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Ghazipur News: शिशुओं में गलघोंटू बीमारी का खतरा, अस्पताल में बढ़े मरीज

Sun, 29 Jun 2025 12:29 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 29 Jun 2025 12:29 AM IST
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Risk of diphtheria in infants, number of patients in hospital increased
गहमर। डिप्थीरिया या गलघोंटू सांस से जुड़ी गंभीर बीमारी है। पांच साल से कम उम्र के शिशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से वे आसानी से इसकी चपेट में आ जाते हैं। प्रतिदिन आठ से 10 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। बरसात में शिशुओं के बीच इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इन दिनों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अस्पताल में इस बीमारी से ग्रसित बच्चों का इलाज रोज किया जा रहा है। इससे बचाव के लिए जन्म के बाद शिशुओं को डीपीटी (डिप्थीरिया-परटुसिस टिटनस) का टीका आवश्यक है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डाॅ. अंकित सिंह ने बताया कि गलघोंटू ‘कोरनीवैक्टीरियम डिप्थेरी’ जीवाणु से फैलने वाला रोग है। इसके संक्रमण से बच्चों के गले, नाक और स्वर यंत्र (सांस नली के ऊपरी हिस्से) में सूजन आ जाती है, जिससे उन्हें सांस लेने या बात करने में दर्द और कठिनाई होती है।
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डेढ़ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को लगाए जाते हैं टीके

अभिभावक को अपने शिशुओं को डेढ़, ढाई और साढ़े तीन महीने पर डीपीटी और 18 महीने एवं पांच वर्ष की उम्र में इसका बूस्टर डोज जरूर दिलवाना चाहिए। डाॅ. अंकित ने बताया कि संपूर्ण टीकाकरण चार्ट के अनुसार सभी टीके दिलवाकर शिशु संबंधित रोगों को पूर्ण रूप से खत्म करने में प्रशासन की मदद करें।
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