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गाजीपुर में घटे पेंशनर, 1446 की पेंशन बंद
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गाजीपुर में पेंशनरों की संख्या दिन-ब-दिन घटती जा रही है। अभी यह आंकड़ा सैकड़े में है, लेकिन आने वाले कुछ वर्षों में यह आंकड़ा और तेजी से घटेगा। जिले में शिक्षा और सिविल क्षेत्रों को मिलाकर 27043 पेंशनर हैं। इसमें पिछले साल की तुलना में 620 पेंशनर घटे हैं। यह कमी 2.29 फीसदी की दर से है।
जिला कोषागार की मानें तो इस समय सबसे अधिक पेंशन पाने वाले शिक्षा विभाग से सेवानिवृत कर्मचारी हैं। इसके बाद पुलिस और अन्य विभाग के लोग हैं। शिक्षा विभाग के करीब 35 फीसद लोग पेंशनरों में शामिल हैं। अन्य 65 फीसदी में सिविल सेवा के अन्य विभागों से जुड़े पेंशनर हैं। साथ ही इस वर्ष कुल 1446 लोगों की पेंशन खाते में नहीं जा रही है, क्योंकि इनमें से बहुत लोगों ने वर्ष बीत जाने के बाद भी मृत्यु प्रमाण-पत्र नहीं जमा कराया या मृत्यु का समय साल भर से ज्यादा होने के बाद इस बाबत ट्रेजरी विभाग को कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।
दूसरी ओर से देखें तो शिक्षा विभाग या पुलिस विभाग सहित अन्य विभागों में जो नई भर्तियां हो रही हैं, उनमें सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से पेंशन की कोई व्यवस्था नहीं है। क्योंकि सरकारों की मंशा भी पेंशन व्यवस्था को खत्म करने की रही है। इसके लिए समय-समय पर नए-नए मैकेनिज्म लाए जाते हैैं। इस लिहाज से आने वाले दशकों में नए पेंशनर नहीं बढ़ेंगे बल्कि धीरे-धीरे पुराने पेंशनर घटते जाएंगे।
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किसी पेंशनर को साल भर में एक बार ही जीवित प्रमाण-पत्र जमा करना होता है। हर वर्ष पिछली बार के समय पर ही प्रमाण-पत्र देना चाहिए। जैसे ही एक वर्ष पूरा होता है और जीवित-प्रमाण पत्र अपडेट नहीं होता, तुरंत पेंशन रोक दी जाती है। वहीं, जीवित प्रमाण-पत्र जमा एक साल तक जमा नहीं किया जाता तो आगे व्यक्ति को जिलाधिकारी के समक्ष जीवित प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होता है, जिसके बाद पुन: पेंशन शुरू होती है।
बोले अधिकारी:
पेंशनर दिन पर दिन घटते ही जा रहे हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल 2.29 फीसदी पेंशनर कम हुए हैं, जो आने वाले दिनों में और घटेंगे ही।
दीपक सिंह, वित्त एवं लेखाधिकारी गाजीपुर।
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जिला कोषागार की मानें तो इस समय सबसे अधिक पेंशन पाने वाले शिक्षा विभाग से सेवानिवृत कर्मचारी हैं। इसके बाद पुलिस और अन्य विभाग के लोग हैं। शिक्षा विभाग के करीब 35 फीसद लोग पेंशनरों में शामिल हैं। अन्य 65 फीसदी में सिविल सेवा के अन्य विभागों से जुड़े पेंशनर हैं। साथ ही इस वर्ष कुल 1446 लोगों की पेंशन खाते में नहीं जा रही है, क्योंकि इनमें से बहुत लोगों ने वर्ष बीत जाने के बाद भी मृत्यु प्रमाण-पत्र नहीं जमा कराया या मृत्यु का समय साल भर से ज्यादा होने के बाद इस बाबत ट्रेजरी विभाग को कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।
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दूसरी ओर से देखें तो शिक्षा विभाग या पुलिस विभाग सहित अन्य विभागों में जो नई भर्तियां हो रही हैं, उनमें सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से पेंशन की कोई व्यवस्था नहीं है। क्योंकि सरकारों की मंशा भी पेंशन व्यवस्था को खत्म करने की रही है। इसके लिए समय-समय पर नए-नए मैकेनिज्म लाए जाते हैैं। इस लिहाज से आने वाले दशकों में नए पेंशनर नहीं बढ़ेंगे बल्कि धीरे-धीरे पुराने पेंशनर घटते जाएंगे।
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किसी पेंशनर को साल भर में एक बार ही जीवित प्रमाण-पत्र जमा करना होता है। हर वर्ष पिछली बार के समय पर ही प्रमाण-पत्र देना चाहिए। जैसे ही एक वर्ष पूरा होता है और जीवित-प्रमाण पत्र अपडेट नहीं होता, तुरंत पेंशन रोक दी जाती है। वहीं, जीवित प्रमाण-पत्र जमा एक साल तक जमा नहीं किया जाता तो आगे व्यक्ति को जिलाधिकारी के समक्ष जीवित प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होता है, जिसके बाद पुन: पेंशन शुरू होती है।
बोले अधिकारी:
पेंशनर दिन पर दिन घटते ही जा रहे हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल 2.29 फीसदी पेंशनर कम हुए हैं, जो आने वाले दिनों में और घटेंगे ही।
दीपक सिंह, वित्त एवं लेखाधिकारी गाजीपुर।