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गाजीपुर में मेडिकल की पढ़ाई किताबी कम क्लिनिक ज्यादा करने की तैयारी
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महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में अत्याधुनिक तरीके से शिक्षा दी जाएगी। पारंपरिक किताबी शिक्षा से परे व्यवहार आधारित शिक्षा मेडिकल के विद्यार्थियों को दी जागी। दिसंबर में मेडिकल कालेज में पहले बैच की पढ़ाई शुरू होनी है। इसके पहले ही नए पाठ्यक्रम को ऑनलाइन अपलोड करने का कार्य चल रहा है। पहले वर्ष में विद्यार्थियों को क्लिनिकल इंटरेक्शन (व्यवहार आधारित चिकित्सा) शिक्षा देने की रूपरेखा तैयार की गई है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की मानें तो प्रथम वर्ष का सत्र शुरू होने से 15 दिन पूर्व एक वर्ष के पाठ्यक्रम को वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा। ताकि इसी आधार पर पूरे साल की पढ़ाई कराई जा सके। इसके लिए कक्षाएं भी व्यावहारिक स्तर पर शिक्षा के लिए डिजाइन की जा रही हैं। इसके लिए महाविद्यालय की तरफ से एक समिति गठित की गई है। तैयार पाठ्यक्रम को पहले इस समिति के सामने रखा जाएगा। यानी कक्षाएं शुरू होने से पूर्व पाठ्यक्रम संबंधी प्रक्रिया पूरी कर वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा। कुल मिलाकर व्यवस्था यह की जा रही है कि प्रथम वर्ष के छात्रों को किताबी ज्ञान कम प्रायोगिक और व्यावहारिक स्तर पर अधिक शिक्षा दी जाए।
मेडिकल कॉलेज की कक्षाओं और प्रयोगशाला को आधुनिक तरीके से डिजाइन किया गया है। कॉलेज के लेक्चर थियेटर को जिला अस्पताल और महिला अस्पताल से इंटरनेट के जरिए जोड़ दिया जाएगा। व्यवस्था ऐसी होगी कि ऑपरेशन या किसी प्रकार के इलाज का लाइव प्रसारण सीधे मेडिकल कॉलेज लैब के डिस्प्ले पर आएगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज में चार लेक्चर रूम तैयार हो रहे हैं। दो लेक्चर रूम बनकर तैयार हैं और अगले 15 दिनों में दो अन्य भी चालू हालत में कॉलेज प्रशासन को सुपुर्द किए जाएंगे। वहीं, छात्रों का रुझान व्यावहारिक शिक्षा की तरफ करने के लिए एक ही क्लास में डाक्टर, सर्जन, मेडिसिन के जानकार, बच्चों के डॉक्टर सहित अन्य विशेषज्ञ भी रहेंगे और वे सभी छात्रों को एक विषय के प्रत्येक पहलू की जानकारी देंगेे।
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मेडिकल कालेज में प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर सहित अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति हो गई है। सभी पदों को मिलाकर कर्मचारियों की संख्या सौ से अधिक है।
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ब्लड बैंक में साल के अंत तक लगेगा सेपरेटर
जिला अस्पताल में ब्लड सेपरेटर लगाने का काम 30 दिसंबर तक कर दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अस्पताल में मशीन आ गई है। मशीन लगने के बाद रक्त में से प्लाज्मा, श्वेत रक्त और लाल रक्त को अलग-अलग किया जा सकेगा। इससे मरीजों को जिसकी जरूरत होगी उसे उपलब्ध कराया जाएगा। इससे रक्त चढ़ाने से मरीजों को होने वाली मौत पर अंकुश लगेगा।
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दो वर्षों से मेडिकल की पढ़ाई का तरीका बदला है। अभी भी कुछ मेडिकल कालेज परंपरागत तरीकों से किताबी ज्ञान दे रहे हैं। इससे हटकर स्थानीय मेडिकल कॉलेज पढ़ाई कराएगा। पूरी पढ़ाई क्लिनिकल इंटरेक्शन पर आधारित होगा। 15 दिसंबर तक प्रत्येक सुविधा तैयार मिलेंगी।-डॉ. आनंद मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन की मानें तो प्रथम वर्ष का सत्र शुरू होने से 15 दिन पूर्व एक वर्ष के पाठ्यक्रम को वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा। ताकि इसी आधार पर पूरे साल की पढ़ाई कराई जा सके। इसके लिए कक्षाएं भी व्यावहारिक स्तर पर शिक्षा के लिए डिजाइन की जा रही हैं। इसके लिए महाविद्यालय की तरफ से एक समिति गठित की गई है। तैयार पाठ्यक्रम को पहले इस समिति के सामने रखा जाएगा। यानी कक्षाएं शुरू होने से पूर्व पाठ्यक्रम संबंधी प्रक्रिया पूरी कर वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा। कुल मिलाकर व्यवस्था यह की जा रही है कि प्रथम वर्ष के छात्रों को किताबी ज्ञान कम प्रायोगिक और व्यावहारिक स्तर पर अधिक शिक्षा दी जाए।
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मेडिकल कॉलेज की कक्षाओं और प्रयोगशाला को आधुनिक तरीके से डिजाइन किया गया है। कॉलेज के लेक्चर थियेटर को जिला अस्पताल और महिला अस्पताल से इंटरनेट के जरिए जोड़ दिया जाएगा। व्यवस्था ऐसी होगी कि ऑपरेशन या किसी प्रकार के इलाज का लाइव प्रसारण सीधे मेडिकल कॉलेज लैब के डिस्प्ले पर आएगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज में चार लेक्चर रूम तैयार हो रहे हैं। दो लेक्चर रूम बनकर तैयार हैं और अगले 15 दिनों में दो अन्य भी चालू हालत में कॉलेज प्रशासन को सुपुर्द किए जाएंगे। वहीं, छात्रों का रुझान व्यावहारिक शिक्षा की तरफ करने के लिए एक ही क्लास में डाक्टर, सर्जन, मेडिसिन के जानकार, बच्चों के डॉक्टर सहित अन्य विशेषज्ञ भी रहेंगे और वे सभी छात्रों को एक विषय के प्रत्येक पहलू की जानकारी देंगेे।
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मेडिकल कालेज में प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर सहित अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति हो गई है। सभी पदों को मिलाकर कर्मचारियों की संख्या सौ से अधिक है।
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ब्लड बैंक में साल के अंत तक लगेगा सेपरेटर
जिला अस्पताल में ब्लड सेपरेटर लगाने का काम 30 दिसंबर तक कर दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अस्पताल में मशीन आ गई है। मशीन लगने के बाद रक्त में से प्लाज्मा, श्वेत रक्त और लाल रक्त को अलग-अलग किया जा सकेगा। इससे मरीजों को जिसकी जरूरत होगी उसे उपलब्ध कराया जाएगा। इससे रक्त चढ़ाने से मरीजों को होने वाली मौत पर अंकुश लगेगा।
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दो वर्षों से मेडिकल की पढ़ाई का तरीका बदला है। अभी भी कुछ मेडिकल कालेज परंपरागत तरीकों से किताबी ज्ञान दे रहे हैं। इससे हटकर स्थानीय मेडिकल कॉलेज पढ़ाई कराएगा। पूरी पढ़ाई क्लिनिकल इंटरेक्शन पर आधारित होगा। 15 दिसंबर तक प्रत्येक सुविधा तैयार मिलेंगी।-डॉ. आनंद मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।