{"_id":"6773b1d87dec55eb21016960","slug":"pink-toilets-in-ghazipur-closed-six-months-women-face-problems-constructed-cost-of-six-lakhs-2024-12-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP : गाजीपुर में छह माह से बंद है पिंक शौचालय, महिलाओं को होती है परेशानी; छह लाख से हुआ था निर्माण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP : गाजीपुर में छह माह से बंद है पिंक शौचालय, महिलाओं को होती है परेशानी; छह लाख से हुआ था निर्माण
Tue, 31 Dec 2024 02:27 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Tue, 31 Dec 2024 02:27 PM IST
सार
Ghazipur News : यूपी के गाजीपुर में पिंक टाॅयलेट बंद होने से महिलाओं को काफी दिक्कतें होती हैं। स्टेशन सहित अन्यत्र स्थानों पर शाैचालय में गदंगी भी लगी रहती है। कचहरी स्थित सुलभ शौचालय में एक वर्ष से ताला बंद है।
विज्ञापन
शहर के सिंचाई विभाग चौराहा स्थित पिंक शौचालय के गेट पर लगा ताला।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गाजीपुर नगर के प्रमुख स्थानों पर स्थापित शौचालयों पर कहीं ताले हैं तो कहीं गंदगी का अंबार है। कचहरी के पास बने शौचालय में एक वर्ष तो सिंचाई विभाग चौराहे के पास के शौचालय में छह माह से ताले लगे हैं। यहां विभिन्न कार्यों से रोज ग्रामीण एवं दूर-दराज इलाकों से पांच हजार से अधिक लोग पहुंचते हैं। ऐसे में महिलाओं एवं बुजुर्गों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
शहर के सिंचाई विभाग चौराहे के पास बाजार, विद्यालय और प्रमुख कार्यालय स्थापित हैं। यहां प्रतिदिन लोगों का आवागमन बना रहता है। ऐसे में महिलाओं, युवतियों एवं बालिकाओं के लिए वर्ष 2018 करीब छह लाख रुपये से पिंक शौचालय का निर्माण कराया गया था।
विज्ञापन
कुछ दिन तक तो सब ठीकठाक चला, लेकिन छह माह से ताला बंद है। अब शौचालयों के सामने फल एवं सब्जियों के ठेले लग रहे हैं। ऐसे में महिलाओं, युवतियों एवं बालिकाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
वर्ष 2018 में सात लाख रुपये की लागत से कचहरी के पास सुलभ शौचालय का निर्माण नगर पालिका द्वारा कराया, लेकिन मुश्किल से एक वर्ष बाद ही ताला लटक गया है। ऐसे में कचहरी, तहसील, कलेक्ट्रेट सहित अन्य कार्यालयों में कार्य से आने वाले लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि जिम्मेदार दुरुस्त करने व मरम्मत का हवाला देकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं, लेकिन आज तक इन शौचालयों का ताला नहीं खुल सका।