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Ghazipur News: गुरु वंदना से गूंज उठे मठ और आश्रम
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(फोटो भी)
महामंडलेश्वर भवानीनंदन बोले, किसी को भी ज्ञान देने का कार्य गुरु ही कर सकता है
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। गुरु की वंदना से सोमवार को जिले के विभिन्न मठ, आश्रम एवं गुरु स्थान गूंज उठे। गुरु पूजन के पर्व गुरु पूर्णिमा शहर सहित जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्ण श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न मठ, आश्रम एवं गुरु स्थानों पर बड़ी संख्या में शिष्य एवं अनुयायियों ने पहुंचकर अपने गुरु के दर्शन-पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया। पर्व पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। सत्संग में गुरुओं ने शिष्यों को गुरु की महिमा का बखान किया।
अतिप्राचीन उदासीन मठ पोस्ताघाट पर शिष्यों ने गुरु का पूजन-अर्चन एवं दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मठ के महंत वासुदेवानंद दास महाराज ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार गुरु पूर्णिमा को महाभारत के रचयिता वेदव्यास का जन्म दिवस माना जाता है। उनके सम्मान में इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। शास्त्रों में यह भी कहा जाता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन ही महर्षि वेदव्यास ने चारों वेद की रचना की थी। प्रसाद वितरण करने में कुलदीप सिंह, प्रशांत सिंह, विक्रम सिंह, अजित चौबे आदि शामिल थे।
रायगंज स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में गुरु पूर्णिमा श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय के वरिष्ठ आचार्य नागेंद्रनाथ पांडेय ने कहा कि आज गुरु को अपनी मर्यादा और शिष्य को अपनी गुरु भक्ति की कड़ी को मजबूत करने की आवश्यकता है। तभी गुरु-शिष्य परंपरा समाज में दिखाई देगी और सशक्त समाज का निर्माण होगा। इस मौके पर प्रधानाचार्य दाऊजी उपाध्याय उपस्थित थे।
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सिद्धपीठ हथियाराम मठ एवं भुडकुड़ा मठ पर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में शिष्य पहुंचे थे। सिद्धपीठ हथियाराम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर महंथ भवानीनंदन यति महाराज ने अपने गुरु बालकृष्ण यति के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित करते हुए गुरु पूजन किया। इसके बाद शिष्य श्रद्धालुओं ने पीठाधीश्वर भवानीनंदन यति महाराज का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद ग्रहण किया।
इस मौके पर महामंडलेश्वर ने बताया कि परमात्मा को जानने के लिए गुरु की आवश्यकता होती है। किसी को भी ज्ञान देने का कार्य गुरु, सद्गुरु ही कर सकता है। इस अवसर पर मानस कथाकार डॉ. मंगला सिंह, डॉ. सानंद सिंह, डॉ. संतोष यादव, डॉ. रत्नाकर त्रिपाठी, जितेंद्र सिंह, स्वामी अभयानंद यती, रणजीत सिंह, लौटू प्रजापति, जंगीपुर के विधायक डा. वीरेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में शिष्य श्रद्धालु उपस्थित थे।
देर शाम तक लोगों ने प्रसाद के साथ ही महाप्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में काशी से आए आचार्य पंडित विनोद कुमार उपाध्याय ने मंत्रोच्चार के साथ ही मंगलाचरण पाठ किया। सिद्धपीठ भुडकुड़ा मठ पर पीठाधीश्वर शत्रुघ्नदास महाराज ने सिद्धपीठ में समाधिस्थ सिद्ध संतों भीखा साहब, गुलाल साहब आदि का आरती पूजन किया। इसके बाद शिष्यों ने पीठाधीश्वर शत्रुघ्नदास महाराज का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया।
औड़िहार संवाददाता के अनुसार सैदपुर क्षेत्र के मुड़ियार स्थित अघोर पीठ आश्रम पर भक्तों को दीक्षा देते हुए महंत धर्म रक्षित राम ने कहा यह शरीर नश्वर है बार-बार नहीं मिलता। ऐसे में जीवन को सार्थक बनाना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
देवकली संवाददाता के अनुसार चकेरी धाम पर महंथ संत त्रिवेणीदास महाराज के नेतृत्व में पर्व मनाया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गुरु परमात्मा का रूप होता है जो जीव एवं परमात्मा के बीच सेतु का काम करता है। जयप्रकाश दास फलहारी ने कहा कि परमात्मा कहीं बाहर नहीं वह हमारे अंदर मौजूद हैं जिसे सच्चा सदगुरु ही दिखा सकता है। रामघाट फुलवारी आश्रम एवं तुलसीपुर में शिवपूजन दास महाराज के आश्रम में गुरु पूर्णिमा धूमधाम के साथ मनाया गया।
