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बाहर की लिख रहे दवाएं, एविल, टिटनेस तक का इंजेक्शन नहीं

Thu, 26 May 2022 11:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 26 May 2022 11:27 PM IST
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Medicines being prescribed outside, not even injection of anvil, tetanus
सरकारी अस्पतालों में धड़ल्ले से मरीजों को बाहर की दवाइयां लिखी जा रही है। वजह दवाइयों और इंजेक्शन की अनुपलब्धता है। जिला अस्पताल में स्थिति तो यह है कि टिटनेस का इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं हैं। वहीं सीएचसी-पीएचसी की हालत तो और भी खराब है। यहां उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को दवा के लिए निजी मेडिकल स्टोर तक दौड़ लगानी पड़ रही है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि शिकायत पर मेडिकल कारपोरेशन से सप्लाई बंद का हवाला देकर अधिकारी अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।
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जिले के सरकारी अस्पतालों की बात की जाए तो सबसे पहले नगर में स्थापित जिला और महिला अस्पताल की बात सामने आती है। अस्पताल प्रशासन दावा करता है कि वर्तमान समय में 135 प्रकार की दवाइयां और 15 प्रकार के इंजेक्शन उपलब्ध हैं। जबकि स्थिति तो यह है दुर्घटना में घायल, आग में झुलसे अथवा किसी जानवर के हमले से घायल मरीज जब उपचार करने आपात कक्ष में पहुंचते हैं तो उनके तीमारदारों से टिटनेस और एविल का इंजेक्शन मंगाया जाता है। अस्पताल प्रशासन मेडिकल कारपोरेशन से दवा उपलब्ध न होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। वहीं दवाइयों की बात की जाए तो शायद ही यहां गंभीर बीमारियों की दवाई मिलती है। चिकित्सकों द्वारा भी पर्चे पर बाहर की दवाई लिखकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। टिटनेस एवं एविल इंजेक्शन करीब डेढ़ माह से उपलब्ध नहीं हैं। जबकि सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। सिर्फ यहां बुखार और सर्दी- खांसी की दवा ही मिल पाती है। जबकि अन्य दवाइयों एवं इंजेक्शन के लिए निजी मेडिकल स्टोर का सहारा लेना पड़ता है, जिससे मरीजों को आर्थिक दंश भी झेलना पड़ता है। बावजूद भी इस व्यवस्था का दुरुस्त करने में अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। इस संबंध में सीएमएस डा. राजेश सिंह ने बताया कि अब दवाइयां मेडिकल कारपोरेशन की ओर से उपलब्ध कराई जाती है। फिलहाल 135 प्रकार की दवाई और 15 इंजेक्शन उपलब्ध है। जो दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रही है, उसके लिए पत्र लिखा गया है।
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