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Ghazipur News: न जांच न कार्रवाई, हाईवे पर डरा रहे ओवरलोड वाहन

Thu, 09 Oct 2025 11:24 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 09 Oct 2025 11:24 PM IST
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No investigation, no action, overloaded vehicles are a threat on the highway
मरदह बस स्टैंड से गुजरता ओवरलोड भारी वाहन। संवाद
गाजीपुर। जिले से दो एनएच और एक फोरलेन मार्ग गुजरता है, जो रात में ओवरलोड वाहनों से गुलजार रहता है। इन पर सड़क तल से 12 से 18 फीट ऊंचाई तक ट्रक, ट्रेलर की बॉडी में माल लादकर बड़े वाहन दो मंजिला इमारत की तरह चल रहे हैं। इनके बगल से गुजरने वाले छोटे चार पहिया वाहनों में सवार लोगों की रूह कांप उठती है। ये तीनों मार्ग करीब 11 थानाें के क्षेत्र में आते है।जिले की सीमा से वाराणसी-गोरखपुर फोरलेन गुजरा है, जो सैदपुर, नंदगंज, मरदह, बिरनो, दुल्हपुर और जंगीपुर थाना क्षेत्र से होकर गुजरा है। इसके अलावा एनएच 31 पर मुहम्मदाबाद भांवरकोल थाना है। वहीं सुहवल, रेवतीपुर और गहमर थाना क्षेत्र होकर एनएच 124 सी ताड़ीघाट-बारा होते हुए बिहार के लिए जाता है। इस मार्गों पर ओवरलोड वाहनों की मनमानी रहती है।इलाकाई लोगों का कहना है कि हाईवे पर दो मंजिला इमारत की तरह चल रहे तिरपाल से ढके यह बड़े वाहन कब कहां झटका खाकर पलट जाएं, कुछ कहा नहीं जा सकता है। सरकारी सिस्टम ने इन्हें खुली छूट दे रखी है। कभी 18 से 22 चक्का वाले ट्रेलर ढाले की ऊंचाई से अधिक ओवरलोड काली गिट्टी लेकर चलते है, तो कहीं फुल बॉडी वाले 14 चक्के वाले ट्रक 15 से 20 फुट ऊंचाई तक सामान लादकर चलते है। कुछ वाहन मालिक नाम न छापने की शर्त पर तो यहां तक बताते हैं कि हाईवे पर चलने वाले ओवरलोड भारी वाहनों को बड़े माफिया का संरक्षण रहता है। विभिन्न विभागों के अधिकारियों को भी यह पता रहता है। हां इतना जरूर है कि विभागवार इन वाहनों के कोड का पीडीएफ रहता है। इसके हिसाब से जिम्मेदारों को हिस्सा पहुंचता रहता है।
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कोड न मिलने पर होती है कार्रवाई-परिवहन विभाग रोजाना ओवरलोड एवं डग्गामार वाहनों पर कार्रवाई का दावा करता है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि केवल उन्हीं वाहनों पर कार्रवाई होती है जिनके पास विभागीय एजेंटों का कोड नहीं होता है। पीडीएफ फाइल से मिलान करने पर जब कोड नहीं मिलता है तो ऐसे वाहनों पर कार्रवाई करके रस्म पूरी कर ली जाती है। दूसरा यह कि जिस भारी वाहनों के स्वामी अभी रसूख नहीं बना पाए हैं उनके वाहन भी कार्रवाई की जद में आ जाते हैं।
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रसूखदारों के वाहनों को हाथ नहीं लगाते जिम्मेदार
विभागीय जानकार बताते हैं कि ओवरलोड गिट्टी, मोरंग, सीमेंट, सरिया, अनाज, ऑटो पार्ट्स आदि सामग्री लेकर चलने वाले ट्रक या ट्रेलर काफी रसूख वालों के होते हैं। सरकारी सिस्टम से जुड़े लोग यदि इन्हें छेड़ेंगे तो उन्हीं पर दांव उलटा पड़ जाएगा। इसीलिए परिवहन विभाग, पुलिस की टीम भी इन वाहनों को नहीं छेड़ती है।
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अधिक भार पड़ने पर टूटती हैं सड़कें-लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता बीएल गौतम ने बताया कि फोरलेन सड़क की क्षमता 50 से 60 टन तक सहन करने की होती है। लोडर वाहनों के एक्सल और पहियों की संख्या पर माल का वजन निर्भर होता है। 22 चक्के वाली लंबे एक्सल की गाड़ी है तो 50 से 60 टन माल लेकर चल सकती है। लेकिन, 14 चक्का ट्रक, 12 चक्का वाले डंपर आदि इतना माल लेकर चलेंगे तो अधिक भार पड़ने से सड़कें क्षतिग्रस्त होती है।
समय-समय पर ओवरलोड वाहनों की चेकिंग की जाती है और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है। हाईवे पर विभागीय टीम नियमित कार्रवाई भी करती है। -धनवीर यादव, एआरटीओ, गाजीपुर।

ओवरलोड वाहनों की पुलिस द्वारा लगातार चेकिंग की जाती है। साथ ही संदेह होने पर कार्रवाई भी जाती है। इसके अलावा आरटीओ के साथ मिलकर भी पुलिस कार्रवाई करती है।-अतुल कुमार सोनकर, एएसपी, ग्रामीण
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