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महामंडलेश्वर भवानीनंदन बोले, किसी को भी ज्ञान देने का कार्य गुरु ही कर सकता है
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। गुरु की वंदना से सोमवार को जिले के विभिन्न मठ, आश्रम एवं गुरु स्थान गूंज उठे। गुरु पूजन के पर्व गुरु पूर्णिमा शहर सहित जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्ण श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न मठ, आश्रम एवं गुरु स्थानों पर बड़ी संख्या में शिष्य एवं अनुयायियों ने पहुंचकर अपने गुरु के दर्शन-पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया। पर्व पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। सत्संग में गुरुओं ने शिष्यों को गुरु की महिमा का बखान किया।
अतिप्राचीन उदासीन मठ पोस्ताघाट पर शिष्यों ने गुरु का पूजन-अर्चन एवं दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मठ के महंत वासुदेवानंद दास महाराज ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार गुरु पूर्णिमा को महाभारत के रचयिता वेदव्यास का जन्म दिवस माना जाता है। उनके सम्मान में इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। शास्त्रों में यह भी कहा जाता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन ही महर्षि वेदव्यास ने चारों वेद की रचना की थी। प्रसाद वितरण करने में कुलदीप सिंह, प्रशांत सिंह, विक्रम सिंह, अजित चौबे आदि शामिल थे।
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रायगंज स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में गुरु पूर्णिमा श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय के वरिष्ठ आचार्य नागेंद्रनाथ पांडेय ने कहा कि आज गुरु को अपनी मर्यादा और शिष्य को अपनी गुरु भक्ति की कड़ी को मजबूत करने की आवश्यकता है। तभी गुरु-शिष्य परंपरा समाज में दिखाई देगी और सशक्त समाज का निर्माण होगा। इस मौके पर प्रधानाचार्य दाऊजी उपाध्याय उपस्थित थे।
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सिद्धपीठ हथियाराम मठ एवं भुडकुड़ा मठ पर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में शिष्य पहुंचे थे। सिद्धपीठ हथियाराम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर महंथ भवानीनंदन यति महाराज ने अपने गुरु बालकृष्ण यति के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित करते हुए गुरु पूजन किया। इसके बाद शिष्य श्रद्धालुओं ने पीठाधीश्वर भवानीनंदन यति महाराज का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद ग्रहण किया।
इस मौके पर महामंडलेश्वर ने बताया कि परमात्मा को जानने के लिए गुरु की आवश्यकता होती है। किसी को भी ज्ञान देने का कार्य गुरु, सद्गुरु ही कर सकता है। इस अवसर पर मानस कथाकार डॉ. मंगला सिंह, डॉ. सानंद सिंह, डॉ. संतोष यादव, डॉ. रत्नाकर त्रिपाठी, जितेंद्र सिंह, स्वामी अभयानंद यती, रणजीत सिंह, लौटू प्रजापति, जंगीपुर के विधायक डा. वीरेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में शिष्य श्रद्धालु उपस्थित थे।
देर शाम तक लोगों ने प्रसाद के साथ ही महाप्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में काशी से आए आचार्य पंडित विनोद कुमार उपाध्याय ने मंत्रोच्चार के साथ ही मंगलाचरण पाठ किया। सिद्धपीठ भुडकुड़ा मठ पर पीठाधीश्वर शत्रुघ्नदास महाराज ने सिद्धपीठ में समाधिस्थ सिद्ध संतों भीखा साहब, गुलाल साहब आदि का आरती पूजन किया। इसके बाद शिष्यों ने पीठाधीश्वर शत्रुघ्नदास महाराज का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया।
औड़िहार संवाददाता के अनुसार सैदपुर क्षेत्र के मुड़ियार स्थित अघोर पीठ आश्रम पर भक्तों को दीक्षा देते हुए महंत धर्म रक्षित राम ने कहा यह शरीर नश्वर है बार-बार नहीं मिलता। ऐसे में जीवन को सार्थक बनाना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
देवकली संवाददाता के अनुसार चकेरी धाम पर महंथ संत त्रिवेणीदास महाराज के नेतृत्व में पर्व मनाया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गुरु परमात्मा का रूप होता है जो जीव एवं परमात्मा के बीच सेतु का काम करता है। जयप्रकाश दास फलहारी ने कहा कि परमात्मा कहीं बाहर नहीं वह हमारे अंदर मौजूद हैं जिसे सच्चा सदगुरु ही दिखा सकता है। रामघाट फुलवारी आश्रम एवं तुलसीपुर में शिवपूजन दास महाराज के आश्रम में गुरु पूर्णिमा धूमधाम के साथ मनाया गया।