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गंगा के पानी से चौतफा घिरा पटना गांव
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गाजीपुर के सैदपुर विकासखंड का पटना गांव गंगा की बाढ़ में चारों तरफ से घिर चुका है। गांव से सैदपुर की ओर निकलने के लिए एकमात्र जो रास्ता बचा है, वह भी जर्जर हालत में है। रास्ते में बनी पुलिया भी बदहाल है जो कभी भी धराशायी हो सकती है।
गंगा के मुहाने पर स्थित पटना गांव की फसल और पशुओं का चारा बाढ़ के पहले चरण में ही जलमग्न हो चुका है। लगातार बढ़ते जलस्तर से अब गांव का अधिकांश हिस्सा भी बाढ़ की चपेट में आ चुका है। लोगों के घरों के निचले हिस्से में बाढ़ का पानी घुस गया हैै। इससे उनको छतों पर शरण लेनी पड़ रही है। हालत यह है कि गुलाब राजभर, रामकुंवर, राजू, दीनदयाल, जयहिंद, वंशराज, खिचड़ू, कन्हैया, हंसराज, श्यामजी, लालता, जितेंद्र, रामसेवक, दिनेश, झूरी, रामप्रवेश, कमलेश, अभी, लल्लन, लीलावती, साहब, पप्पू, मनोज, वकील, गिरजा, पूजन, विद्या, सागर, दयालु, कैलाश, बच्चन, राममूरत, मुन्ना, नीबू, अमलाल, सियाराम, बच्चेलाल, हरी, गया, बिरजू, दीना, रामअधार सहित लगभग साठ लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुस चुका है।
गांव के युवा सपा नेता मनोज यादव और ग्राम प्रधान संतोष यादव ने बताया कि प्रशासन की ओर से अभी तक राहत के नाम पर कुछ भी गांव वासियों को नहीं मिली है। गांव के लेखपाल भी कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। आरोप लगाया कि वह स्थलीय निरीक्षण करने के बजाय गांव के बाहर बने मंदिर पर बैठकर ही बाढ़ का जायजा ले रहे हैं।
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औड़िहार स्थित वराह भगवान और जौहरगंज के श्मशान घाट पर स्थित भगवान महाकाल के मंदिर भी बाढ़ से घिर गया है। अंत्येष्टि का काम ऊपरी हिस्से में होने लगा है। वहीं वराह धाम मंदिर पर श्रद्धालुओं का आवागमन बंद कर दिया गया है। जबकि पटना स्थित रामानंद मठ का अधिकांश हिस्सा भी बाढ़ की चपेट में आ चुका है। वहीं हस्पतिवार को सैदपुर के उपजिलाधिकारी विक्रम सिंह ने बाढ़ से प्रभावित पटना गांव का जायजा लिया। सिधौना के पशु चिकित्सा अधिकारी डा. दीनदयाल की टीम ने शुक्रवार को गांव में कैंप लगाकर पशुओं का टीकाकरण कराया।
बाढ़ से प्रभावित गांवों में सांप, बिच्छू और गोह जैसे विषैले जीव-जंतुओं ने वृक्षों को अपना आशियाना बना लिया है। कुछ गांवों में इन्हें मकान की दीवारों पर चढ़ते हुए देखा जा रहा है। चारो तरफ भय का माहौल बना हुआ है जिससे लोग चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि गंगा और गोमती में बढ़ा जलस्तर 2013 की बाढ़ की याद दिला रहा है।
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गंगा के मुहाने पर स्थित पटना गांव की फसल और पशुओं का चारा बाढ़ के पहले चरण में ही जलमग्न हो चुका है। लगातार बढ़ते जलस्तर से अब गांव का अधिकांश हिस्सा भी बाढ़ की चपेट में आ चुका है। लोगों के घरों के निचले हिस्से में बाढ़ का पानी घुस गया हैै। इससे उनको छतों पर शरण लेनी पड़ रही है। हालत यह है कि गुलाब राजभर, रामकुंवर, राजू, दीनदयाल, जयहिंद, वंशराज, खिचड़ू, कन्हैया, हंसराज, श्यामजी, लालता, जितेंद्र, रामसेवक, दिनेश, झूरी, रामप्रवेश, कमलेश, अभी, लल्लन, लीलावती, साहब, पप्पू, मनोज, वकील, गिरजा, पूजन, विद्या, सागर, दयालु, कैलाश, बच्चन, राममूरत, मुन्ना, नीबू, अमलाल, सियाराम, बच्चेलाल, हरी, गया, बिरजू, दीना, रामअधार सहित लगभग साठ लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुस चुका है।
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गांव के युवा सपा नेता मनोज यादव और ग्राम प्रधान संतोष यादव ने बताया कि प्रशासन की ओर से अभी तक राहत के नाम पर कुछ भी गांव वासियों को नहीं मिली है। गांव के लेखपाल भी कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। आरोप लगाया कि वह स्थलीय निरीक्षण करने के बजाय गांव के बाहर बने मंदिर पर बैठकर ही बाढ़ का जायजा ले रहे हैं।
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औड़िहार स्थित वराह भगवान और जौहरगंज के श्मशान घाट पर स्थित भगवान महाकाल के मंदिर भी बाढ़ से घिर गया है। अंत्येष्टि का काम ऊपरी हिस्से में होने लगा है। वहीं वराह धाम मंदिर पर श्रद्धालुओं का आवागमन बंद कर दिया गया है। जबकि पटना स्थित रामानंद मठ का अधिकांश हिस्सा भी बाढ़ की चपेट में आ चुका है। वहीं हस्पतिवार को सैदपुर के उपजिलाधिकारी विक्रम सिंह ने बाढ़ से प्रभावित पटना गांव का जायजा लिया। सिधौना के पशु चिकित्सा अधिकारी डा. दीनदयाल की टीम ने शुक्रवार को गांव में कैंप लगाकर पशुओं का टीकाकरण कराया।
बाढ़ से प्रभावित गांवों में सांप, बिच्छू और गोह जैसे विषैले जीव-जंतुओं ने वृक्षों को अपना आशियाना बना लिया है। कुछ गांवों में इन्हें मकान की दीवारों पर चढ़ते हुए देखा जा रहा है। चारो तरफ भय का माहौल बना हुआ है जिससे लोग चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि गंगा और गोमती में बढ़ा जलस्तर 2013 की बाढ़ की याद दिला रहा है।