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Ghazipur News: ड्रॉपआउट बच्चों को पढ़ाएंगे सेवानिवृत्त शिक्षक
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गाजीपुर। जिले के परिषदीय विद्यालयों से ड्रॉपआउट हुए बच्चों के लिए शिक्षा विभाग ने पहल की है। योजना के तहत करीब 940 आउट ऑफ स्कूल विद्यार्थियों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने की जिम्मेदारी सेवानिवृत्त शिक्षकों को सौंपी जाएगी। अपने लंबे अनुभव से रिटायर्ड शिक्षक इन बच्चों को बुनियादी शिक्षा देकर नियमित पढ़ाई के लिए तैयार करेंगे।
जिले के 2266 परिषदीय विद्यालयों से ऐसे 940 विद्यार्थी चिह्नित किए गए हैं, जो आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियों, मौसमी पलायन, बीमारी या अन्य सामाजिक कारणों से पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इन बच्चों को नजदीकी परिषदीय विद्यालयों से जोड़कर विशेष कक्षाओं का संचालन किया जाएगा।
इन कक्षाओं में बच्चों को अक्षर ज्ञान, गणित की बुनियादी समझ और सामान्य विषयों की शिक्षा दी जाएगी, ताकि लंबे समय से पढ़ाई से दूर रहे विद्यार्थी धीरे-धीरे अपनी आयु के अनुरूप कक्षा में समायोजित हो सकें। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि सेवानिवृत्त शिक्षक न सिर्फ पढ़ाई कराएंगे, बल्कि बच्चों को भावनात्मक सहयोग भी देंगे। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और स्कूल के माहौल को अपनाने में मदद मिलेगी।
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रिटायर्ड शिक्षक विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता के अनुसार पढ़ाने पर विशेष ध्यान देंगे। योजना का उद्देश्य केवल नामांकन तक सीमित न रहकर बच्चों को नियमित शिक्षा से जोड़े रखना, पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित करना और ड्रॉपआउट की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाना है। इन विशेष कक्षाओं की समय-समय पर समीक्षा भी की जाएगी।
शासन की इस पहल को शिक्षा के सार्वभौमिकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। संवाद
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जिले के 2266 परिषदीय विद्यालयों से ऐसे 940 विद्यार्थी चिह्नित किए गए हैं, जो आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियों, मौसमी पलायन, बीमारी या अन्य सामाजिक कारणों से पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इन बच्चों को नजदीकी परिषदीय विद्यालयों से जोड़कर विशेष कक्षाओं का संचालन किया जाएगा।
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इन कक्षाओं में बच्चों को अक्षर ज्ञान, गणित की बुनियादी समझ और सामान्य विषयों की शिक्षा दी जाएगी, ताकि लंबे समय से पढ़ाई से दूर रहे विद्यार्थी धीरे-धीरे अपनी आयु के अनुरूप कक्षा में समायोजित हो सकें। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि सेवानिवृत्त शिक्षक न सिर्फ पढ़ाई कराएंगे, बल्कि बच्चों को भावनात्मक सहयोग भी देंगे। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और स्कूल के माहौल को अपनाने में मदद मिलेगी।
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रिटायर्ड शिक्षक विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता के अनुसार पढ़ाने पर विशेष ध्यान देंगे। योजना का उद्देश्य केवल नामांकन तक सीमित न रहकर बच्चों को नियमित शिक्षा से जोड़े रखना, पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित करना और ड्रॉपआउट की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाना है। इन विशेष कक्षाओं की समय-समय पर समीक्षा भी की जाएगी।
शासन की इस पहल को शिक्षा के सार्वभौमिकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। संवाद