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Ghazipur News: रेडियोलॉजिस्ट नहीं, अल्ट्रासाउंड जांच 6 महीने से ठप, 5 किमी गोराबाजार जा रही गर्भवती महिलाएं

Sun, 19 Jul 2026 01:52 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jul 2026 01:52 AM IST
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No radiologist; ultrasound services stalled for six months; pregnant women traveling 5 km to Gorabazar.
गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज के 100 बेड महिला अस्पताल में करीब 25 वर्ष बाद 2025 में सितंबर में संचालित अल्ट्रासाउंड जांच करीब छह महीने से ठप पड़ी हुई है। ऐसे में महिला मरीजों को निजी केंद्रों और करीब पांच किमी दूर गोराबाजार स्थित मेडिकल पुरुष अस्पताल तक भागदौड़ करनी पड़ रही है। रेडियोलॉजिस्ट की कमी से समस्या गहरा गई है। प्रतिदिन करीब 30 महिला मरीजों को इधर-उधर भागदौड़ करने के साथ ही आर्थिक दंश भी झेलना पड़ रहा है।
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महिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 450 से 500 महिला मरीज उपचार को पहुंचते हैं। इसमें 12 से 15 सिजेरियन प्रसव और आठ से दस सामान्य प्रसव प्रतिदिन होता है। रेडियोलॉजी विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें पांच किमी की दूरी तय कर गोराबाजार 200 बेड पुरुष अस्पताल तक जाना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी का सामना तो गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ रही है। ऐसे में प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। एक तरफ तरफ पुरुष अस्पताल तक आवागमन करने में जहां मरीजों को किराए का दंश तो दूसरी तरफ निजी केंद्रों पर पैसे खर्चकर अल्ट्रासाउंड जांच कराने को विवश होना पड़ रहा है। बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रशासन रेडियोलॉजिस्ट विशेषज्ञों की कमी बताकर और शासन को पत्र लिखने की बातकर पल्ला झाड़ ले रहा है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था शुरू न होने से महिला मरीजों को राहत मिलती नहीं दिख रही है।
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रेडियोलॉजिस्ट की कमी के चलते अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था ठप है। इसके लिए शासन को भी पत्र लिखा गया है, लेकिन अब तक तैनाती नहीं हुई है। ऐसे में परेशानी बढ़ी है। - प्रोफेसर आनंद मिश्रा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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निजी केंद्रों पर 700 से 800 रुपये करना पड़ता है भुगतान

महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा ठप होने से महिला मरीजों को निजी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड के लिए 700 से 800 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। पैसा देने के बाद भी इन निजी केंद्रों पर घंटों इंतजार करना पड़ता है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि अधिकांश निजी केंद्रों बिना रेडियोलॉजी विशेषज्ञों के ही संचालित होती है, जिससे रिपोर्ट को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी रहती है।

लंबे समय बाद अल्ट्रासाउंड जांच शुरू हुई तो थोड़ी राहत मिली, लेकिन छह माह से जांच ठप होने से निजी केंद्रों के तरफ रुख करना पड़ रहा है। ऐसे में आर्थिक दंश झेलना पड़ रहा है। - दीपक उपाध्याय, शास्त्रीनगर

अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा न होने से सबसे अधिक परेशानी रात के समय प्रसव को पहुंचने वाली गर्भवती मरीजों को उठानी पड़ती है। अल्ट्रासाउंड जांच न होने से गर्भ में बच्चे की जानकारी सटीक न मिलने से दिक्कत होती है।- मीरा देवी, फुल्लनपुर


ग्रामीण इलाकों के सीएचसी पर तो अल्ट्रासाउंड की जांच की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में जिला मुख्यालय पर स्थापित महिला अस्पताल में जांच की व्यवस्था न होने से तीमारदारों को आर्थिक दंश झेलना पड़ रहा है।-अभिषेक पांडेय, देवकली
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