{"_id":"58ee7a114f1c1b9f36cf7e2b","slug":"only-eight-nursing-home-are-register-in-ghazipur-district","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सावधान! जांच कर कराएं इलाज, जिले में मात्र आठ नर्सिंग होम हैं पंजीकृत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सावधान! जांच कर कराएं इलाज, जिले में मात्र आठ नर्सिंग होम हैं पंजीकृत
ब्यूरो,अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Thu, 13 Apr 2017 12:33 AM IST
विज्ञापन
अस्पताल
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा अपने ढर्रे पर ही चल रहा है। गाजीपुर जिले में दर्जनों निजी नर्सिंग होम बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे हैं।
इनकी संख्या यहां 40 से अधिक है। जबकि स्वास्थ्य विभाग में केवल आठ नर्सिंग होम ही पंजीकृत हैं। बिना पंजीकरण संचालित हो रहे तथा मानक को पूरा न करने वाले निजी नर्सिंग होमों पर नकेल कसने में स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से विफल है।
इनके चलते अपंजीकृत निजी नर्सिंग होम के चंगुुल में फंसने से मरीजों और उनके परिजनों का जमकर आर्थिक शोषण हो रहा है।
स्वास्थ्य महकमे के नाक के नीचे सब कुछ होने के बाद भी अधिकारी मूक दर्शक बने हुए हैं।
इतना ही नहीं विभाग के पास बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे निजी नर्सिंग होमों की सूची भी उपलब्ध नहीं है। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में निजी नर्सिंग होम का लेखा-जोखा रखने वाले बाबू/कर्मचारी और उनके उच्चाधिकारी भी इसकी सूची मौजूद न होने की बात बता, अपना पल्ला झाड़ दे रहे हैं।
विज्ञापन
विभाग की ओर से बिना लाइसेंस संचालित निजी नर्सिंग होमों पर कार्रवाई न करने से संचालक बेखौफ हो इसे चला रहे हैं। देखा जाए तो जिला मुख्यालय सहित तहसील तथा नगर पालिका/नगर पंचायतों में 40 से अधिक निजी नर्सिंग होम बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं।
जबकि विभाग इनकी संख्या बताने में अनभिज्ञता जता रहा है। देखा जाए तो बिना लाइसेंस संचालित हो रहे निजी नर्सिंग होमों पर पिछले एक साल के अंदर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा अपने ढर्रे पर ही चल रहा है। विभाग के अपने ढर्रे पर चलने के चलते मरीजों का आर्थिक शोषण होने के साथ ही बेहतर चिकित्सकीय सुविधा न मिलने से उन्हें काल का ग्रास भी बनना पड़ता है। बिना लाइसेंस धड़ल्ले से चल रहे इन निजी नर्सिंग होमों के चंगुल में फंसने से मरीजों और उनके परिजनों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
बावजूद स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से निष्क्रिय बना हुआ है। इस संबंध में सीएमओ जेएम त्रिपाठी ने बताया कि 30 अप्रैल तक निजी नर्सिंग होमों को लाइसेंस नवीनीकरण के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से बिना लाइसेंस धड़ल्ले से चल रहे निजी नर्सिंग होमों के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
इनकी संख्या यहां 40 से अधिक है। जबकि स्वास्थ्य विभाग में केवल आठ नर्सिंग होम ही पंजीकृत हैं। बिना पंजीकरण संचालित हो रहे तथा मानक को पूरा न करने वाले निजी नर्सिंग होमों पर नकेल कसने में स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से विफल है।
विज्ञापन
इनके चलते अपंजीकृत निजी नर्सिंग होम के चंगुुल में फंसने से मरीजों और उनके परिजनों का जमकर आर्थिक शोषण हो रहा है।
स्वास्थ्य महकमे के नाक के नीचे सब कुछ होने के बाद भी अधिकारी मूक दर्शक बने हुए हैं।
इतना ही नहीं विभाग के पास बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे निजी नर्सिंग होमों की सूची भी उपलब्ध नहीं है। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में निजी नर्सिंग होम का लेखा-जोखा रखने वाले बाबू/कर्मचारी और उनके उच्चाधिकारी भी इसकी सूची मौजूद न होने की बात बता, अपना पल्ला झाड़ दे रहे हैं।
विज्ञापन
विभाग की ओर से बिना लाइसेंस संचालित निजी नर्सिंग होमों पर कार्रवाई न करने से संचालक बेखौफ हो इसे चला रहे हैं। देखा जाए तो जिला मुख्यालय सहित तहसील तथा नगर पालिका/नगर पंचायतों में 40 से अधिक निजी नर्सिंग होम बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं।
जबकि विभाग इनकी संख्या बताने में अनभिज्ञता जता रहा है। देखा जाए तो बिना लाइसेंस संचालित हो रहे निजी नर्सिंग होमों पर पिछले एक साल के अंदर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा अपने ढर्रे पर ही चल रहा है। विभाग के अपने ढर्रे पर चलने के चलते मरीजों का आर्थिक शोषण होने के साथ ही बेहतर चिकित्सकीय सुविधा न मिलने से उन्हें काल का ग्रास भी बनना पड़ता है। बिना लाइसेंस धड़ल्ले से चल रहे इन निजी नर्सिंग होमों के चंगुल में फंसने से मरीजों और उनके परिजनों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
बावजूद स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से निष्क्रिय बना हुआ है। इस संबंध में सीएमओ जेएम त्रिपाठी ने बताया कि 30 अप्रैल तक निजी नर्सिंग होमों को लाइसेंस नवीनीकरण के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से बिना लाइसेंस धड़ल्ले से चल रहे निजी नर्सिंग होमों के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दो साल पहले हुई थी कार्रवाई
दो साल पहले मुहम्मदाबाद और जमानिया क्षेत्र में बिना लाइसेंस संचालित हो रहे निजी नर्सिंग होम पर स्वास्थ्य महकमे की टीम तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने छापेमारी की थी। इसे लेकर जब परिजन और स्थानीय लोगों के तरफ से हो-हल्ला मचाया गया, तब जाकर स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ। आनन-फानन में विभाग की ओर से बिना लाइसेंस धड़ल्ले से संचालित निजी नर्सिंग होम संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। लेकिन पुलिस प्रशासन की ओर से सक्रियता न दिखाने पर मामला ठंडे बस्ते में चला गया।