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मंडी परिसर और विद्यालय भवन को कटान पीड़ितों से पूरी तरह से कराया गया खाली
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विधानसभा चुनाव को देखते हुए यूसुफपुर मंडी समिति, प्राथमिक विद्यालय मुहम्मदाबाद एवं जूनियर हाईस्कूल मुहम्मदाबाद को कटान पीड़ितों से खाली करा दिया गया। मंडी समिति और विद्यालय में आठ वर्षों से कटान पीड़ित रह रहे थे। बलिया लोकसभा क्षेत्र में आने वाले जिले के दो विधानसभा क्षेत्रों मुहम्मदाबाद एवं जहूराबाद की मतगणना इस बार यूसुफपुर मंडी समिति में ही होगी। पिछले दिनों मतगणना स्थल का निरीक्षण करने आए जिलाधिकारी ने मंडी समिति और दोनों विद्यालयों को खाली कराने का निर्देश दिया था।
वर्ष 2012 में सात परिवार एवं 2013 में 558 परिवारों का आशियाना गंगा की धाराओं में विलीन हो गया था। बेघर हुए लोगों को प्राथमिक विद्यालय मुहम्मदाबाद, जूनियर हाईस्कूल मुहम्मदाबाद एवं यूसुफपुर मंडी समिति के भवनों में बनाए गए विस्थापित केंद्रों में रखा गया। शहरी क्षेत्र में सरकारी पक्के भवन, मुफ्त की बिजली, पानी की सुविधा के चलते कटान पीड़ित इन भवनों से जाना नहीं चाहते थे। जबकि शेरपुर गांव के जलालपुर मौजे में जमीन खरीदकर 377 परिवारों को आवास के लिए भूमि आवंटित की गई। कुछ लोग वहां चले गए लेकिन सरकारी पक्के मकान पर कब्जा जमाए कटान पीड़ित जलालपुर की भूमि को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बताकर वहां जाने से इंकार करते रहे। वर्ष 2017 और 2019 में हुए चुनाव के समय भी विद्यालय भवन खाली कराने का प्रयास किया गया लेकिन इनके विरोध के चलते सिर्फ मतदान के दिन इनको परिसर से हट जाने का निर्देश देकर मतदान करा लिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों में इच्छा शक्ति की कमी के चलते कटान पीड़ितों से सरकारी भवनों को खाली नहीं कराया जा सका था। इस चुनाव में जिलाधिकारी के सख्त रुख को देखते हुए कटान पीड़ित भरे मन से अपना बोरिया बिस्तर लेकर चले गए हैं। जिलाधिकारी के इस निर्णय से प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक काफी खुश हैं। वजह इनके रहने से बच्चों की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था।
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वर्ष 2012 में सात परिवार एवं 2013 में 558 परिवारों का आशियाना गंगा की धाराओं में विलीन हो गया था। बेघर हुए लोगों को प्राथमिक विद्यालय मुहम्मदाबाद, जूनियर हाईस्कूल मुहम्मदाबाद एवं यूसुफपुर मंडी समिति के भवनों में बनाए गए विस्थापित केंद्रों में रखा गया। शहरी क्षेत्र में सरकारी पक्के भवन, मुफ्त की बिजली, पानी की सुविधा के चलते कटान पीड़ित इन भवनों से जाना नहीं चाहते थे। जबकि शेरपुर गांव के जलालपुर मौजे में जमीन खरीदकर 377 परिवारों को आवास के लिए भूमि आवंटित की गई। कुछ लोग वहां चले गए लेकिन सरकारी पक्के मकान पर कब्जा जमाए कटान पीड़ित जलालपुर की भूमि को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बताकर वहां जाने से इंकार करते रहे। वर्ष 2017 और 2019 में हुए चुनाव के समय भी विद्यालय भवन खाली कराने का प्रयास किया गया लेकिन इनके विरोध के चलते सिर्फ मतदान के दिन इनको परिसर से हट जाने का निर्देश देकर मतदान करा लिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों में इच्छा शक्ति की कमी के चलते कटान पीड़ितों से सरकारी भवनों को खाली नहीं कराया जा सका था। इस चुनाव में जिलाधिकारी के सख्त रुख को देखते हुए कटान पीड़ित भरे मन से अपना बोरिया बिस्तर लेकर चले गए हैं। जिलाधिकारी के इस निर्णय से प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक काफी खुश हैं। वजह इनके रहने से बच्चों की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था।
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