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Ghazipur News: शहीद पार्क में सभागार बनाने के लिए नींव खोदी
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मुहम्मदाबाद। शहीद पार्क में सांसद निधि से सभागार बनाए जाने के लिए नींव की खोदाई शुरू होने पर लोगों ने नाराजगी जताई है। लोगों ने प्रस्तावित सभागार को शहीद पार्क के बाहर उसकी बाउंड्री से सटे तहसील की खाली पड़ी भूमि या 100 मीटर की दूरी पर स्थित खंड विकास कार्यालय, बीआरसी परिसर अथवा शहीदों के पैतृक गांव शेरपुर में बनाने की मांग की है।
अचानक एक दिन सुबह ल़ोगों ने देखा कि शहीद पार्क में शहीद स्तंभ के पास काफी मात्रा में मिट्टी गिरी है। कौतूहलवश नजदीक जाकर देखा तो पता चला कि यह मिट्टी लाई नहीं गई है बल्कि रात्रि में जेसीबी से नींव खोदी गई है। इसमें सांसद निधि से लगभग 50 लाख रुपये की लागत से एक 50 बाई 50 फीट का सभागार बनाया जाएगा। इसे देखकर लोग आश्चर्यचकित रह गए। 18 अगस्त 1942 को देश को आजाद कराने के लिए शेरपुर के आठ नौजवान शहीद हुए थे।
उनकी याद में तहसील भवन के सामने एक छोटा सा पार्क बना था उसी के बीचोबीच सड़क थी। जिससे होकर मुहम्मदाबाद नगर के लोग युसुफपुर बाजार आते जाते थे। लोगों की मांग पर 80 के दशक में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उस सड़क को बंद कर उसे छोटे से खुली जमीन को पार्क का रूप देकर उसकी बाउंड्री करके उसके बीचोबीच एक शहीद स्तंभ बनवा दिया। जिसके अंदर सार्वजनिक सभा और बैठक आदि होती रही है।
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बच्चे शाम सुबह पार्क में खेलते है। पिछले द़ो तीन साल पूर्व पार्क के सुंदरीकरण और उसमे हरियाली लाने के लिए कुछ समाजसेवियों ने अथक प्रयास कर उसमे पेड़-पौधे लगाकर उसे हराभरा किया। अब जब उसमें सभागार बन जाने से पार्क का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और वह सिर्फ सभागार ही रह जाएगा। पार्क का स्वरूप समाप्त हो जाने से बच्चों के खेलने का स्थान भी समाप्त हो जाएगा और सभा मिटिंग भी यहां नहीं हो पाएगी। सभागार बनाए जाने की जानकारी मिलने पर लोगों ने गहरी नाराजगी जताई है।
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शहीद पार्क की गरिमा के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। सभागार के लिए तहसील परिसर में काफी जमीन है उसमें कही भी सभागार बन सकता है। राजकिशोर अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता।
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नगर में यही एक ही पार्क है, जिसमे बच्चे खेलते है। हमलोगों ने काफी मेहनत करके इसमे पौध रोपड़ किया है। सभागार बनने से पार्क के साथ ही उसकी हरियाली भी समाप्त हो जाएगी। - सरदार गुरुचरन सिंह।
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शहीद पार्क में सभागार बनने पर पार्क का स्वरूप नहीं रह जाएगा और शहीद पार्क इतिहास बन जाएगा। - डा. जनक कुशवाहा, कांग्रेस नेता।
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शहीद पार्क में सभागार बनने से बच्चों के खेलने के स्थान, सभा स्थल एवं बुजुर्गों के टहलने और व्यायाम करने का एक मात्र सार्वजनिक स्थान भी समाप्त हो जाएगा। स्तंभ की गरिमा को भी नुकसान पहुंचेगा।- नारायण तिवारी।
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अचानक एक दिन सुबह ल़ोगों ने देखा कि शहीद पार्क में शहीद स्तंभ के पास काफी मात्रा में मिट्टी गिरी है। कौतूहलवश नजदीक जाकर देखा तो पता चला कि यह मिट्टी लाई नहीं गई है बल्कि रात्रि में जेसीबी से नींव खोदी गई है। इसमें सांसद निधि से लगभग 50 लाख रुपये की लागत से एक 50 बाई 50 फीट का सभागार बनाया जाएगा। इसे देखकर लोग आश्चर्यचकित रह गए। 18 अगस्त 1942 को देश को आजाद कराने के लिए शेरपुर के आठ नौजवान शहीद हुए थे।
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उनकी याद में तहसील भवन के सामने एक छोटा सा पार्क बना था उसी के बीचोबीच सड़क थी। जिससे होकर मुहम्मदाबाद नगर के लोग युसुफपुर बाजार आते जाते थे। लोगों की मांग पर 80 के दशक में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उस सड़क को बंद कर उसे छोटे से खुली जमीन को पार्क का रूप देकर उसकी बाउंड्री करके उसके बीचोबीच एक शहीद स्तंभ बनवा दिया। जिसके अंदर सार्वजनिक सभा और बैठक आदि होती रही है।
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बच्चे शाम सुबह पार्क में खेलते है। पिछले द़ो तीन साल पूर्व पार्क के सुंदरीकरण और उसमे हरियाली लाने के लिए कुछ समाजसेवियों ने अथक प्रयास कर उसमे पेड़-पौधे लगाकर उसे हराभरा किया। अब जब उसमें सभागार बन जाने से पार्क का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और वह सिर्फ सभागार ही रह जाएगा। पार्क का स्वरूप समाप्त हो जाने से बच्चों के खेलने का स्थान भी समाप्त हो जाएगा और सभा मिटिंग भी यहां नहीं हो पाएगी। सभागार बनाए जाने की जानकारी मिलने पर लोगों ने गहरी नाराजगी जताई है।
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शहीद पार्क की गरिमा के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। सभागार के लिए तहसील परिसर में काफी जमीन है उसमें कही भी सभागार बन सकता है। राजकिशोर अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता।
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नगर में यही एक ही पार्क है, जिसमे बच्चे खेलते है। हमलोगों ने काफी मेहनत करके इसमे पौध रोपड़ किया है। सभागार बनने से पार्क के साथ ही उसकी हरियाली भी समाप्त हो जाएगी। - सरदार गुरुचरन सिंह।
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शहीद पार्क में सभागार बनने पर पार्क का स्वरूप नहीं रह जाएगा और शहीद पार्क इतिहास बन जाएगा। - डा. जनक कुशवाहा, कांग्रेस नेता।
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शहीद पार्क में सभागार बनने से बच्चों के खेलने के स्थान, सभा स्थल एवं बुजुर्गों के टहलने और व्यायाम करने का एक मात्र सार्वजनिक स्थान भी समाप्त हो जाएगा। स्तंभ की गरिमा को भी नुकसान पहुंचेगा।- नारायण तिवारी।