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जिला अस्पताल को नहीं कराया गया सैनिटाइज, बढ़ा खतरा
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गाजीपुर। कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए एक तरफ जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गंभीर हैं तो दूसरी तरफ जिला अस्पताल प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है। यह लापरवाही इस कदर बढ़ती जा रही है कि उपचार के लिए आने वाले मरीजों के संक्रमित होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। वजह दो कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मौत के बाद न तो अस्पताल परिसर को सैनिटाइज कराया गया और न ही इनके संपर्क में आए स्वास्थ्य कर्मियों व डाक्टरों को क्वारंटीन ही किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर अमल करें तो करीब 15 दिन पूर्व बाराचवर के देहंदू गांव निवासी एक होमियोपैथिक चिकित्सक को सांस लेने में दिक्कत होने पर उपचार के लिए उन्हें जिला अस्पताल लाया गया था। इस बीच डाक्टरों द्वारा उनका उपचार करने के साथ स्वैब की जांच भी कराई गई थी तब रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। जब हालत गंभीर हुई तो उन्हें दूसरे दिन वाराणसी भेजा गया, जहां बीएचयू के डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस मरीज के उपचार के दौरान डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी संपर्क में आए थे, लेकिन उन्हें क्वारंटीन करना तो दूर पूरे अस्पताल को सैनिटाइज तक नहीं किया गया। नगर के नवापुरा कचहरी की रहने वाली संक्रमित महिला की मौत जिला अस्पताल में हो गई थी, लेकिन अभी तक जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से संक्रमण से बचाव के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में इनकी निष्क्रियता कहीं अन्य मरीजों के लिए मुसीबत न बन जाए।
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स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर अमल करें तो करीब 15 दिन पूर्व बाराचवर के देहंदू गांव निवासी एक होमियोपैथिक चिकित्सक को सांस लेने में दिक्कत होने पर उपचार के लिए उन्हें जिला अस्पताल लाया गया था। इस बीच डाक्टरों द्वारा उनका उपचार करने के साथ स्वैब की जांच भी कराई गई थी तब रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। जब हालत गंभीर हुई तो उन्हें दूसरे दिन वाराणसी भेजा गया, जहां बीएचयू के डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस मरीज के उपचार के दौरान डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी संपर्क में आए थे, लेकिन उन्हें क्वारंटीन करना तो दूर पूरे अस्पताल को सैनिटाइज तक नहीं किया गया। नगर के नवापुरा कचहरी की रहने वाली संक्रमित महिला की मौत जिला अस्पताल में हो गई थी, लेकिन अभी तक जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से संक्रमण से बचाव के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में इनकी निष्क्रियता कहीं अन्य मरीजों के लिए मुसीबत न बन जाए।
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