प्राप्त नहीं कर पाए हैं। - डा. रामविलास यादव, सिखड़ी निवासी