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आजमगढ़ में जीत से यादवों का बड़ा चेहरा बनेंगे निरहुआ

Sun, 26 Jun 2022 11:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jun 2022 11:30 PM IST
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Nirhua will become a big face of Yadavs with victory in Azamgarh
आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में भाजपा के दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ की जीत से गृह जनपद में एक ही चर्चा है कि निरहुआ डटल रहे। एक दशक पहले गाजीपुर के टडवां गांव के रहने वाले दिनेश लाल यादव ने भोजपुरी गायन के क्षेत्र में निरहुआ सटल रहे गाना से अपनी पहचान बनाई। उस समय भोजपुरी के लोगों ने उसे सम्मान में आ को जोड़कर निरहु की जगह निरहुआ कहना शुरू किया। तब से दिनेश लाल यादव निरहुआ नाम से प्रचलित हो गये।
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सिनेमा के बाद राजनीति में परचम लहराने वाले निरहुआ की सफलता को 2024 से भी जोड़कर देखा जा रहा है। लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि दिनेश लाल यादव गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया, मऊ समेत कई जिलों में यादवों को लुभा पाने में सफलता अर्जित करेंगे। यह बड़ा सवाल है। हालांकि, सपा के गढ़ आजमगढ़ के किला को ध्वस्त करना भाजपा के लिए कई संकेत है। जिसे बड़े राजनीतिक परिवर्तन के तौर पर देखा जा रहा है। क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ की सभी 10 सीटों पर सपा का दबदबा रहा। जिस सीट से पिछले लोकसभा चुनाव 2019 में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा के प्रत्याशी रहे दिनेश लाल यादव को पटकनी दी थी। उसी सीट से 2014 में मुलायम सिंह यादव सांसद चुने गए थे। उस सीट पर 2022 के उपचुनाव में निरहुआ के जीत के कई मायने हैं।
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पहली बात कि आजमगढ़ में भाजपा ने निरहुआ के बहाने यादव वोट में सेंधमारी की है। अगर गाजीपुर लोकसभा की बात की जाए तो यहां चार लाख के करीब यादव वोट हैं। 2019 में भाजपा प्रत्याशी मनोज सिन्हा ने यादव वोट में सेंधमारी के प्रयास काफी प्रयास किये थे। विभिन्न पार्टियों से कई यादव नेता उस समय भाजपा में लाए गये थे, लेकिन लोकसभा चुनाव में वे सपा के वोट में सेंधमारी करने में सफलता नहीं दिला सके। यही हाल बीते विधानसभा चुनाव में भी हुआ। गाजीपुर में यादव, राजभर और मुस्लिम वोट एकमुश्त होकर सपा को मिला और सपा ने जनपद की सभी सातों सीट पर कब्जा जमाने में सफलता अर्जित की थी। इस बार भी भाजपा का जातिगत चेहरा इन वोटों को तोड़ पाने में सफल नहीं हुआ।
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बहरहाल, निरहुआ के गानों और लोकप्रियता उनकी जाति में काफी रही है। वो अपनी यादव की देशज छवि को भोजपुरी सिनेमा तक ले जाने में सफल हुए हैं। इसी को देखते हुए भाजपा ने 2019 में उन पर आजमगढ़ से प्रत्याशी बनाकर दांव खेला था और 2022 के उपचुनाव में फिर उतारकर सपा के अखाड़े में धर्मेंद यादव को चुनौती दी। जिसमें भाजपा को सफलता मिली। ऐसे में निरहुआ की सदन में इंट्री 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए पूर्वांचल में नई राजनीति के संकेत दे रहे हैं।
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